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Lucknow News: अंधेरा और बादल गरजने की आवाज के बीच शिव-शिव का उद्बोधन
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नाटक महादेव मंचन करते कलाकार।
लखनऊ। चारों तरफ अंधेरा, बादल के गरजने की आवाज और शिव-शिव का उद्बोधन...। दर्शकों ने यह नजारा गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के सभागार में नाटक महादेव मंचन के दौरान देखी, जहां शिव और सृष्टि का शानदार स्वरूप दर्शाया गया था। शांति के माहौल के बीच सभी दर्शकों की निगाहें सभागार में महादेव के मंचन पर टिकी रहीं।
मुंबई के कलाकारों और कारवां थिएटर की ओर से मंचित यह नाटक महिला शृंखला की कड़ी थी, जिसमें मयूरभंज छाऊ, मणिपुर मार्शल आर्ट और प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट कला का समावेश देखने को मिला। देश की लोक कला भी प्रदर्शित की गई। ये नाटक शासन और सामाजिक व्यवस्था पर आधारित थी। नाटक भगवान शिव को चित्रित करता है। बताया गया कि वह अपने सभी रूपों में आम आदमी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बाद समुद्र मंथन के दौरान, शिव ने दुनिया को बचाने के लिए जहर पीया था और इस प्रकार उन्हें नीलकंठी कहा जाता है।
समाज में द्वेष हिंसा एवं विश्वासघात का जहर है, उसको भी शिव ने मुस्कुराहट के साथ सब स्वीकार कर लिया। फिर भी शांतचित्त देवता के रूप में उनको माना जाता है। विध्वंसक, शिव के क्रोध के कारण उनसे डरता है। उनका क्रोध सर्वनाश कर सकता है इस संपूर्ण ब्रह्मांड का। और ये नीलकंठ बिल्कुल वही है जो एक आम आदमी हर दिन कठिनाई एवं संघर्ष रूपी विष पीता है। मंचन में हर मिनट में नाटक और समाज के बीच समानता दिखती है। नाटक प्रस्तुति में श्रेय यूनी प्लेयर अनामिका श्रीवास्तव, शैलेन्द्र कुमार, सिमरन अवस्थी, और रवि गुप्त का सहयोग रहा।
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मुंबई के कलाकारों और कारवां थिएटर की ओर से मंचित यह नाटक महिला शृंखला की कड़ी थी, जिसमें मयूरभंज छाऊ, मणिपुर मार्शल आर्ट और प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट कला का समावेश देखने को मिला। देश की लोक कला भी प्रदर्शित की गई। ये नाटक शासन और सामाजिक व्यवस्था पर आधारित थी। नाटक भगवान शिव को चित्रित करता है। बताया गया कि वह अपने सभी रूपों में आम आदमी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बाद समुद्र मंथन के दौरान, शिव ने दुनिया को बचाने के लिए जहर पीया था और इस प्रकार उन्हें नीलकंठी कहा जाता है।
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समाज में द्वेष हिंसा एवं विश्वासघात का जहर है, उसको भी शिव ने मुस्कुराहट के साथ सब स्वीकार कर लिया। फिर भी शांतचित्त देवता के रूप में उनको माना जाता है। विध्वंसक, शिव के क्रोध के कारण उनसे डरता है। उनका क्रोध सर्वनाश कर सकता है इस संपूर्ण ब्रह्मांड का। और ये नीलकंठ बिल्कुल वही है जो एक आम आदमी हर दिन कठिनाई एवं संघर्ष रूपी विष पीता है। मंचन में हर मिनट में नाटक और समाज के बीच समानता दिखती है। नाटक प्रस्तुति में श्रेय यूनी प्लेयर अनामिका श्रीवास्तव, शैलेन्द्र कुमार, सिमरन अवस्थी, और रवि गुप्त का सहयोग रहा।
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