4.5 लाख लेकर भी वेंटिलेटर हटाया, मरीज की मौत
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लोहिया अस्पताल के लालची सर्जन के हाथों एक युवक की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि फोर्ड हॉस्पिटल में इलाज में लापरवाही से एक मरीज ने दम तोड़ दिया।
इलाज के लिए 4.60 लाख रुपये देने के बावजूद डॉक्टरों ने मरीज का वेंटिलेटर हटा दिया। वेंटिलेटर हटते ही गिरधारी की हालत बिगड़ गई। परिवारीजन डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते रहे पर कोई भी डॉक्टर मरीज को देखने नहीं पहुंचा। आखिरकार उसका दम टूट गया।
इससे भड़के परिवारीजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की। मेन गेट, रिसेप्शन व फॉर्मेसी का शीशा, एलईडी टीवी और गमले तोड़ डाले। हंगामा होते देख डॉक्टर हॉस्पिटल से फरार हो गए। करीब साढ़े तीन घंटे तक अस्पताल से लेकर गोमतीनगर थाने तक हंगामा चलता रहा।
मौके पर पहुंची गोमतीनगर पुलिस ने समझा बुझाकर किसी तरह मामला शांत कराया। देर रात थाने में दोनों पक्ष बिना मामला दर्ज कराए वापस लौट गए।
चिनहट स्थित अहिमा देवरिया के रहने वाले हनुमान प्रसाद का बेटा गिरधारी यादव (18) सड़क हादसे में चोटिल हो गया था। 21 जुलाई को गोमतीनगर के फोर्ड हॉस्पिटल यूनिट ऑफ नोवा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
इलाज नहीं सिर्फ पैसा वसूलने में लगा था हॉस्पिटल
मृतक गिरधारी के भाई अमर सिंह ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टरों का ध्यान इलाज से ज्यादा पैसा वसूलने में था। इसी की वजह से भाई की मौत हो गई। अमर ने बताया कि सिर में चोट बताकर गिरधारी को आईसीयू वेंटिलेटर यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया। 29 जुलाई को गिरधारी की हालत सुधरी तो वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, तब तक इलाज के नाम पर चार लाख वसूल चुके थे।
डॉक्टर ने कहा वेंटिलेटर पर फिर भेजना पड़ेगा
अमर के अनुसार गिरधारी ठीक हो रहा था। तीन अगस्त को न्यूरो के डॉक्टर सुनील अग्रवाल राउंड पर आए और कहा, इसे फिर से वेंटिलेटर पर भेजना पड़ेगा। इसके बाद अचानक ही शनिवार रात तबियत खराब होने लगी। डॉक्टरों ने उसे फिर से वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया।
10 हजार अगले दिन देने पर बोले नहीं करेंगे इलाज
वेंटिलेटर पर शिफ्ट करने के कुछ घंटे के भीतर ही अस्पताल ने 50 हजार रुपये फिर जमा करने को कहा, तब वेंटिलेटर यूनिट में तैनात डॉक्टर और जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि बिना पैसा जमा किए इलाज नहीं होगा। इसके बाद शाम साढ़े छह बजे वेंटिलेटर से हटा दिया और गिरधारी ने दम तोड़ दिया।
अस्पताल का दावा, लापरवाही नहीं बरती
फोर्ड हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. पंचम सिंह ने कहा कि गिरधारी का इलाज कर रहे डा. सुनील अग्रवाल ने लापरवाही नहीं बरती। गिरधारी की हालत गंभीर थी। उसकी मौत के बाद परिवारीजनों को बताया गया, इसके बाद वेंटिलेटर हटाया गया।