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आठ सौ करोड़ खर्च, जनता को नहीं मिला फायदा, कल सदन में होगा हंगमा
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सीवर सिस्टम की योजनाओं में बहा दिए 800 करोड़ रुपये, अब तक शहरवासियों को नहीं मिला लाभ
शहर के सीवर सिस्टम को बेहतर करने व नए इलाकों में सीवर सिस्टम के लिए करीब आठ साल पहले जेएनएनयूआरएम के तहत करीब 800 करोड़ की तीन योजनाएं मंजूर हुई थीं, लेकिन इनका फायदा अब तक शहरवासियों को नहीं मिल सका है।
योजनाओं के तहत शहर में जितनी भी सीवर लाइनें बिछाई गई हैं, उनमें से ज्यादातर आपस में कनेक्ट नहीं हैं। इससे करोड़ों खर्च के बाद भी इनका लाभ शहरवासियों को नहीं मिल पा रहा है।
सिर्फ पुराने लखनऊ के दौलतगंज क्षेत्र मेें ही कुछ इलाके की लाइन को आपस में कनेक्ट किया जा सका है। इस क्षेत्र को छोड़ किसी भी क्षेत्र में लाइन कनेक्ट नहीं है।
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ऐसे में अलीगंज, त्रिवेणी नगर, इंदिरा नगर, गोमती नगर, महानगर और निशातगंज सहित शहर के तमाम क्षेत्रों में डाली गई सीवर लाइन अभी महज दिखावा भर है।
उसके बाद भी जलकल विभाग ने बिना जांच के उनको हैंडओवर कर लिया है। नगर निगम ने पहली बार जलकल बजट के लिए अलग से सदन बुलाया है। 14 जुलाई को होने वाले इस सदन में भारी हंगामे के आसार हैं।
पार्षदों ने कहा- मुसीबत बन गया सीवर सिस्टम
त्रिवेणी नगर वार्ड के पार्षद देव शर्मा मिश्रा कहते हैं कि बारिश में बहुत समस्या हो रही है। सीवर बैकफ्लो करता है। खुद मौके पर खड़े होकर एक-एक मैनहोल की रोक हटवाता हूं। जलकल विभाग को हैंडओवर लेने से पहले देखना चाहिए था। कई जगह तो मेन लाइन ही ट्रंक लाइन से नहीं जुड़ी थी। इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के पार्षद समीर पाल सोनू व पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप कहते हैं कि लाइन शुरू होते ही मैनहोल उफना रहे हैं। जल निगम कहता है कि जलकल का काम है और जलकल कहता है जल निगम का काम है। बहुत मुसीबत है। सआदतगंज वार्ड के पार्षद मोनू कनौजिया बताते हैं कि पूरा वार्ड बर्बाद कर दिया है जल निगम ने। इंदिरा प्रियदर्शिनी वार्ड के पार्षद रामकुमार वर्मा कहते हैं कि बारिश में जगह-जगह मैनहोल उफना रहे हैं। ट्रंक लाइन से कई जगह सीवर लाइन कनेक्ट नहीं है। कई जगह तो मैनहोल तक जोड़े नहीं गए। जलकल विभाग को हैंडओवर लेने से पहले यह सब देखना चाहिए था। अब सदन में इस मामले को उठाएंगे।
पेयजल समस्या भी उठाएंगे
अलीगंज, हिंद नगर, केसरी खेड़ा, इस्माइलगंज, महानगर, विवेकानंदपुरी, फैजुल्लागंज, कैसरबाग, लालबाग, अमीनाबाद, रकाबगंज, पुराने लखनऊ सहित तमाम इलाकों में पेयजल संकट रहा औ अब तक पूरी तरह दूर नहीं हो पाया है। कहीं बालूदार पानी आ रहा है तो कहीं बदबूदार। कहीं नलकूप की जरूरत है तो कहीं पर हैंडपंप खराब पड़े हैं। पार्षद गिरीश मिश्रा, पृथ्वी गुप्ता, देवेंद्र सिंह जीतू, मुकेश सिंह मोंटी, अमिता सिंह, अमित चौधरी संतोष राय व ममता चौधरी का कहना है पेयजल की बहुत समस्या है। शिकायत करने के बाद भी समस्या दूर नहीं होती। इसे लेकर सदन में जवाब मांगा जाएगा।
जलकल बजट के लिए नई परंपरा
नगर निगम के इतिहास में यह पहला मौका है जब जलकल विभाग के बजट को पास करने के लिए अलग से सदन बुलाया जा रहा है। अब तक नगर निगम के बजट के साथ ही जलकल का बजट पास हो जाता था। ऐसे में निगम के बजट पर तो खूब चर्चा होती थी, लेकिन जलकल का बजट बिना चर्चा के ही पास हो जाता था। इस बार ऐसा नहीं हुुआ।
