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नोटबंदी से महंगा हो जाएगा यूपी विधानसभा चुनाव: सर्वे

Tue, 27 Dec 2016 02:32 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 27 Dec 2016 02:32 AM IST
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adr election watch report on up election
नोटबंदी - फोटो : amar ujala

नोटबंदी के कारण यूपी में होने वाला विधानसभा चुनाव और महंगा हो जाएगा। पिछले चुनावों के मुकाबले प्रत्याशियों को करीब 10 फीसदी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

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कालेधन के ठेकेदारों व संभावित प्रत्याशियों ने चुनाव में कालाधन खपाने के रास्ते खोज लिए हैं। यह निष्कर्ष एडीआर-इलेक्शन वॉच के नोटबंदी का चुनाव पर असर को लेकर कराए गए सर्वे में सामने आए हैं।
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सूबे के 30 विधानसभा क्षेत्रों में करीब नौ हजार लोगों पर किए गए सर्वे में संभावित प्रत्याशियों व पार्टी नेताओं में से 69 फीसदी ने माना कि नोटबंदी का चुनाव प्रचार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ज्यादातर लोगों ने अपने कालेधन सफेद कर लिए हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें मोटी रकम चुकानी पड़ी है।
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प्रत्याशियों ने कर लिए जुगाड़
यूपी इलेक्शन वॉच के मुख्य संयोजक संजय सिंह ने पत्रकारों को बताया कि सर्वे में प्रत्याशियों ने माना कि सवा लाख रुपये के पुराने नोट देकर एक लाख रुपये नई करेंसी में मिले हैं। सर्वे में एक भी प्रत्याशी ने यह नहीं कहा कि नोटबंदी से उसे चुनाव लड़ने में दिक्कत आएगी।

नोटबंदी के बाद पैदा हो गए नए किस्म के दलाल

adr election watch report on up election

नोटबंदी के कारण कई नए किस्म के दलाल पैदा हो गए हैं। प्रत्याशियों ने तो अभी से बिचौलियों को पैसे तक दे दिए हैं।

बैनर-पोस्टर व अन्य प्रचार सामग्री छापने वाले बड़े पब्लिकेशन हाउस को भी पुराने नोटों में रकम पहले से दे दी गई है। इसके साथ ही अमीरों से चुनावी चंदा लेने का स्वरूप बदलेगा। पैसों के बजाय संसाधन की मदद चुनाव में ली जाएगी।

लेकिन आम जनता ने माना, चुनाव प्रचार पर पड़ेगा असर
संभावित प्रत्याशियों के उलट, आम आदमी ने सर्वे में माना है कि चुनाव प्रचार में नोटबंदी का खासा असर पड़ेगा।

80 फीसदी लोगों ने कहा कि प्रचार में काफी कठिनाई होगी, जबकि 20 फीसदी ने कहा कि कोई दिक्कत नहीं आएगी। सर्वे में बैनर व होर्डिंग वाले 70 फीसदी व्यापारियों ने माना कि ग्राहक कम हो गए हैं।

30 विधानसभा क्षेत्रों में हुआ सर्वे

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लखनऊ, झांसी, बांदा, कानपुर, मेरठ, बनारस, गोरखपुर, इलाहाबाद, आगरा और बरेली मंडल की 30 विधानसभा सीटों पर एडीआर की रिसर्च टीम के सदस्यों ने संभावित प्रत्याशियों, पार्टी पदाधिकारियों और चुनाव में काम करने वाले कारोबारियों व कार्यकर्ताओं से सवाल पूछे और प्रश्नावली भरवाई।

इस तरह प्रत्याशी जुटाएंगे चंदा
इस बार प्रत्याशी नोटबंदी के कारण जनता से भी सहयोग लेंगे। अमीरों से चंदा एकत्र करेंगे। ब्लैक मनी को पार्टी फंड में डोनेट करवाएंगे। इसके साथ ही ब्लैक मनी वालों से डोनेशन भी लेंगे।

जन-धन में भी जमा हुआ चुनावी पैसा

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नोटबंदी को लेकर यूपी विधानसभा चुनाव में पड़ने वाले असर पर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रे‌टिक रिफॉर्म्स (एडीआर) इलेक्‍शन वॉच के सर्वे में सामने आया कि बड़ी मात्रा में चुनावी पैसा जन-धन खातों में जमा कराया गया है।

संभावित प्रत्याशियों व पार्टियों ने तमाम कालाधन चुनाव खर्च के रूप में एडवांस दे दिया है। गाड़ियां, कीमती सामान, साड़ियों और मोबाइल आदि की खरीद कर ली है। सर्वे से यह भी पता चला कि चुनाव में मीडिया पर भी अघोषित रूप से खर्च किया जाएगा जिसमें सोशल मीडिया की भी बड़ी हिस्सेदारी होगी।

धर्म व जाति का अधिक होगा इस्तेमाल, बढ़ सकता है क्राइम
संजय सिंह ने बताया कि चुनाव में धर्म व जाति का भी अधिक इस्तेमाल होगा। विभिन्न स्थानों पर प्रत्याशी भगवत कथा, भंडारा, राम कथा सहित तरह-तरह के धार्मिक आयोजन करवाने लगे हैं। वहीं, चुनाव में क्राइम बढ़ सकता है। वोटरों को डराया-धमकाया जा सकता है। इसलिए वे चुनाव आयोग को अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट देने के साथ ही ज्यादा सतर्कता बरतने की गुजारिश करेंगे।

इस तरह प्रत्याशी जुटाएंगे चंदा
इस बार प्रत्याशी नोटबंदी के कारण जनता से भी सहयोग लेंगे। अमीरों से चंदा एकत्र करेंगे। ब्लैक मनी को पार्टी फंड में डोनेट करवाएंगे। इसके साथ ही ब्लैक मनी वालों से डोनेशन भी लेंगे।

क्या होगी चुनाव प्रचार की रणनीति

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चुनाव में 70 फीसदी प्रत्याशी पुरानी रणनीति ही अपनाएंगे। इसके तहत घर-घर संपर्क करने के अलावा मीडिया व सोशल मीडिया का सहारा लेंगे। कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव प्रचार होगा। होर्डिंग, बैनर व पोस्टर का इस्तेमाल किया जाएगा। चुनावी सभाओं की भरमार होगी। आकर्षक योजनाओं की घोषणा के अलावा सेलिब्रिटी से प्रचार कराया जाएगा। भंडारों का भी आयोजन होगा।

सर्वे का सच
नोटबंदी का चुनाव प्रचार पर असर
कोई असर नहीं होगा--69 प्रतिशत
काफी असर होगा--22 प्रतिशत
कुछ कह नहीं सकते--9 प्रतिशत

वोटरों की खरीद-फरोख्त में असर
नहीं पड़ेगा असर--65 प्रतिशत
पड़ेगा असर--20 प्रतिशत
कुछ नहीं कह सकते--15 प्रतिशत

शराब, गहने व अन्य गिफ्ट बांटने पर असर
नहीं पड़ेगा असर--69 प्रतिशत
असर पड़ेगा--22 प्रतिशत
कुछ नहीं कह सकते--9 प्रतिशत

चुनाव जीतने की रणनीति
पुराने तरीके से ही लड़ेंगे चुनाव--70 प्रतिशत
घर-घर जाकर करेंगे संपर्क--20 प्रतिशत
कुछ नहीं कह सकते--10 प्रतिशत

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