लखनऊ। राजधानी स्थित राज्य ललित कला अकादमी के लाल बारादरी में रविवार को ‘कलादृश्य’ विषय पर आयोजित कला प्रदर्शनी समकालीन सृजन का जीवंत दस्तावेज बनकर सामने आई। कलरव, आईसा और जन संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में लगी इस प्रदर्शनी ने कला को केवल दृश्य अनुभव तक सीमित न रखकर, उसे समय की स्मृतियों, संघर्षों, संवेदनाओं और जन प्रतिरोध की अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी में कलाकारों, विद्यार्थियों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे आयोजन एक सशक्त जन-सांस्कृतिक संवाद में परिवर्तित हो गया।
राज्य ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. लालजीत अहीर ने कहा कि कला समाज की चेतना को दिशा देती है और भविष्य की सांस्कृतिक राह तय करती है। वहीं, वरिष्ठ कला समीक्षक शहंशाह हुसैन ने कलाकारों को असाधारण बताते हुए कहा कि वे अपनी कृतियों के माध्यम से अपने समय का इतिहास रचते हैं। प्रदर्शनी में चित्रकला, वस्त्र कला और मूर्तिकला सहित कुल 78 कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं, जिनमें 46 कलाकारों ने सहभागिता की।