आंगन में सो रहे किशोर को उठा ले गया तेंदुआ
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बलरामपुर के हरैया सतघरवा स्थानीय थाना क्षेत्र के रतनवां गांव में शनिवार की रात मां के साथ आंगन में सो रहे किशोर को तेंदुआ उठा ले गया। रविवार सुबह किशोर का शव गांव के बाहर गन्ने के खेत में मिला है।
इसी गांव के मजरे रमडिहवा में तेंदुए ने हमला कर एक बच्ची को घायल कर दिया है। तेंदुए के हमले से कई गांव के लोग दहशत में हैं। वन विभाग की टीम मौके पर छानबीन कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दे रही है।
रतनवा निवासी बरसाती ने बताया कि ग्राम महरिहवा जनपद श्रावस्ती निवासी उनका भांजा नबीउल्ला (13) अपनी मां के साथ ननिहाल आया था। शनिवार रात नबीउल्ला अपनी मां के साथ फूस के मकान के आंगन में सो रहा था।
देर रात जंगल से गांव में आया तेंदुआ फूस के मकान की टटिया तोड़कर घर में घुस गया और मां के साथ सो रहे नबीउल्ला को उठा ले गया। परिवारीजनों का शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर जुट गए और रात भर नबीउल्ला की तलाश करते रहे। रविवार की सुबह नबीउल्ला का शव गांव के बाहर गन्ने के खेत में मिला।
इससे पहले तेंदुए ने रतनवां के मजरे रमडिहवा निवासी वन विभाग के वाचर जंग बहादुर की बेटी सावित्री (8) को हमला कर घायल कर दिया। सावित्री अपने बाबा बालकराम के साथ जन्माष्टमी का कार्यक्रम देखने रतनवां जा रही थी।
बालकराम ने सावित्री को तेंदुए के चंगुल से छुड़ा लिया। घायल सावित्री को इलाज के लिए सीएचसी शिवपुरा में भर्ती कराया गया है। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग बनकटवा रेंज की टीम मौके पर पहुंचकर मामले की छानबीन में जुट गई है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। (फोटो में-किशोर की मौत के बाद शोकाकुल परिवार।)
पहले भी कई मासूम हो चुके शिकार
22 फरवरी-2014-लीलावती-4 वर्ष -बनकटी
1 सितम्बर-2014-छोटकऊ-12 वर्ष -दर्जीनियां
3 सितम्बर-2014-रेशमा उर्फ दुलारी-12 वर्ष-कुकुरभुकवा
13 सितम्बर-2015-नबीउल्ला-13 वर्ष-रतनवां
पकड़ा भी गया था तेंदुआ
गत वर्ष बरहवा रेंज के भदवार गांव के पास पिंजड़ा लगाकर वन विभाग ने एक तेंदुए को पकड़कर लखनऊ चिड़ियाघर भेजा था। क्षेत्र में लगातार हो रहे तेंदुए के हमले के बाद वन विभाग ने यह कार्रवाई की थी।
नरभक्षी नहीं है तेंदुआ
इस पर बलरामपुर के रेंजर बनकटवा के पीडी राय का कहना है कि जंगल के सीमावर्ती गांवों में तेंदुए के हमले अक्सर होते रहते हैं। बस्तियों में विचरण करना तेंदुओं की आदत में शुमार है। नरभक्षी तेंदुआ 28 दिन के अंदर ही दूसरा मानव शिकार जरूर करता है।
क्षेत्र में तेंदुए के हमले काफी अंतराल के बाद हुआ है इसलिए हमला करने वाले तेंदुए के नरभक्षी होने की संभावना बिल्कुल नहीं है। बीती रात तेंदुए के हमले में मारे गए नबीउल्ला के परिवारीजनों को विभाग द्वारा हर संभव मदद दी जाएगी। घायल सावित्री का इलाज भी विभाग द्वारा कराया जाएगा।(फोटो में-अपने पिता के साथ तेंदुए के हमले से घायल बच्ची।)