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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   A woman's dead body found in a home in trivedinagar in Lucknow.

लखनऊ: बेटा-बहू कोविड अस्पताल में भर्ती, आठ घंटे तक घर में पड़ा रहा महिला का शव

Thu, 29 Apr 2021 04:26 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 29 Apr 2021 04:26 PM IST
सार

स्वास्थ्य विभाग ने दोपहर करीब 12 बजे शव वाहन अलॉट किया, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी बिना पुलिस के शव उठाने को राजी नहीं हुए। स्थानीय निवासी ने बताया कि कई बार थाने में संपर्क किया, लेकिन पुलिस नहीं आई।

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A woman's dead body found in a home in trivedinagar in Lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सरकारी विभागों की नाकामी से मंगलवार को घर में अकेली बुजुर्ग महिला का शव आठ घंटे तक पड़ा रहा। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अमर उजाला की पहल पर तीन लोग मदद के लिए आगे आए और वृद्धा का अंतिम संस्कार कराया।

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त्रिवेणी नगर-2 की माया सक्सेना (70) की मंगलवार सुबह मौत हो गई। बेटा विवेक व बहू अंजू कोविड पॉजिटिव हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए माया घर में अकेली थीं। पड़ोसियों को माया की मौत की खबर मिली तो स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम को शव ले जाने के लिए सूचना दी।
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स्वास्थ्य विभाग ने दोपहर करीब 12 बजे शव वाहन अलॉट किया, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी बिना पुलिस के शव उठाने को राजी नहीं हुए। स्थानीय निवासी पप्पू दीक्षित ने बताया कि कई बार थाने में संपर्क किया, लेकिन पुलिस नहीं आई।
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दोपहर करीब एक बजे हसनगंज कोतवाली के सिपाही नीरज कुमार सरोज व नईम खान आए, लेकिन शव उठवाने में मदद करने के बजाय सीमा विवाद उठाकर लौट गए। इससे आक्रोशित लोगों ने पुलिस कमिश्नर के नंबर पर कॉल कर शिकायत की। साथ ही मामले को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। 

पीपीई किट पहनकर उठाया शव

जानकारी मिलने पर अमर उजाला ने पहल करते हुए शवों के अंतिम संस्कार के काम में लगे इमदाद इमाम को सूचना दी। अमर उजाला से सूचना पाकर उनकी टीम के मेंहदी रजा, आबिद और जीशान खान मौके पर पहुंचे और पीपीपी किट पहनकर महिला के शव को एंबुलेंस में रखा। इसके बाद घर में ताला लगाकर चाबी मोहल्ले वालों को सौंपने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए।

करीब आठ घंटे की जद्दोजहद के बाद बुजुर्ग का अंतिम संस्कार हो सका। जीशान ने बताया कि वह और उनके दोस्त कोरोना काल में ऐसे लोगों की मदद कर रहे हैं। रोजा होने के बावजूद वह न सिर्फ जरूरतमंदों की मदद में लगे हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं।

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