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सफेद हाथी बना ऑक्सीजन प्लांट, दम तोड़ रहे मरीज
Updated Sun, 03 Jun 2018 12:48 AM IST
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बहराइच। देवीपाटन मंडल के आदर्श जिला अस्पताल बहराइच में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। संसाधनों का कोई पुरसाहाल नहीं है। 2014 में एक करोड़ की लागत से स्थापित ऑक्सीजन प्लांट अब तक संचालित नहीं हो सका है। ऑक्सीजन के अभाव में रोगी दम तोड़ रहे हैं।
चार साल से निष्प्रयोज्य पड़ा ऑक्सीजन प्लांट जर्जर हो रहा है। पाइप लाइन भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। चिकित्साधिकारी गैस सिलेंडर के साथ ही मैन पावर की समस्या बता रहे हैं। बहराइच का जिला अस्पताल देवीपाटन मंडल का आदर्श अस्पताल है।
यहां पर बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा व बलरामपुर के साथ ही नेपाल के मरीज भी इलाज के लिए पहुंचते है। कभी-कभी लखीमपुर व सिद्धार्थनगर के मरीजों को भी बहराइच रेफर कर दिया जाता है। लेकिन आदर्श जिला अस्पताल सुविधाओं और संसाधनों से बेहाल है।
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अस्पताल में भर्ती होने वाले लगभग 80 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसके लिए वर्ष 2014 के मार्च माह में एक करोड़ की लागत से ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की गई थी। जिला अस्पताल के सभी 102 बेडों पर भर्ती होने वाले मरीजों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछायी गयी थी।
लेकिन हालात ये है कि ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना को चार साल बीत चुके हैं। अब तक एक भी मरीज को ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन मुहैया नहीं हो सकी है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर रोगी की जिंदगी बचाने की कोशिश होती है। लेकिन यह कोशिश भी अक्सर फेल हो जाती है
100 जंबो सिलेंडर की जरूरत, 22 से चल रहा काम
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग के निकट ऑक्सीजन प्लांट स्थापित है। इंजन के साथ अन्य सारी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही हैं। प्रतिदिन ऑक्सीजन सप्लाई के लिए 100 जंबो ऑक्सीजन चाहिए, जबकि महज 22 जंबो सिलेंडर से ही जिला अस्पताल के पास हैं।
प्लांट के संचालन और देखरेख के लिए तीन टेक्नीशियन व सात सहायक कर्मियों की जरूरत है। इनकी तैनाती प्लांट स्थापना से अब तक नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल के 102 बेड पर भर्ती होने वाले मरीजों में औसतन 35 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।
मैनुअल ऑक्सीजन सिलेंडर का ही सहारा होता है। इस समय अस्पताल प्रशासन के पास 72 छोटे सिलेंडर हैं। इनमें 35 से 40 सिलेंडर प्रतिदिन भरने के लिए भेजे जाते हैं।
बिलखते रहे मां-बाप और थम गई सांस
जिला अस्पताल के महिला विभाग में शुक्रवार कोट बाजार निवासी राघव प्रसाद के नवजात बेटे की ऑक्सीजन के अभाव में सांस थम गई। काफी देर तक हंगामे की स्थिति रही। बाद में पुलिसकर्मियों के समझाने पर परिवारीजन बेटे का शव लेकर घर लौट गए।
एक माह पहले भी दो मरीजों की जा चुकी जान
अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में ऑक्सीजन सिलेंडर न लगने से हृदय रोग विभाग और वार्ड नंबर एक में भर्ती दो अधेड़ की सांस थम गई थी। परिवारीजनों ने विरोध किया था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने सुलह समझौता कर मामला रफा-दफा कर दिया था।
2014 में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हुआ था। लेकिन मैन पावर और जंबो सिलेंडर की अनुपलब्धता से मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच सकी थी। हाल ही में कार्यभार संभाला है। शासन को पत्र लिख रहे हैं। कोशिश होगी कि जून में ही प्लांट का संचालन शुरू करवा दें।
-डॉ. ओपी पांडेय, मुख्य चिकित्साधीक्षक
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चार साल से निष्प्रयोज्य पड़ा ऑक्सीजन प्लांट जर्जर हो रहा है। पाइप लाइन भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। चिकित्साधिकारी गैस सिलेंडर के साथ ही मैन पावर की समस्या बता रहे हैं। बहराइच का जिला अस्पताल देवीपाटन मंडल का आदर्श अस्पताल है।
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यहां पर बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा व बलरामपुर के साथ ही नेपाल के मरीज भी इलाज के लिए पहुंचते है। कभी-कभी लखीमपुर व सिद्धार्थनगर के मरीजों को भी बहराइच रेफर कर दिया जाता है। लेकिन आदर्श जिला अस्पताल सुविधाओं और संसाधनों से बेहाल है।
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अस्पताल में भर्ती होने वाले लगभग 80 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसके लिए वर्ष 2014 के मार्च माह में एक करोड़ की लागत से ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की गई थी। जिला अस्पताल के सभी 102 बेडों पर भर्ती होने वाले मरीजों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछायी गयी थी।
लेकिन हालात ये है कि ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना को चार साल बीत चुके हैं। अब तक एक भी मरीज को ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन मुहैया नहीं हो सकी है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर रोगी की जिंदगी बचाने की कोशिश होती है। लेकिन यह कोशिश भी अक्सर फेल हो जाती है
100 जंबो सिलेंडर की जरूरत, 22 से चल रहा काम
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग के निकट ऑक्सीजन प्लांट स्थापित है। इंजन के साथ अन्य सारी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही हैं। प्रतिदिन ऑक्सीजन सप्लाई के लिए 100 जंबो ऑक्सीजन चाहिए, जबकि महज 22 जंबो सिलेंडर से ही जिला अस्पताल के पास हैं।
प्लांट के संचालन और देखरेख के लिए तीन टेक्नीशियन व सात सहायक कर्मियों की जरूरत है। इनकी तैनाती प्लांट स्थापना से अब तक नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल के 102 बेड पर भर्ती होने वाले मरीजों में औसतन 35 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।
मैनुअल ऑक्सीजन सिलेंडर का ही सहारा होता है। इस समय अस्पताल प्रशासन के पास 72 छोटे सिलेंडर हैं। इनमें 35 से 40 सिलेंडर प्रतिदिन भरने के लिए भेजे जाते हैं।
बिलखते रहे मां-बाप और थम गई सांस
जिला अस्पताल के महिला विभाग में शुक्रवार कोट बाजार निवासी राघव प्रसाद के नवजात बेटे की ऑक्सीजन के अभाव में सांस थम गई। काफी देर तक हंगामे की स्थिति रही। बाद में पुलिसकर्मियों के समझाने पर परिवारीजन बेटे का शव लेकर घर लौट गए।
एक माह पहले भी दो मरीजों की जा चुकी जान
अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में ऑक्सीजन सिलेंडर न लगने से हृदय रोग विभाग और वार्ड नंबर एक में भर्ती दो अधेड़ की सांस थम गई थी। परिवारीजनों ने विरोध किया था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने सुलह समझौता कर मामला रफा-दफा कर दिया था।
2014 में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हुआ था। लेकिन मैन पावर और जंबो सिलेंडर की अनुपलब्धता से मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच सकी थी। हाल ही में कार्यभार संभाला है। शासन को पत्र लिख रहे हैं। कोशिश होगी कि जून में ही प्लांट का संचालन शुरू करवा दें।
-डॉ. ओपी पांडेय, मुख्य चिकित्साधीक्षक