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7000 करोड़ का मास्टर प्लान, जिससे बचेगा बारिश का पानी!
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 25 Mar 2014 08:09 AM IST
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तेजी से गिर रहे भूजल स्तर से अकेले यूपी के 215 ब्लॉक खतरे की सीमा के दायरे में आ चुके हैं।
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अब इससे निबटने के लिए सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने 7,000 करोड़ रुपए की लागत का मास्टर प्लान तैयार किया है।
योजना आयोग से अनुमति मिलने के बाद यूपी सहित पूरे देश में खतरे के दायरे में आ चुके इलाकों में आर्टिफिशियल वॉटर रिचार्जिंग किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की अनुमति इसकेलिए मिल चुकी है।
सोमवार को होटल गोमती में सीजीडब्ल्यूबी ने जल संरक्षण पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में सीजीडब्ल्यूबी के अध्यक्ष सुशील गुप्ता बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे।
उन्होंने यूपी के एक्यूफर प्रकार विषय पर एटलस का विमोचन किया।
बोर्ड के रीजनल डायरेक्टर केबी विश्वास ने बताया कि अकेले यूपी में 820 में से 215 ब्लॉक खतरे की सीमा में हैं।
इनमें से 76 ब्लॉक अतिदोहन के दायरे में पहुंच चुके हैं। ऐसे में वहां पानी की क्राइसिस खड़ी हो गई है। इसके अलावा 107 सेमी क्रिटिकल और 32 क्रिटिकल कैटेगरी में हैं।
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आर्टिफिशियल रिचार्जिंग के मास्टर प्लान में अतिदोहन और क्रिटिकल भूजल स्तर वाले इलाकों को प्राथमिकता पर लिया जाएगा।
यहां वॉटर रिचार्जिंग कराने के बाद भूजल स्तर को संतुलित किया जाएगा।
इसके लिए बारिश के पानी की रूफटॉप रिचार्जिंग, नालों पर चेकडैम बनाना, पार्कों को रिचार्जिंग के लिए अधिग्रहित करना शामिल होगा।
उनका कहना था कि सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत तक निर्भरता भूजल पर ही है। इसे भी संतुलित करना होगा। बारिश के पानी को इकट्ठा कर सिंचाई में उपयोग बढ़ाया जा सकता है।
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अनिवार्य हो रूफटॉप रिचार्जिंग
केबी विश्वास का कहना है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अपने शहरों में बारिश के पानी से ग्राउंड वॉटर रिचार्जिंग को प्रभावी बनाने के लिए कहा है।
इसके लिए छतों से बारिश के पानी को रिचार्ज करने की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाना होगा।
अभी तक केवल तमिलनाडु सरकार ने ऐसा किया है। अब दिल्ली में इसे लागू किया जा रहा है। यूपी को जल्दी ही ऐसा करना होगा।