UP Cabinet : अब छोटे शहरों में भी शुरू हो सकेंगी टाउनशिप योजना, यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी
नई नीति में टाउनशिप के क्षेत्रफल में न्यूनतम 75 प्रतिशत भूमि उपलब्ध होने और कम से कम एक विकास अनुबंध होने की दशा में ही क्षेत्रफल में एक बार विस्तार करने की अनुमति होगी। पर शर्त यह होगी कि विस्तारित क्षेत्रफल का रकबा परियोजना के मूल क्षेत्रफल से 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
विस्तार
बड़े शहरों के साथ ही अब छोटे शहरों में भी आवासीय कॉलोनियां बसाई जा सकेंगी। इसके लिए सरकार ने ‘इंटीग्रेटेट टाउनशिप नीति-2014’ के स्थान पर नई ‘उप्र टाउनशिप नीति-2023’ तैयार कराया है। इस नीति के लागू होने से अब 2 लाख से कम आबादी वाले शहरो में भी टाउनशिप बनाई जा सकेगी। नीति में छोटे शहरों के लिए 12.5 एकड़ और बड़े शहरों में टाउनशिप बनाने के लिए न्यूनतम 25 एकड़ क्षेत्रफल की सीमा तय की गई है। ताकि विकासकर्ता को भूमि का प्रबंध करने में दिक्कत न हो। वहीं, बड़े शहरों में अधिकतम 500 एकड़ क्षेत्रफल की सीमा को समाप्त कर दिया गया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।
दरअसल अब तक प्रदेश में ‘इंटीग्रेटेट टाउनशिप नीति-2014’ लागू था। इसमें कई मानकों की वजह से छोटे शहरों में टाउनशिप योजना शुरू करने में दिक्कत आ रही थी। इसलिए मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों ही प्रदेश के लिए एक ऐसी टाउनशिप नीति तैयार करने के निर्देश दिए थे, जिससे बड़े के साथ छोटे शहरों में भी सुनियोजित विकास को बढ़ावा दिया जा सके। इसी कड़ी में आवास विभाग ने ‘उप्र टाउनशिप नीति-2023’ तैयार किया है।
सरकार के इस फैसले से जहां छोटे शहरों के भी सुनियोजित विकास का रास्ता खुलेगा, वहीं, निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर में छोटे निवेशकों के लिए भी रास्ते खुलेंगे व बड़े बिल्डरों का एकाधिकार खत्म होगा ।
ग्राम समाज व सरकार भूमि के बदले जमीन छोडने की होगी अनुमति
- टाउनशिप के अंदर ग्राम समाज और सरकारी भूमि लेकर दूसरे स्थान पर जमीन छोड़ने की अनुमति दी जा सकेगी। इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। जमीन बदलने की कार्यवाही न होने की दशा में विकासकर्ता को संबंधित भूमि को छोड़ते हुए परियोजना का मानचित्र दाखिल करने का अधिकार होगा। ग्राम समाज की भूमि के विनिमय का अधिकार संबंधित मंडलायुक्त को होगा।
- स्टांप शुल्क में अब मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट
- नई नीति में आंध्र प्रदेश की तर्ज पर टाउनशिप का लाइसेंस जारी होने के बाद खरीदी जाने वाली भूमि पर स्टांप शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का प्रावधान किया गया है। लाइसेंस जारी होने से पहले खरीदी गई भूमि पर कोई छूट नहीं मिलेगी। हालांकि हाईटेक टाउनशिप नीति में स्टांप शुल्क में पूरी छूट मिलती थी।
75 प्रतिशत भूमि की उपलब्धता पर ही क्षेत्रफल का विस्तार
नई नीति में टाउनशिप के क्षेत्रफल में न्यूनतम 75 प्रतिशत भूमि उपलब्ध होने और कम से कम एक विकास अनुबंध होने की दशा में ही क्षेत्रफल में एक बार विस्तार करने की अनुमति होगी। पर शर्त यह होगी कि विस्तारित क्षेत्रफल का रकबा परियोजना के मूल क्षेत्रफल से 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। पुरानी इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति में यह सीमा 60 प्रतिशत थी। वहीं, लाइसेंस से संबंधित क्षेत्रफल में 20 प्रतिशत तक परिवर्तन की छूट देने का भी प्रावधान किया गया है।
नई टाउनशिप के प्रमुख प्रावधान
- टाउनशिप बनाने वाले विकास कर्ताओं के समूह (कंसोर्टियम) के लीड सदस्य में परिवर्तन का अधिकार अब प्रमुख सचिव आवास की अध्यक्षता में गठित समिति के पास होगा। पहले यह अधिकार टाउनशिप से संबंधित शहर के विकास प्राधिकरण या आवास परिषद बोर्ड के पास था।
- छोटे शहरों की आबादी के आधार पर टाउनशिप के लिए लाईसेंस जारी करने की फीस अब 50 हजार से 2 लाख और जीएसटी देना होगा। पहले अधिकतम फीस 1.50 हालांकि 5 लाख की आबादी वाले शहरों की परियोजनाओं पर फीस में वृद्धि लागू नहीं होगी।
- 10 लाख से अधिक आबादी शहरों में न्यून्तम 50 एकड़ में बहुउद्देशीय स्पोर्टस कांप्लेक्स बनेगा। शहरों में स्पोर्ट सिटी, फिल्म सिटी, आईटी सिटी, मेडिसिटी, एजुकेशनल हब बनेगा। सभी प्रमुख भवनों के फसाड की आर्किटेक्चरल डिजाइन को उच्च्च कोटि का रखा जाएगा। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को शहर के विकास से जोड़ा जाएगा।
- निजी क्षेत्रों में बसने वाली टाउनशिप में सेक्टर विशेष यानी पार्टवार कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी करने की व्यवस्था होगी। जिस सेक्टर का प्रमाण पत्र होगा उसका ही नक्शा पास किया जाएगा। अगर कंपलीशन प्रमाण पत्र नहीं है तो नक्शा पास नहीं किया जाएगा। इसका मकसद अवैध निर्माण पर रोक लगाना है।
- निजी क्षेत्र में टाउनशिप बसाने के लिए लाइसेंस लेने के लिए टर्नओवर का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। प्रत्येक एक एकड़ के लिए 75 लाख रुपये टर्नओवर होना चाहिए। पहले यह 50 लाख रुपये था।
- नई नीति में परियोजना के अंदर आने वाली एससी व एसटी की भूमि खरीदने के लिए डीएम से अनापत्ति लेने की बाध्यता नहीं रहेगी।
- टाउनशिप परियोजना के क्षेत्रफल में शामिल अधिकतम 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल का उपयोग कृषि के लिए किए जाने की छूट होगी।
- टाउनशिप के लिए प्रस्तावित भूमि का भू-उपयोग बदलने का अधिकार अब संबंधित विकास प्राधिकरण बोर्ड को होगा। पहले की नीति में यह अधिकार शासन के पास था।
- टाउनशिप के लिए लाईसेंस जारी होने के बाद अब एक वर्ष में डीपीआर मंजूर कराना होगा। पहले यह समय सीमा तीन साल थी।
- टाउनशिप के लिए 60 प्रतिशत भूमि उपलब्ध होने पर ही डीपीआर को मंजूरी दी जाएगी। पहले यह सीमा 50 प्रतिशत थी।