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शहर के सीवर सिस्टम को बेहतर करने व नए इलाकों में सीवर सिस्टम के लिए करीब आठ साल पहले जेएनएनयूआरएम के तहत करीब 800 करोड़ की तीन योजनाएं मंजूर हुई थीं, लेकिन इनका फायदा अब तक शहरवासियों को नहीं मिल सका है।
योजनाओं के तहत शहर में जितनी भी सीवर लाइनें बिछाई गई हैं, उनमें से ज्यादातर आपस में कनेक्ट नहीं हैं। इससे करोड़ों खर्च के बाद भी इनका लाभ शहरवासियों को नहीं मिल पा रहा है।
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सिर्फ पुराने लखनऊ के दौलतगंज क्षेत्र मेें ही कुछ इलाके की लाइन को आपस में कनेक्ट किया जा सका है। इस क्षेत्र को छोड़ किसी भी क्षेत्र में लाइन कनेक्ट नहीं है।
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ऐसे में अलीगंज, त्रिवेणी नगर, इंदिरा नगर, गोमती नगर, महानगर और निशातगंज सहित शहर के तमाम क्षेत्रों में डाली गई सीवर लाइन अभी महज दिखावा भर है।
उसके बाद भी जलकल विभाग ने बिना जांच के उनको हैंडओवर कर लिया है। नगर निगम ने पहली बार जलकल बजट के लिए अलग से सदन बुलाया है। 14 जुलाई को होने वाले इस सदन में भारी हंगामे के आसार हैं।
पार्षदों ने कहा- मुसीबत बन गया सीवर सिस्टम
त्रिवेणी नगर वार्ड के पार्षद देव शर्मा मिश्रा कहते हैं कि बारिश में बहुत समस्या हो रही है। सीवर बैकफ्लो करता है। खुद मौके पर खड़े होकर एक-एक मैनहोल की रोक हटवाता हूं। जलकल विभाग को हैंडओवर लेने से पहले देखना चाहिए था। कई जगह तो मेन लाइन ही ट्रंक लाइन से नहीं जुड़ी थी। इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के पार्षद समीर पाल सोनू व पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप कहते हैं कि लाइन शुरू होते ही मैनहोल उफना रहे हैं। जल निगम कहता है कि जलकल का काम है और जलकल कहता है जल निगम का काम है। बहुत मुसीबत है। सआदतगंज वार्ड के पार्षद मोनू कनौजिया बताते हैं कि पूरा वार्ड बर्बाद कर दिया है जल निगम ने। इंदिरा प्रियदर्शिनी वार्ड के पार्षद रामकुमार वर्मा कहते हैं कि बारिश में जगह-जगह मैनहोल उफना रहे हैं। ट्रंक लाइन से कई जगह सीवर लाइन कनेक्ट नहीं है। कई जगह तो मैनहोल तक जोड़े नहीं गए। जलकल विभाग को हैंडओवर लेने से पहले यह सब देखना चाहिए था। अब सदन में इस मामले को उठाएंगे।
पेयजल समस्या भी उठाएंगे
अलीगंज, हिंद नगर, केसरी खेड़ा, इस्माइलगंज, महानगर, विवेकानंदपुरी, फैजुल्लागंज, कैसरबाग, लालबाग, अमीनाबाद, रकाबगंज, पुराने लखनऊ सहित तमाम इलाकों में पेयजल संकट रहा औ अब तक पूरी तरह दूर नहीं हो पाया है। कहीं बालूदार पानी आ रहा है तो कहीं बदबूदार। कहीं नलकूप की जरूरत है तो कहीं पर हैंडपंप खराब पड़े हैं। पार्षद गिरीश मिश्रा, पृथ्वी गुप्ता, देवेंद्र सिंह जीतू, मुकेश सिंह मोंटी, अमिता सिंह, अमित चौधरी संतोष राय व ममता चौधरी का कहना है पेयजल की बहुत समस्या है। शिकायत करने के बाद भी समस्या दूर नहीं होती। इसे लेकर सदन में जवाब मांगा जाएगा।
जलकल बजट के लिए नई परंपरा
नगर निगम के इतिहास में यह पहला मौका है जब जलकल विभाग के बजट को पास करने के लिए अलग से सदन बुलाया जा रहा है। अब तक नगर निगम के बजट के साथ ही जलकल का बजट पास हो जाता था। ऐसे में निगम के बजट पर तो खूब चर्चा होती थी, लेकिन जलकल का बजट बिना चर्चा के ही पास हो जाता था। इस बार ऐसा नहीं हुुआ।