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सपा संगठन में होगा बड़ा बदलाव, विदेश से लौटकर अखिलेश करेंगे ओवरहालिंग
Sun, 30 Jun 2019 03:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 30 Jun 2019 03:37 AM IST
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
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लोकसभा चुनाव में हार के बाद समाजवादी पार्टी के संगठन में बड़े बदलाव होंगे। विदेश से लौटकर अखिलेश यादव प्रदेश से लेकर जिलों तक संगठन की ओवरहॉलिंग करेंगे।
सपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही फ्रंटल संगठनों में भी नए अध्यक्षों की घोषणा हो सकती है। बसपा से गठबंधन टूटने के बाद सपा संगठन में एक बार फिर मुलायम सिंह यादव के जमाने के प्रयोगों को दोहराया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव में सपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसकी एक वजह संगठनात्मक कमजोरी भी रही। भाजपा ने जिस तरह अपने संगठन की व्यूह रचना की, सपा उसका मुकाबला नहीं कर पाई। सपा की प्रदेश कमेटी का भी विधिवत गठन नहीं हो सका। फ्रंटल संगठनों में भी उतनी सक्रियता नहीं रहे। चुनाव के दौरान पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को संगठन मना नहीं सका।
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कार्यकर्ताओं व संगठन के बीच संवाद का अभाव रहा। इस कमी को दूर करने के लिए ऊपर से नीचे तक संगठन में बदलाव कर उसे और गतिशील बनाया जाएगा। युवा संगठनों में नए नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठन में आमूलचूल बदलाव करके कार्यकर्ताओं व समर्थकों का मनोबल बढ़ाया जाएगा।
ऐसी अटकलें है कि प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल की जगह किसी और नेता को प्रदेश में संगठन की बागडोर सौंपी जा सकती है। उत्तम को संगठन में कोई और दायित्व दिया जा सकता है। मोर्चों व प्रकोष्ठों में भी नए चेहरे सामने लाए जाएंगे। बदलाव का क्रम ऊपर से नीचे तक चलेगा। बहुत संभव है कि जिला इकाइयां भंग कर दी जाएं और जिलों में नए अध्यक्ष नामित किए जाएं।
ऐसा माना जा रहा है कि परिवार समेत विदेश गए अखिलेश यादव जुलाई के पहले सप्ताह में वापस आ जाएंगे। इसी के बाद संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी। ये बदलाव 12 सीटों पर होने वाले उपचुनावों से पहले कर लिए जाएंगे।
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सपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही फ्रंटल संगठनों में भी नए अध्यक्षों की घोषणा हो सकती है। बसपा से गठबंधन टूटने के बाद सपा संगठन में एक बार फिर मुलायम सिंह यादव के जमाने के प्रयोगों को दोहराया जा सकता है।
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लोकसभा चुनाव में सपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसकी एक वजह संगठनात्मक कमजोरी भी रही। भाजपा ने जिस तरह अपने संगठन की व्यूह रचना की, सपा उसका मुकाबला नहीं कर पाई। सपा की प्रदेश कमेटी का भी विधिवत गठन नहीं हो सका। फ्रंटल संगठनों में भी उतनी सक्रियता नहीं रहे। चुनाव के दौरान पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को संगठन मना नहीं सका।
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कार्यकर्ताओं व संगठन के बीच संवाद का अभाव रहा। इस कमी को दूर करने के लिए ऊपर से नीचे तक संगठन में बदलाव कर उसे और गतिशील बनाया जाएगा। युवा संगठनों में नए नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठन में आमूलचूल बदलाव करके कार्यकर्ताओं व समर्थकों का मनोबल बढ़ाया जाएगा।
ऐसी अटकलें है कि प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल की जगह किसी और नेता को प्रदेश में संगठन की बागडोर सौंपी जा सकती है। उत्तम को संगठन में कोई और दायित्व दिया जा सकता है। मोर्चों व प्रकोष्ठों में भी नए चेहरे सामने लाए जाएंगे। बदलाव का क्रम ऊपर से नीचे तक चलेगा। बहुत संभव है कि जिला इकाइयां भंग कर दी जाएं और जिलों में नए अध्यक्ष नामित किए जाएं।
ऐसा माना जा रहा है कि परिवार समेत विदेश गए अखिलेश यादव जुलाई के पहले सप्ताह में वापस आ जाएंगे। इसी के बाद संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी। ये बदलाव 12 सीटों पर होने वाले उपचुनावों से पहले कर लिए जाएंगे।