मिसाल: 26 दिन तक किया इंतजार, बेटा नहीं बचा तो उसे 5 लोगों में जिंदा कर दिया
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24 साल का बेटा 26 दिन से ट्रॉमा सेंटर में वेंटीलेटर पर जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा था तो माता-पिता कलेजे के टुकड़े के ठीक होने की उम्मीदें पाले बैठे थे। तमाम कोशिशों के बाद भी वह नहीं बचा तो माता-पिता ने अंगदान कर बेटे को पांच लोगों में जिंदा कर दिया। दुख की इस घड़ी में भी रायबरेली के दंपती कृष्णमुरारी और गीता मिश्रा ने बेटे निवेश का अंगदान कर महादान का संदेश देना नहीं भूले।
रायबरेली में दो जनवरी को बाइक फिसल जाने के कारण निवेश गिर गया था और उसके सिर में चोट लगी थी। मामा अविनाश ने बताया कि अपने रेस्टोरेंट से घर जाते समय एक गड्ढे से बचने के लिए निवेश ने जैसे ही ब्रेक लगाया, बाइक फिसल गई। निवेश को निजी अस्पताल में ले गया जहां से केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। उसे क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया था।
रविवार को डॉक्टरों के ब्रेन डेड घोषित करने के बाद निवेश के शरीर को शताब्दी लाया गया, जहां माता-पिता की सहमति से उसका लिवर, दोनों किडनी और दोनों कॉर्निया दान कराई गईं। उसके लिवर को रविवार को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दिल्ली भेजा गया।
घरवाले बोले-अमर हुआ हमारा बेटा
केजीएमयू के ट्रांसप्लांट यूनिट के काउंसलर पीयूष व अश्विनी ने निवेश के घरवालों की काउंसलिंग कर अंगदान के लिए मनाया। माता-पिता भर्राए गले से बोले- बेटा तो अब नहीं लौटेगा, पर अमर हो गया वो। तसल्ली है कि उसके अंगदान से पांच परिवारों की खुशियां लौट आएंगी।
मामा बोले- निवेश ने नहीं लगाया था हेलमेट, पर आप ऐसा न करें
मामा अविनाश ने कहा कि निवेश के शरीर पर एक भी खरोंच नहीं थी। उसने हेलमेट नहीं लगाया था, इसलिए सिर में गंभीर चोट लगी। रुंधे गले से कहा- मेरी अपील है कि वाहन चलाते समय लोग हेलमेट जरूर पहनें। हमने निवेश को खोया है, कोई और बेटा न खोये। क्रिटिकल केयर प्रभारी डॉ. अविनाश अग्रवाल ने बताया कि अगर निवेश ने हेलमेट लगाया होता तो निवेश को सिर में चोट नहीं लगती और उसकी जान बच सकती थी।