69 हजार शिक्षक भर्ती: एक अंक विवाद में नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का धरना, बोले- हमें न्याय चाहिए
उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े एक अंक विवाद को लेकर अभ्यर्थियों ने धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली, जबकि एक याची को नियुक्ति दी गई। अभ्यर्थियों ने सभी पात्र लोगों को न्याय और नियुक्ति देने की मांग की।
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बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी के खिलाफ धरना प्रदर्शन, मनमानी ढंग से एक लड़के को नौकरी देने से नाराज अभ्यर्थियों द्वारा सोमवार बेसिक निदेशक कार्यालय पर एक अंक मामले में नियुक्ति की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया। परिषदीय विद्यालयों की 69,000 सहायक अध्यापक चयन प्रक्रिया से जुड़े 'एक अंक विवाद' और न्यायालय के आदेश के बावजूद नियुक्ति न मिलने का मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया है। इस प्रकरण में हजारों पात्र अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर केवल एक व्यक्ति को नियुक्ति दिए जाने से अभ्यर्थियों में भारी रोष है।
ये है पूरा मामला?
परिषदीय विद्यालयों की 69,000 शिक्षक भर्ती परीक्षा 6 जनवरी 2019 को संपन्न कराई गई थी। प्रश्न पत्र में पूछे गए कुछ विवादित प्रश्नों के जवाब से असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अभिषेक श्रीवास्तव व अन्य की अपील पर 25 अगस्त 2021 को 'शैक्षिक परिभाषा' वाले प्रश्न पर एक अंक बढ़ाते हुए, कोर्ट की शरण में आए अभ्यर्थियों को अंतिम चयनित मेरिट गुणांक के अनुसार नियुक्ति देने का आदेश दिया था।
यही आदेश लखनऊ बेंच में भी कोर्ट की शरण में आए हुए अभ्यर्थियों द्वारा फॉलो करवा लिया गया। सरकार द्वारा इस आदेश के खिलाफ दायर अपील को सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2022 को खारिज कर दिया और हाई कोर्ट के 25 अगस्त 2021 के आदेश को सही ठहराते हुए अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया। विभाग ने अपनी जारी उत्तर कुंजी में विकल्प (3) को सही माना था, जबकि कोर्ट ने इन चारों विकल्पों को गलत ठहराते हुए एक अंक बढ़ाने का निर्देश दिया था।
विभागीय प्रक्रिया और साढ़े तीन साल का विलंब
एक अंक से नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थी सूरज वर्मा ने बताया कि इस आदेश के अनुपालन के संबंध में परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज द्वारा 11 जनवरी 2023 से 19 जनवरी 2023 तक ऑनलाइन प्रत्यावेदन लिए गए, जिसमें 2 मार्च 2023 को 2249 अभ्यर्थी पात्र पाए गए थे।
तत्पश्चात, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा अंतिम चयनित मेरिट गुणांक के अनुसार सूची तैयार कर नियुक्ति करने की प्रक्रिया बीते साढ़े तीन वर्षों से विभागीय स्तर पर लंबित है। इस बीच सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेंद्र तिवारी द्वारा यह तर्क दिया गया कि आरक्षण विवाद के कारण नियुक्ति नहीं की जा सकती है।
इसके बाद, 20 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की सुनवाई के दौरान आदेश पारित किया गया कि अगली सुनवाई की तारीख (11 मई 2026) पर इस बात के निर्देश लेकर आएं कि हाई कोर्ट के जिस आदेश का उल्लंघन होने का आरोप है, उसका पालन अब तक क्यों नहीं किया गया, जबकि उस पर कोई रोक (स्टे) भी लागू नहीं है।
सिर्फ एक व्यक्ति को नियुक्ति और समानता के अधिकार का हनन
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेंद्र तिवारी द्वारा 2249 याचियों में से कटऑफ गुणांक के अनुसार चयन सूची जारी करने के बजाय सिर्फ एक याची विवेक कुमार सिंह को 7 मई 2026 को श्रावस्ती जिले में नियुक्ति प्रदान कर दी गई, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार लगभग हजारों योग्य लोगों को नियुक्ति प्रदान की जानी चाहिए थी।
धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 2249 पात्र याचियों में से कटऑफ गुणांक के आधार पर हजारों योग्य लोगों को नियुक्ति मिलनी चाहिए थी। हालांकि, विभाग ने नियमों को ताक पर रखते हुए 7 मई 2026 को केवल एक याची (विवेक कुमार सिंह) को नियुक्ति प्रदान कर दी।
धरना प्रदर्शन कर रहे सूरज वर्मा का कहना है कि सिर्फ एक व्यक्ति को नौकरी देकर स्पष्ट तौर पर संविधान समानता का अधिकार का उल्लंघन किया गया है। एक अंक से नियुक्ति से वंचित हजारों अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिनकी योग्यता वर्तमान में चयनित अभ्यर्थियों के गुणांक से कही अधिक है। स्पष्ट तौर से भ्रष्टाचार को इंगित करता है। इसे 'पिक एंड चूस' पॉलिसी और भ्रष्टाचार करार देते हुए अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी पात्रों को न्याय नहीं मिलता, उनका धरना जारी रहेगा।