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...बस एक झटके में ही बदल गया जिंदगी का 'फॉमूर्ला'

Mon, 23 Mar 2015 09:23 AM IST
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 23 Mar 2015 09:23 AM IST
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A man teels his story after Janta Express accident.

जनता एक्सप्रेस की बोगियों के बीच दबने से टूटी हड्डियों ने जो जख्म दिया है, वह जल्द भरने वाला नहीं है। कई जगह से टूटी हड्डियां रह-रहकर भयंकर दर्द दे रही हैं। खेतीबाड़ी और मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। अब कमर ही टूट गई तो चिंता सताने लगी है कि घर का खर्च कैसे चलेगा।

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रायबरेली के रहने वाले 50 वर्षीय अब्दुल हमीद शुक्रवार को मुरादाबाद से अपने घर जा रहे थे। अब्दुल बताते हैं, निगोहां आने पर घर फोन कर बताया कि एक घंटे में पहुंच जाएंगे। गाड़ी जब बछरावां पहुंचने वाली थी तो चाय पीने का मन बनाया, लेकिन पलक झपकते ही गाड़ी स्टेशन पार कर गई। इस बीच तेज धमाका हुआ। कुछ पता ही नहीं चला। जब आंख खुली तो खुद को ट्रॉमा सेंटर में पाया।
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बेड से उठने की कोशिश की तो शरीर ने साथ नहीं दिया। भाई मो. हनीफ ने बताया कि आराम करो, रीढ़ की हड्डी में चोट है। जांच में पता चला कि बैक बोन फ्रैक्चर हो गया है।
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शनिवार को डॉक्टरों ने तीन घंटे की सर्जरी की। उनका कहना है कि इलाज लंबा चलेगा। ऐसे में अब्दुल को अब चिंता सताने लगी है कि जब खुद ही नहीं चल पाएंगे तो घर का खर्च कैसे चलेगा। चार-चार बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का क्या होगा।

दर्द कम करने के लिए भी सहना पड़ रहा दर्द

A man teels his story after Janta Express accident.

इसी तरह ट्रॉमा के डिजास्टर वार्ड में भर्ती अमेठी के सौम्य सिंह के दोनों पैर टूट गए हैं। पढ़ाई के बाद नौकरी की तैयारी कर रहे सौम्य बताते हैं कि एक झटके में सब खत्म हो गया। चलना-फिरना तक दुश्वार हो गया है। सर्जरी तो हो गई है, लेकिन जख्म इतने गहरे हैं कि दर्द सहा नहीं जाता।

हादसे में घायल प्रतापगढ़ के मनोज बताते हैं कि अब तो दर्द से राहत के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन से भी डर लगने लगा है। दर्द को कम करने के लिए भी दर्द सहना पड़ रहा है। न जाने किस घड़ी में घर से निकले थे, जिसने जिंदगी का पूरा फॉर्मूला ही बदल दिया है।

मल्टीपल फ्रैक्चर का लंबा चलेगा इलाज
इस पर केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि मल्टीपल फ्रैक्चर के मरीजों का इलाज लंबा चलेगा। जब तक हड्डियां पूरी तरह जुड़ नहीं जातीं, तब तक सामान्य जीवन तो मुश्किल है पर समय के साथ जख्म जरूर भर जाएंगे।

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