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यूपी में बड़ा घोटाला, कागज पर फोरलेन सड़क बना हड़प लिए 455 करोड़ रुपये

Sat, 25 Feb 2017 10:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 25 Feb 2017 10:41 AM IST
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a scam on the name of four lane road.

यूपी स्टेट हाईवे अथॉरिटी के तहत फोरलेन सड़क बनाने को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। करीब 206 किमी लंबा फोरलेन बनाने का ठेका जिन कंपनियों को दिया गया, उन्होंने कागजों पर हाईवे बनाया और बैंक अफसरों की मिलीभगत से सरकार के 455 करोड़ रुपये डकार गए।

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यह फोरलेन दिल्ली-सहारनपुर से यमुनोत्री मार्ग (एनएच 57) पर बनना था। इस मामले में उप्सा के परियोजना महाप्रबंधक शिवकुमार अवधिया ने विभिन्न ठेकेदार कंपनियों के डायरेक्टर्स और बैंकों के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स समेत 18 लोगों के खिलाफ विभूतिखंड थाने में धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की एफआईआर दर्ज कराई है।
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परियोजना महाप्रबंधक ने बताया कि फोरलेन निर्माण का काम मेसर्स एसईडब्ल्यू-एसएसवाई हाइवेज लिमिटेड को दिया गया था। उप्सा ने इसके लिए कंपनी के प्रमोटर डायरेक्टर हैदराबाद की श्रीनगर कालोनी निवासी सुकरवा अनिल कुमार और अलोरी साईबाबा से एक अगस्त 2011 को एग्रीमेंट किया था।
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डायरेक्टर्स ने 30 मार्च 2012 को काम शुरू करके 900 दिन में काम पूरा करने का दावा किया। परियोजना की कीमत 1735 करोड़ रुपये थी।

14 बैंकों से लिया गया 1700 करोड़ लोन

a scam on the name of four lane road.
डेमो - फोटो : demo pic

बकौल परियोजना महाप्रबंधक, ठेकेदार कंपनी बैंकों से लोन लेकर परियोजना पूरी करती हैं। बाद में बैंक टोल टैक्स से अपनी रकम वसूलते रहते हैं। इस परियोजना के लिए कंपनी ने 14 बैंकों से 1700 करोड़ रुपये का लोन प्राप्त कर लिया।

कंपनी ने एक अप्रैल 2012 से काम शुरू कराया। यह बेहद धीमी गति से चला और नवंबर, 2013 में बंद हो गया। कंपनी के प्रमोटर डायरेक्टर्स ने पर्यावरण मंत्रालय से हाईवे पर लगे पेड़ काटने के लिए एनओसी के नाम पर अतिरिक्त समय मांगा तो राज्य प्राधिकरण ने 11 जून 2014 को कंपनी को फिर से 721 दिन का समय दिया। हालांकि, इसके बाद भी काम शुरू नहीं किया गया।

कैसे सामने आई गड़बड़ी

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demo pic

ठेकेदार कंपनी मेसर्स एसईडब्ल्यू-एसएसवाई हाइवेज लिमिटेड ने फोरलेन के लिए 14 बैंकों से 603,67,77,505 रुपये का लोन प्राप्त कर लिया। इस बीच राज्य प्राधिकरण ने स्वतंत्र अभियंता से निर्माण कार्य की जांच कराई तो पता चला कि कंपनी ने सिर्फ 148 करोड़ रुपये किए। यानी, पूरे काम का सिर्फ 13.33 फीसदी ही पूरा हुआ।

परियोजना महाप्रबंधक के अनुसार कंपनी के डायरेक्टर पीएस मूर्ति और यरलागदा वेंकटेश राव और प्रमोटर डायरेक्टर्स सुकरवा अनिल कुमार व अलोरी साईबाबा ने 14 बैंकों के प्रबंधकों से मिलकर 4554877505 रुपये का गबन किया है। गोमतीनगर सीओ सत्यसेन यादव ने कहा कि विवेचना ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर की जा रही है।

फिर से बनेगा प्रोजेक्ट, दोगुनी हो जाएगी लागत
परियोजना महाप्रबंधक ने बताया कि ठेकेदार कंपनी और बैंकों की लूट-खसोट का असर जनसुविधाओं पर पड़ रहा है। जनता को यातायात की असुविधा हो रही है। अब यह प्रोजेक्ट फिर से बनाना होगा। लागत भी दोगुनी हो जाएगी।

लोन के लिए बनाई जाली जांच रिपोर्ट

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दिल्ली-सहारनपुर से यमुनोत्री मार्ग (एनएच 57) पर 206 किमी के फोरलेन के लिए 455 करोड़ के घोटाले के लिए ठेका लेने वाली कंपनी और 14 बैंकों के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने जमकर खेल किया। ठेकेदार कंपनी मेसर्स एसईडब्‍ल्यू- एसएसवाई हाइवेज लिमिटेड कंपनी के प्रमोटर डॉयरेक्टर्स ने लोन लेने के लिए 17 मार्च 2012 को एक सामान्य लोन अनुबंध किया था।

बैंक से किए गए अनुबंध में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि लोन सिर्फ दिल्ली-सहारनपुर से यमुनोत्री सड़क को फोर लेन बनाने के लिए ही जारी किया जाएगा। नियमत: बैंकों के स्वतंत्र इंजीनियर लोन लेने वाली कंपनी की रिपोर्ट बनाते हैं। यही, स्वतंत्र इंजीनियर कंपनी के काम की निगरानी भी करते हैं।

उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही बैंक लोन जारी करने की कार्रवाई करता है। हालांकि इस मामले में बैंकों के अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद रही। बैंकों की तरफ से किसी भी स्वतंत्र इंजीनियर को फोर लेन के निर्माण कार्य की भौतिक स्थिति की निगरानी के लिए नहीं भेजा गया।

ठेकेदार कंपनी के लोगों ने बैंक के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से मिलकर लोन हड़पने की साजिश रची और जाली जांच रिपोर्ट तैयार कराई। कंपनी के अधिकारी बिना काम किए बैंकों का लोन डकारते रहे और बैंक के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे।

चार जिलों में बननी है 206 किमी लंबा फोर लेन

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डेमो

दिल्ली-सहारनपुर से यमुनोत्री मार्ग (एनएच 57) अभी दो लेन की है। परियोजना महाप्रबंधक ने बताया कि करीब 206 किमी लंबे इस मार्ग को फोर लेन बनाया जाना है। यह मार्ग चार जिलों गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर से होकर गुजरता है।

इन बैंकों से लिया गया अरबों का लोन
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इंडस्ट्रियल फाइनेंस शाखा, कॉरपोरेशन बैंक की कॉरपोरेट बैंकिंग शाखा, देना बैंक की कॉरपोरेट बिजनेस शाखा, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब नेशनल बैंक कॉरपोरेट शाखा, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद इंडस्ट्रियल फाइनेंस शाखा, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर इंडस्ट्रियल फाइनेंस शाखा, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला कॉरपोरेट शाखा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया इंडस्ट्रियल फाइनेंस शाखा और विजया बैंक इंडस्ट्रियल फाइनेंस शाखा।

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