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पकड़ा गया चार महीने से आतंक बना मगरमच्छ, जो भी तट पर जाता करता था अचानक हमला, तस्वीरें

Fri, 27 Oct 2017 12:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहराइच
ब्यूरो/अमर उजाला, बहराइच Updated Fri, 27 Oct 2017 12:56 AM IST
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A crocodile caught in net during fishing
मगरमच्छ - फोटो : amar ujala

बहराइच के मोतीपुर रेंज के गुलालपुरवा गांव में स्थित तालाब में रह रहा मगरमच्छ चार माह से हमलावर था। तट पर पहुंचने वाले मवेशी और ग्रामीणों पर मगरमच्छ हमला कर उन्हें घायल कर रहा था। कई लोगों की जान जाते-जाते बची। गुरुवार सुबह कुछ मछली के व्यवसायी शिकार करवाने पहुंचे तो उन पर भी मगरमच्छ ने हमला किया। इस पर व्यवसायियों ने क्षेत्र के जलीय शिकारियों को बुलवाकर जाल डलवाकर मगरमच्छ को पकड़वा लिया। सूचना पाकर पहुंचे वनकर्मियों ने मगरमच्छ को कब्जे में लेकर गेरुआ नदी में छोड़ा है। मगरमच्छ काफी वयस्क बताया जा रहा है।

A crocodile caught in net during fishing

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत गुलालपुरवा गांव में भगहर नाला से जुड़ा हुआ तालाब है। इस नाले में अगस्त माह में बाढ़ के पानी में बहकर एक मगरमच्छ आ गया था। तब से मगरमच्छ तालाब में ही रह रहा था। तालाब के तट पर पहुंचने वाले ग्रामीणों और मवेशियों पर हमला भी कर रहा था। बीते पखवारे भर से मगरमच्छ का हमला बढ़ गया था। कई ग्रामीणों की जान जाते-जाते बची। इस मामले में ग्रामीणों ने आवाज उठायी, लेकिन वनकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया। जिस तालाब में मगरमच्छ रहा था। उस तालाब का ठेका मछली व्यवसायी जगदीश ने ले रखा है।

A crocodile caught in net during fishing

गुरुवार सुबह जगदीश तालाब में मछली का शिकार करवाने पहुंचे। उसी समय पुन: मगरमच्छ हमलावर हो गया। किसी तरह भागकर लोगों ने जान बचायी। जगदीश ने गोपिया गांव से दो जलीय जीव के शिकारियों को बुलवाकर जाल डलवाया। दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हमलावर मगरमच्छ जाल में फंस गया।

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A crocodile caught in net during fishing

इसकी सूचना तत्काल वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद अहमद को दी गई। रेंजर ने टीम के साथ गांव पहुंचकर जाल में फंसे मगरमच्छ को कब्जे में लेकर कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में छोड़वा दिया है। इसके बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। गुलालपुरवा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार माह से मगरमच्छ लोगों पर हमला कर रहा था। एक बालक समेत तीन ग्रामीण हमले में घायल हुए हैं। जबकि आधा दर्जन से अधिक बकरियों व कुत्तों को मगरमच्छ ने निवाला बनाया।

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