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RBI की गाइडलाइन: बैंकों में लावारिस पड़े 7211 करोड़, एक लाख लॉकरों को वारिस मिलने की राह खुली; जानें प्रक्रिया

Tue, 30 Sep 2025 08:10 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 30 Sep 2025 08:10 AM IST
सार

यूपी के बैंकों में 7211 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। दावों के निपटान के लिए आरबीआई ने नई गाइडलाइन जारी की है। इससे एक लाख लॉकरों को वारिस मिलेगा। अगले साल 31 मार्च तक सभी बैंकों में इसे लागू करना अनिवार्य है। आगे पढ़ें पूरा मामला...

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7,211 crore lying unclaimed in banks in UP RBI has issued new guidelines for settling claims
bank passbook new (Demo) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बैंकों में वर्षों से लावारिस पड़े करीब 7211 करोड़ रुपये और एक लाख लॉकरों को नया वारिस मिलने की राह खुल गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ऐसे खातों के दावों के निपटान के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसे 31 मार्च 2026 तक सभी बैंकों में लागू करना अनिवार्य है।

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आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में करीब 2.81 करोड़ बैंक खाते ऐसे हैं, जिनमें पिछले दस साल से कोई लेन-देन नहीं हुआ। इन्हें निष्क्रिय घोषित कर दिया गया है। इन खातों में जमा राशि 7211 करोड़ रुपये को बैंकों ने आरबीआई के पास जमा करा दिया है। इसके अलावा, राज्य के बैंकों में लगभग एक लाख से ज्यादा लावारिस लाकर और सेफ कस्टडी आर्टिकल्स पड़े हैं, जिनका कोई दावेदार नहीं है। अब तक इन खातों और लॉकरों पर दावा करने के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, वसीयत या अदालत के आदेश की जरूरत होती थी। ऐसे में परिजनों को लंबे समय तक अदालतों व बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते थे।

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नामांकन वाले खाते में वसीयत की नहीं होगी जरूरत

आरबीआई की नई गाइडलाइन के तहत नामांकन या सर्वाइवर वाले खाते केवल मृत्यु प्रमाणपत्र और पहचानपत्र के आधार पर दावे निपटाए जाएंगे। इसके लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या वसीयत की जरूरत नहीं होगी। 

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को-ऑपरेटिव बैंक में 5 लाख रुपये तक और अन्य बैंकों में 15 लाख रुपये तक के दावे सिर्फ आवश्यक दस्तावेजों जैसे क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाणपत्र, शपथपत्र या एनओसी के आधार पर निपटाए जाएंगे। लॉकर और सेफ कस्टडी का नामांकन होने पर सीधे दावेदार को चाबी मिल जाएगी। बिना नामांकन वाले मामलों में बैंक दो गवाहों और अधिकारी की मौजूदगी में लॉकर में रखे सामान की सूची तैयार करेगा। 

15 दिन के भीतर निपटारा करना अनिवार्य

सभी दस्तावेज पूरे होने के 15 दिन के भीतर दावे का निपटारा करना अनिवार्य होगा। लॉकर/सेफ कस्टडी के मामलों में 15 दिन में इन्वेंटरी की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसमें देरी होने पर बैंक जमा खातों पर 4% ब्याज देंगे। लॉकर/सेफ कस्टडी पर 5,000 रुपये रोजाना देय होंगे। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद बैंकों ने ऐसे खातों और लॉकरों के मालिकों से जुड़े परिजनों की खोज शुरू कर दी है। इसके लिए विशेष टीम बनाई जा रही है।

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