Ayodhya: गर्भगृह की महापीठ का 70 फीसदी काम पूरा, जनवरी 2024 से भक्तों को मिलने लगेगा प्रभु श्रीराम का दर्शन
गर्भगृह में रामलला विराजेंगे। इसका 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। प्रयास किया जा रहा है कि जनवरी 2024 से भक्तों को रामलला के भव्य दर्शन होने लगें।
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रामजन्मभूमि परिसर में राममंदिर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा है। राममंदिर का अब तक 35 फीसदी व गर्भगृह के महापीठ का 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। रामलला का गर्भगृह, प्लिंथ व रिटेनिंग वॉल एक साथ बन रही है। गर्भगृह में सबसे पहले महापीठ को आकार देने का काम जारी है। पांच लेयर में बनने वाली सात फीट ऊंची महापीठ पर रामलला विराजेंगे। तीसरे लेयर का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 80 पत्थर बिछाए जा चुके हैं। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि जनवरी 2024 से भव्य गर्भगृह में भक्तों को रामलला का दर्शन प्राप्त होने लगेगा।
जहां भगवान विराजते हैं, उस स्थान को महापीठ कहा जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूजा-अर्चना कर गर्भगृह के महापीठ का निर्माण शुरू कराया था। इसका निर्माण कार्य शुरू हुए 45 दिन बीत चुके हैं, अब तक 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। पांच लेयर में महापीठ को आकार देने का काम जारी है, अब तक तीन लेयर लगभग बन चुकी है। पहले लेयर में जहां सर्वाधिक 49 पत्थर बिछाए गए थे, वहीं दूसरी व तीसरी लेयर में अलग-अलग संख्या में पत्थर बिछाए गए हैं। इस तरह कुल 80 पत्थर महापीठ पर बिछाए जा चुके हैं।
महापीठ का काम पूरा होने के बाद खंभों को लगाने का काम शुरू होगा। मंदिर के प्रथम तल में लगने वाले सभी खंभे तैयार हैं। मंदिर के गर्भगृह के आंतरिक हिस्से व फर्श को मकराना के संगमरमर से सजाया जाएगा। पत्थरों पर तरह-तरह की नक्काशी की गई है। पहले लेयर के पत्थरों में देवी-देवताओं, दूसरी लेयर में फूल-पत्ती व शुभता के संकेत, तीसरी लेयर में हाथी, चौथी में अश्व के कई आयाम व पांचवीं लेयर के पत्थरों में विभिन्न स्वरूपों का अंकन किया गया है।
30 फीट चौड़ा परिक्रमा पथ भी ले रहा आकार
वहीं दूसरी तरफ राममंदिर की प्लिंथ का भी 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसमें ग्रेनाइट के 17 हजार पत्थरों का प्रयोग किया जाना है। अब तक करीब 11 हजार पत्थर लगाए जा चुके हैं जबकि 15 हजार ग्रेनाइट की आपूर्ति हो चुकी है। साथ ही गर्भगृह की परिक्रमा का भी निर्माण जोरों पर चल रहा है। जैसे-जैसे प्लिंथ का काम आगे बढ़ता जाएगा, परिक्रमा पथ भी आकार लेता जाएगा। परिक्रमा पथ करीब 30 फीट चौड़ा होगा। वहीं रिटेनिंग वॉल का काम भी छह मीटर की ऊंचाई तक पूरा हो चुका है। मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए 12 मीटर गहरी रिटेनिंग वॉल बनाई जा रही है।
मंदिर निर्माण समिति की बैठक 20 से
हर माह होने वाली राममंदिर निर्माण समिति की बैठक 20 जुलाई से शुरू होगी। राममंदिर निर्माण समिति व श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संयुक्त बैठक हर माह आयोजित की जाती है। इसमें राममंदिर निर्माण की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ भावी योजनाओं पर मंथन किया जाता है। बैठक में ट्रस्ट के पदाधिकारी, सदस्य, इंजीनियर सहित मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी शामिल होते हैं।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र का कहना है कि परकोटा व 25 हजार भक्तों के लिए तीर्थयात्री केंद्र की डिजाइन तैयार कराई जा रही है। हमारा लक्ष्य है कि जनवरी 2024 से भव्य गर्भगृह में भक्तों को रामलला का दर्शन सुलभ हो सके।