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हर तरफ बेवफाई से तंग आकर रेस्टोरेंट संचालक ने प्रेमिका को गोली मारने के बाद खुद को मारी थी गोली

Wed, 14 Apr 2021 01:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Apr 2021 01:01 AM IST
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after murder of his lover he commited suicide
लखनऊ। कैंट के एनसीसी मेस के पास सोमवार रात को बंद कार में मिले प्रेमी युगल के शव की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस के मुताबिक, संजय निगम ने पहले आशा को गोली मारी थी। इसके बाद खुद को गोली से उड़ाया था। पुलिस ने मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराकर परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया। वहीं कार में मिले दो पेज के सुसाइड नोट में संजय को हर तरफ से मिली बेवफाई का दर्द साफ छलक रहा था। इसी कारण उसने यह कदम उठाया था।
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एडीसीपी पूर्वी एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, संजय निगम कैंट के रामदास हाता का रहने वाला था। उसका कैंट इलाके में शेफ किचन के नाम से एक रेस्टोरेंट है। पूछताछ में सामने आया है कि 16 साल पहले संजय अपनी पत्नी से अनबन के बाद अलग हो गया था। पत्नी के साथ उसकी बेटी व बेटे रहते हैं। वे दोनों भी संजय से कोई ताल्लुक नहीं रखते थे।
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संजय का आरोप है कि इसी बीच उसकी रामदास हाता स्थित मकान में किराए पर रहने वाली आशा से मुलाकात हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई। धीरे-धीरे नजदीकी बढ़ गई। हालात यह हो गए कि आशा के परिवारीजन भी उसके घर आने जाने लगे। कुछ न कुछ मदद के नाम पर वे संजय से रुपये लेकर चले जाते थे। उधर कारोबार भी संजय की पत्नी ने अपने कब्जे में ले लिया था। आय का कोई खास साधन नहीं था। मकान से जो किराया मिलता था, उसी से काम चलाता था।
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आशा के इलाज में खर्च कर दिए लाखों रुपये
पुलिस के मुताबिक, संजय ने सुसाइड नोट में लिखा था कि आशा को हेपेटाइटिस बी की बीमारी थी। उसके इलाज में लाखों रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद भी उसके भाइयों ने उससे लाखों रुपये की वसूली की। इससे वह काफी परेशान हो गया था। संजय ने सुसाइड नोट में लिखा है कि आशा से उसकी मुलाकात 1997 में हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती और प्यार हो गया। आशा का परिवार तालकटोरा इलाके में रहता है। उसके माता-पिता तक मेरे घर आते थे। लेकिन मुझे आशा ने भी धोखा दे दिया।

‘ए’ अक्षर नहीं सूट किया
संजय के सुसाइड नोट में लिखा था कि कुछ दिन पहले से आशा से बातचीत बंद हो गई थी। उसे मंदिर पर मिलने के लिए बुलाया था। वह नहीं आई। अब सिर्फ मोबाइल पर बातें होती हैं। संजय ने नोट में लिखा था कि उसकी पत्नी और प्रेमिका दोनों के नाम ‘ए’ अक्षर से शुरू होते हैं। उसे ‘ए’ अक्षर के नाम सूट ही नहीं किए। पत्नी से शादी नहीं चली तो प्रेमिका भी दूर चली गई। अब मैं जिंदगी से थक गया हूं। यह सब मेरी जिंदगी की सच्चाई है। इसके लिए कोई दोषी नहीं है। मैं अपनी जिंदगी से तंग आ गया हूं। सुसाइड नोट लिखने के बाद संजय ने आशा को बुलाया। उसके साथ कुछ देर तक कार में बैठा रहा। पुलिस के मुताबिक, उसने आशा को गोली मारी फिर खुद को उड़ा लिया।
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