पीपली लाइव के सीएम जुगुल किशोर नहीं रहे
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पीपली लाइव सहित ‘बाबर’, ‘मैं मेरी पत्नी और वो’, ‘कफन’ व ‘दबंग टू’ जैसी फिल्मों में सशक्त किरदार निभाने वाले अभिनेता व रंगकर्मी जुगुल किशोर नहीं रहे।
वह 61 वर्ष के थे। परिवारीजनों के अनुसार, रात करीब 7.30 बजे उन्हें असहजता और सीने में दर्द की शिकायत हुई, फिर उन्होंने उल्टियां की।
उन्हें चिकित्सक के पास ले जाया ही जा रहा था कि रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। समझा जा रहा है कि उनकी मृत्यु ह्रदयाघात से हुई।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी से नाट्यकला में डिप्लोमा प्राप्त किया। लगभग तीस वर्षों तक रंगमंच के क्षेत्र में अभिनय, निर्देशन, लेखन एवं अध्यापन करते रहे। जुगल किशोर ने विलुप्तप्राय लोकनाट्यों - भांड तथा बुंदेलखंड के तालबद्ध मार्शल आर्ट 'पई दंडा' को प्रेक्षागृही रंगमंच पर पहचान प्रदान की।
उन्होंने निर्देशक के रूप में नौटंकी शैली में प्रयोग किये तथा समसामयिक दृष्टि से अनेक राजनैतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विषयवस्तुओं पर केन्द्रित लगभग 30 नाटकों का निर्देशन किया।
जिनमें प्रमुख हैं - एक आतंकवादी की मौत, ताशों का देश, कालिगुला, अंधेर नगरी, खोजा नसीरूद्दीन, मटिया बुर्ज, तिकड़मबाज, अलीबाबा, आला अफसर, माखन चोर, होली, रात तथा अंधारयात्रा।
भारतेन्दु नाट्य अकादमी के रंगमंडल के कलाकारों और पारम्परिक नौटंकी कलाकारों के साथ 'सत्यवक्ता हरिश्चन्द्र' का प्रयोगशील मंचन कर उन्होंने एक मिसाल पेश की तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी के रंगमंडल प्रमुख के रूप में हिंदी कहानीकार अमरकांत की प्रसिद्ध कहानी 'हल होना एक कठिन समस्या का पर आधारित नाटक 'दाखला डॉट कॉम' का निर्देशन भी किया।
प्रेमचंद की कहानी पर आधारित प्रसिद्ध नाटक 'ब्रम्ह का स्वांग' के पूरे देश भर में 500 से अधिक मंचन किया, जिसकी प्रस्तुति उनको सम्मान प्रदान करने के साथ 26 नवम्बर की शाम सात बजे उन्नीसवे राष्ट्रीय नाट्य समारोह के उद्घाटन अवसर पर की जाएगी।
लगभग 30 नाटकों में उल्लेखनीय अभिनय किया
जुगलकिशोर ने लगभग 30 नाटकों में उल्लेखनीय अभिनय किया है, जिन्हें समीक्षकों द्वारा बार-बार सराहना प्राप्त हुई है, इनमें प्रमुख हैं - अंधेर नगरी, अंधा युग, उरूभंगम, जूलियस सीजऱ, गुफावासी, आधे अधूरे, गार्बो, राज़, ट्रोजन वूमन, वासांसि जीर्णानि, एंटीगनी तथा बाल्कन्स वूमेन आदि।
हिंदी, उर्दू एवं अंग्रेजी भाषा पर समान अधिकार प्राप्त जुगल किशोर ने दूरदर्शन की लगभग एक दर्जऩ प्रस्तुतियों में अभिनय किया है। निर्देशन एवं अभिनय के अलावा जुगलकिशोर ने अनेक पत्र-पत्रिकाओं और आकाशवाणी के लिए भारतीय और लोक रंगमंच पर लेखन भी किया।
साथ ही भारतेन्दु नाट्य अकादमी, महिला समाख्या और रामानन्द सरस्वती पुस्तकालय के लिए अनेक कार्यशालाओं का संचालन भी किया। वे सन् 1986 से 2012 तक भारतेन्दु नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन में अभिनय का अध्यापन कर रहे थे। रंगमंच के अलावा पर्दे पर भी आपने एक पहचान कायम की।
उन्होंने एक दर्जन से ज़्यादा हिंदी और भोजपुरी फीचर फिल्मों व टेलिफिल्मों में अभिनय किया, जिनमें पीपली लाइव, बब्बर, कॉफी हाउस, माई, मेरी पत्नी और वो, कफन, हमका अइसन वइसन ना समझा आदि उल्लेखनीय हैं। अभी-अभी उनकी दो बहुचर्चित फिल्में आ रही हैं - दबंग दो और अता पता लापता।
1993 में उन्होंने सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार गोल्डन लोटस से सम्मानित जी.वी.अय्यर की संस्कृत फिल्म 'श्रीमद् भगवद् गीता' के हिंदी संस्करण में भी सहयोग किया। 21 जनवरी 1954 को हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी से नाट्यकला में डिप्लोमा प्राप्त किया। लगभग तीस वर्षों से आप रंगमंच के क्षेत्र में अभिनय, निर्देशन, लेखन एवं अध्यापन कर रहे हैं।