साइलेंस जोन में शोर मचाया तो एक लाख जुर्माने के साथ होगी सजा
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स्कूल, अस्पताल और जू समेत साइलेंस जोन में आने वाले संस्थान के आसपास ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रशासन अब सीधी कार्रवाई करेगा।
ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों की धरपकड़ के लिए तीन सदस्यीय निगरानी दस्ता गठित होगा। मामला साबित होने पर ऐसे आरोपियों को पांच साल तक की जेल या एक लाख रुपये तक जुर्माने की सजा भुगतनी पड़ेगी।
साइलेंस जोन में वाहनों व अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के बढ़ते शोर पर लगाम कसने की यह कवायद जिला प्रशासन की टीम ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर शुरू करेगी।
जिला प्रशासन भी औचक निरीक्षण अभियान शुरू करेगा। ध्वनि प्रदूषण रोकने के प्रावधानों व नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए बनाए जाने वाले चेकिंग दस्ते में एडीएम स्तरीय अधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित क्षेत्र के थानाध्यक्ष, सीओ ट्रैफिक और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल रहेंगे।
आवाज वाले पटाखे छोड़ना भी है प्रतिबंधित
एडीएम प्रशासन राजेश पांडेय ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम को संचालित इस मुहिम को अगले सप्ताह से शुरू किए जाने की तैयारी है।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के आधार पर साइलेंस जोन क्षेत्र को परिभाषित किया गया है।
इसके तहत प्रमुख तौर से सभी छोटे बड़े अस्पताल, शैक्षिक संस्थान, न्यायालय परिक्षेत्र, प्राणी उद्यान और सीएम सचिवालय परिक्षेत्र के आस पास सौ मीटर तक के दायरे को साइलेंस जोन के तौर पर चिह्नित किया गया है।
एक्ट के तहत साइलेंस जोन घोषित इलाके में लाउडस्पीकर का प्रयोग, ढोल नगाड़ा पीटना, लगातार सामान्य अथवा प्रेशर हॉर्न बजाना और आवाज वाले पटाखे छोड़ना प्रतिबंधित है।