{"_id":"69c83b389abbaf857708d6e3","slug":"a-petty-thief-narrowly-escaped-being-killed-in-an-encounter-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1666288-2026-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: मामूली चोर का एनकाउंटर होने से बचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: मामूली चोर का एनकाउंटर होने से बचा
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में माई फर्स्ट एनकाउंटर नाटक का मंचन करते कलाकार। -संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। प्रदेश में कानून व्यवस्था दुरूस्त रहे और शातिर अपराधियों के दिल में पुलिस का खौफ हो, इसलिए सीएम के आदेश पर जिलाधिकारी एक मीटिंग रखते है। इसमें एक आदेश पारित होता है कि सभी दरोगा अपने-अपने क्षेत्र में शातिर अपराधियों में से कम से कम अपराधी का एनकाउंटर करें। जिससे कानून व्यवस्था दुरुस्त हो। यह दृश्य वास्तविकता में नहीं बल्कि मंच पर उतरता है शनिवार शाम गोमतीनगर के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में। रोमांच से भरपूर इस कॉमिकल थ्रिलर नाट्य प्रस्तुति माई फर्स्ट एनकाउंटर को मंच पर उतारा सवेरा फाउंडेशन ने। इसे लिखा मो. अनवर बेग ने और निर्देशन किया श्रीपाल गौड़ ने।
मंच पर दिखाया जाता है कि इंस्पेक्टर विक्रम सिंह जिनकी पुलिस डिपार्टमेंट में नई जॉइनिंग हुई है, वह अपने थानाक्षेत्र में एनकाउंटर करना चाहते हैं और अपने सीनियर्स से राय-मशवरा करते हैं। फिर अपनी टीम के साथ मिलकर अपराधी की तलाश में लग जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उनका क्षेत्र अपराध मुक्त है। बस छोटी-मोटी चोरियां होती हैं। एक सीनियर की गलत सलाह पर वो फेक एनकाउंटर करने का फैसला करते हैं और एक मामूली चोर को निशाने पर लेते हैं। टीम के सभी पुलिसकर्मी मिलकर एक मामूली चोर को शातिर अपराधी दिखाने के चक्कर में तमाम जुगत लगाने लगते हैं।
इस दौरान जब वे खुद को ही फंसा हुआ देखते हैं तो हवलदार गुरुप्रसाद ही इंस्पेक्टर को समझाता है और उस शपथ की याद दिलाता है जो वर्दी पहनने के बाद ली गई थी। इसके बाद इंस्पेक्टर को अपनी गलती का अहसास होता है और वह फेक एनकाउंटर करने का इरादा बदल देता है। तभी उन्हें सूचना मिलती है कि उनके थाने को अपराधमुक्त घोषित किया गया है और उसे आदर्श थाने का दर्जा दिया गया है। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह का किरदार अभिषेक सिंह ने निभाया तो वहीं अन्य कलाकारों में अजय कुमार, संतोष प्रजापति, तरुण यादव, माही और मनोज तिवारी का अभिनय भी सराहनीय रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंच पर दिखाया जाता है कि इंस्पेक्टर विक्रम सिंह जिनकी पुलिस डिपार्टमेंट में नई जॉइनिंग हुई है, वह अपने थानाक्षेत्र में एनकाउंटर करना चाहते हैं और अपने सीनियर्स से राय-मशवरा करते हैं। फिर अपनी टीम के साथ मिलकर अपराधी की तलाश में लग जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उनका क्षेत्र अपराध मुक्त है। बस छोटी-मोटी चोरियां होती हैं। एक सीनियर की गलत सलाह पर वो फेक एनकाउंटर करने का फैसला करते हैं और एक मामूली चोर को निशाने पर लेते हैं। टीम के सभी पुलिसकर्मी मिलकर एक मामूली चोर को शातिर अपराधी दिखाने के चक्कर में तमाम जुगत लगाने लगते हैं।
विज्ञापन
इस दौरान जब वे खुद को ही फंसा हुआ देखते हैं तो हवलदार गुरुप्रसाद ही इंस्पेक्टर को समझाता है और उस शपथ की याद दिलाता है जो वर्दी पहनने के बाद ली गई थी। इसके बाद इंस्पेक्टर को अपनी गलती का अहसास होता है और वह फेक एनकाउंटर करने का इरादा बदल देता है। तभी उन्हें सूचना मिलती है कि उनके थाने को अपराधमुक्त घोषित किया गया है और उसे आदर्श थाने का दर्जा दिया गया है। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह का किरदार अभिषेक सिंह ने निभाया तो वहीं अन्य कलाकारों में अजय कुमार, संतोष प्रजापति, तरुण यादव, माही और मनोज तिवारी का अभिनय भी सराहनीय रहा।

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में माई फर्स्ट एनकाउंटर नाटक का मंचन करते कलाकार। -संवाद

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में माई फर्स्ट एनकाउंटर नाटक का मंचन करते कलाकार। -संवाद

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में माई फर्स्ट एनकाउंटर नाटक का मंचन करते कलाकार। -संवाद

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में माई फर्स्ट एनकाउंटर नाटक का मंचन करते कलाकार। -संवाद
विज्ञापन