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महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामला: शिष्य आनंद गिरि के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज, सुसाइड नोट में था आरोप

Tue, 21 Sep 2021 05:43 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 21 Sep 2021 05:43 PM IST
सार

एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि महंत नरेंद्र गिरि के आत्महत्या मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने सुसाइड नोट में अपने शिष्य पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था।

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ADG law and order speaks suicide case of Mahant Narendra Giri.
नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या मामले की पुलिस हर कोण से जांच कर रही है। महंत ने सुसाइड नोट में शिष्य आनंद गिरि पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। प्रदेश के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही महंत के शव को रस्सी के फंदे से उतारा जा चुका था। उन्होंने सुसाइड नोट में शिष्य द्वारा प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। एडीजी के अनुसार, शिष्य आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

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एडीजी कानून व्यवस्था के अनुसार, शव को महंत नरेंद्र गिरि के अनुयायियों ने दरवाजा तोड़कर फंदे से उतारा। उनके कमरे से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें महंत के शिष्य आनंद गिरि की प्रताड़ना से परेशान होकर ऐसा कदम उठाने की बात कही गई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।
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पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया में यह खुदकुशी का मामला है। बाघंबरी मठ के समर्थकों को यह बात हजम नहीं हुई। उन्होंने गेट पर नारेबाजी करते हुए इसे हत्या का मामला बताया। इसी तरह निरंजनी अखाड़े के सचिव रहे महंत आशीष गिरि की मौत पर भी सवाल उठे थे। उनकी खून से लथपथ लाश उनके दारागंज स्थित कमरे में मिली थी। उस समय भी पुलिस ने कहा था कि उन्होंने पिस्टल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। आज तक पता नहीं चल पाया कि आशीष गिरि ने आत्महत्या क्यों की।

शिष्य के साथ लंबे समय से रहा है संपदा को लेकर विवाद

बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े की अकूत धन-संपदा और वैभव को लेकर विवादों का रिश्ता पुराना रहा है। मठ और अखाड़े की सैकड़ों बीघे जमीन बेचने, सेवादारों और उनके परिजनों के नाम मकान, जमीन खरीदने को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद लंबे समय से रहा है। ऐसे ही विवादों को लेकर निरंजनी अखाड़े के मठ में दो महंतों की संदिग्ध मौतें पहले भी हो चुकी हैं। अब नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर भी संपत्ति विवाद की गहरी जड़ें हर किसी का ध्यान खींच रही हैं।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि से उनके शिष्य योग गुरु आनंद गिरि के बीच विवाद बीते मई महीने में बाघंबरी गद्दी मठ की 80 फीट चौड़ी और 120 फीट लंबी गोशाला की भूमि की लीज निरस्त कराए जाने के बाद सामने आया। आनंद गिरि के नाम लीज पर दी गई इस जमीन पर पेट्रोल पंप प्रस्तावित किया गया। कुछ दिन बाद ही महंत नरेंद्र गिरि ने यह कहते हुए लीज निरस्त करा दी कि वहां पेट्रोलपंप नहीं चल सकता।

लीज पर देने और बेचने को लेकर हुआ था विवाद

महंत नरेंद्र गिरि ने यह भी तर्क दिया था कि उस जमीन पर मार्केट बसा दिया जाएगा तो मठ की आमदनी बढ़ेगी। जबकि आनंद गिरि का कहना था कि गुरुजी ने उस जमीन को बेचने के लिए लीज निरस्त कराई थी। बाघंबरी मठ की करोड़ों रुपये की इस जमीन को लेकर गुरु-शिष्य के बीच घमासान इस कदर मचा कि निरंजनी अखाड़े और बाघंबरी मठ से आनंद गिरि को निष्कासित कर दिया गया।

इसके बाद आनंद गिरि ने भागकर हरिद्वार में शरण ली। इतना ही नहीं, हरिद्वार में आनंद गिरि की ओर से बनवाए जा रहे आश्रम को भी वहां सील करवा दिया गया। उनके सुरक्षा गार्ड वापस ले लिए गए थे।

इससे पहले भी 40 करोड़ रुपये की बाघबंरी गद्दी मठ की सात बीघे भूमि बेचे जाने को लेकर हुए विवाद को लेकर वहां राइफलें तन चुकी हैं। इतना ही नहीं मांडा और रायबरेली में भी निरंजनी अखाड़े की करोड़ों की भूमि बेचे जाने को लेकर विवाद रहा है।

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