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Lucknow News: हास्य-व्यंग्य के रंगों से सजी महफिल
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हास्य-व्यंग्य के रंगों से सजी महफिल
लखनऊ। महानगर स्थित एक होटल में शनिवार को ‘दावत-ए-सुखन’ की महफिल सजी। इसमें शायरी और अदब के कई रंग देखने को मिले। देश के नामचीन शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
शबीना अदीब की पंक्तियां, अपना गम इस तरह थोड़ा कम कीजिए, दूसरों के लिए आंख नम कीजिए। कुछ गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे, आप अपनी जरूरत को कम कीजिए... ने श्रोताओं को संवेदना और जरूरतमंदों की मदद का संदेश दिया। हसन काजमी की पंक्तियों मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूं को भी खूब सराहना मिली।
हास्य कवि शंभू शिखर ने अपनी चुटीली रचना से खूब ठहाके लगवाए। जौहर कानपुरी की बुजुर्ग पिता को लेकर भावुक रचना ने श्रोताओं को संवेदनाओं से जोड़। इसके अलावा नदीम फर्रुख, वासिफ फारुकी, सर्वेश अस्थाना, प्रियांशु गजेंद्र, हेमंत पांडे, डॉ. सोनरूपा, राम प्रसाद बेखुद और फैज खुमार बाराबंकवी समेत कई रचनाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। आयोजक शादाब वारसी ने कहा कि ‘दावत-ए-सुखन’ सिर्फ साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है।
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शबीना अदीब की पंक्तियां, अपना गम इस तरह थोड़ा कम कीजिए, दूसरों के लिए आंख नम कीजिए। कुछ गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे, आप अपनी जरूरत को कम कीजिए... ने श्रोताओं को संवेदना और जरूरतमंदों की मदद का संदेश दिया। हसन काजमी की पंक्तियों मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूं को भी खूब सराहना मिली।
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हास्य कवि शंभू शिखर ने अपनी चुटीली रचना से खूब ठहाके लगवाए। जौहर कानपुरी की बुजुर्ग पिता को लेकर भावुक रचना ने श्रोताओं को संवेदनाओं से जोड़। इसके अलावा नदीम फर्रुख, वासिफ फारुकी, सर्वेश अस्थाना, प्रियांशु गजेंद्र, हेमंत पांडे, डॉ. सोनरूपा, राम प्रसाद बेखुद और फैज खुमार बाराबंकवी समेत कई रचनाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। आयोजक शादाब वारसी ने कहा कि ‘दावत-ए-सुखन’ सिर्फ साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है।

हास्य-व्यंग्य के रंगों से सजी महफिल

हास्य-व्यंग्य के रंगों से सजी महफिल

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हास्य-व्यंग्य के रंगों से सजी महफिल
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