युद्धबंदियों की पत्नियों को नहीं मालूम होता कि वे सुहागिन हैं या विधवा
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अमृता ने मीडिया को बताया कि धारावाहिक किसी सत्य कहानी पर आधारित नहीं है। यह कारगिल युद्ध के युद्धबंदियों नायब सूबेदार सरताज सिंह और स्क्वाड्रन लीडर इमान खान की जिंदगी की कहानी है, जो करीब 17 साल बाद घर लौटते हैं।
उनसे की जाने लगी नोट बदलवाने की मांग
हरलीन का पति सुहागरात पर कारगिल युद्ध के लिए चला गया था। वह बहादुरी से अपने लापता पति का इंतजार करती है। अमृता ने कहा कि इस भूमिका को निभाते हुए उन्हें युद्धबंदियों की पत्नियों की पीड़ा का अहसास हुआ। युद्धबंदियों की पत्नियों को नहीं मालूम होता कि वे सुहागिन हैं या विधवा।
राजधानी में अमृता पुरी उस समय मुश्किल में पड़ गईं, जब उनसे नोट बदलवाने की मांग की जानी लगी। अमृता एचडीएफसी बैंक के सीईओ एवं एमडी आदित्य पुरी की बेटी हैं। अमृता ने इसे हंस कर टालते हुए कहा कि पापा नेपाल में हैं। उन्होंने कहा कि मैं खुद नोट बदलने के लिए परेशान हूं।