एलयूः ऑनलाइन फीडबैक सिस्टम का परिणाम जारी, 8.5 फीसदी शिक्षक छात्रों की रेटिंग में ‘फेल'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खराब रिकॉर्ड वाले शिक्षकों का नाम बताए बिना उन्होंने उन शिक्षकों के साथ अलग-अलग बैठक करने की बात कही। विवि के लिए अच्छी खबर यह है कि 41.90 फीसदी शिक्षक उत्कृष्ट श्रेणी में हैं।
लविवि के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंश सेल (आईक्यूएसी) के निदेशक प्रो. राजीव मनोहर की देखरेख में पिछले साल से ऑनलाइन फीडबैक फॉर्म भरवाने की शुरुआत हुई है।
पोर्टल पर ऑनलाइन फीडबैक भरने के लिए विद्यार्थियों को दाखिले के समय मिले एडमिशन नंबर का उपयोग करना है। इस नंबर के साथ ही उन्हें मोबाइल नंबर, जन्म तिथि और ईमेल आईडी भी इस फॉर्म पर डालनी है।
264 विद्यार्थियों ने दिया फीडबैक
एडमिशन नंबर का उपयोग होने की वजह से एक विद्यार्थी सिर्फ एक फॉर्म ही भर सकता है। फीडबैक फॉर्म के पहले भाग में 20 बिंदु हैं। ये सभी शिक्षक और पठन-पाठन पर आधारित हैं। जैसे- कक्षा में शिक्षक की उपस्थिति, उसका व्यवहार, पढ़ाने का तरीका आदि।
कुलपति ने बताया कि नैक ने भी शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद के लिए आॅनलाइन जांच की व्यवस्था की है । प्रो. निशि पांडेय ने कहा कि अभी तक इंटरनेट कंनेक्टिविटी का स्तर बेहद खराब है। कुलपति ने कहा कि वाई-फाई का काम चल रहा है। जल्द ही इसकी सुविधा मिलने लगेगी
लविवि ने पिछले साल जनवरी में इस पोर्टल की शुरुआत की थी। इसलिए फीडबैक की संख्या बेहद कम है। पिछले साल सिर्फ 264 विद्यार्थियों ने फीडबैक दिया है। इसके आधार पर ही शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है।
कुछ शिक्षकों ने सैंपल के इतने कम स्तर पर सवाल उठाए। हालांकि इस साल यह संख्या ज्यादा होने की उम्मीद है। फीडबैक ऐच्छिक रखा गया है। आगे इसे अनिवार्य किया जा सकता है।
ज्यादातर शिक्षक बेहतर श्रेणी में
यह है रिपोर्ट कार्ड---प्रतिशत में-
खराब- 8.5
ठीक-12.8
अच्छा-15.4
बहुत अच्छा-19.7
उत्कृष्ट- 41.90
पिछले साल नैक की ग्रेडिंग में विवि को बी ग्रेड मिला था। उसके लिए सेमेस्टर प्रणाली न होना, पुस्तकालय का डिजिटाइजेशन न होना, इंटरनेट कनेक्टिविटी आदि था। इसको देखते हुए विवि ने ज्यादातर क्षेत्र में अपना काम पूरा कर लिया है। छात्र-शिक्षक संवाद को बेहतर बनाने के लिए इस क्षेत्र में भी काम किया जा रहा है। ज्यादातर शिक्षक बहुत अच्छे या फिर उत्कृष्ट की श्रेणी में हैं। कुछ शिक्षकों का रिपोर्ट खराब है। उनसे अलग से बात की जाएगी।
- प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह कुलपति, लविवि