नौकरी के 10 साल बाद होगा तबादला!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिविल पुलिस में 10 साल से ज्यादा की सेवा कर चुके सिपाही का यूपी पुलिस रेग्युलेशन प्रावधानों के तहत विभाग की अन्य शाखा में तबादला किया जा सकता है।
हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने सिपाहियों के सेवा संबंधी मामले में यह अहम फैसला दिया है। साथ ही अदालत ने कहा है कि राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) पुलिस की एक शाखा है।
ऐसे में 10 साल से ज्यादा सिविल पुलिस में सेवा कर चुके सिपाही का जीआरपी में तबादला किए जाने की मनाही नहीं की जाएगी और यह यूपी पुलिस रेग्युलेशन 525 का पालन किए जाने के अधीन होगा।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, लखनऊ बेंच के वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह और न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की पूर्ण पीठ ने यह फैसला सिपाहियों के सेवा संबंधी मामले में लंबित विशेष अपील में उठाए गए दो सवालों का जवाब देकर शुक्रवार को सुनाया।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के ही दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इस विशेष अपील पर सुनवाई के दौरान मामले में दो कानूनी सवाल उठाकर गौर किए जाने को इन्हें तीन न्यायाधीशों की पूर्णपीठ को सुपुर्द किए जाने के आदेश दिए थे।
इनमें पहला सवाल था कि क्या सिविल पुलिस में 10 साल से अधिक सेवा कर चुके सिपाही को सुप्रीम कोर्ट की एक नजीर व यूपी पुलिस रेग्यूलेशन 525 के प्रावधानों के मद्देनजर, पुलिस की अन्य शाखा में स्थानांतरित नही किया जा सकता है।
दूसरा सवाल था कि क्या जीआरपी और सिविल पुलिस एक काडर गठित करते हुए या फिर ये अलग-अलग सर्विस-काडर बनाते हैं।
अदालत के सामने उठाया गया विरोधाभास, यूपी पुलिस- रेग्युलेशंस के रेग्यूलेशन संख्या 525 के प्रावधानों के इर्द-गिर्द घूमने वाला था । पक्षों के अपने -अपने तर्क इन प्रावधानों को लेकर थे।
पूर्णपीठ ने संबंधित कानूनी प्रावधानों व विधि व्यवस्थाओं को फैसले में विस्तृत व्याख्या कर खंडपीठ द्वारा भेजे गए संदर्भ का जवाब दे दिया है।
साथ ही पूर्णपीठ ने इस विशेष अपील को समुचित खंडपीठ के समक्ष पेश किए जाने के निर्देश दिए हैं। यह स्पेशल अपील वर्ष 2011 में सिपाही ओमप्रकाश सिंह व अन्य ने दायर की थी।