{"_id":"660a0d16178988dae20adf7a","slug":"6451-cooks-got-four-months-honorarium-raebareli-news-c-101-1-slko1034-112701-2024-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: 6,451 रसोइयों को मिला चार महीने का मानदेय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: 6,451 रसोइयों को मिला चार महीने का मानदेय
Mon, 01 Apr 2024 06:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 01 Apr 2024 06:55 AM IST
विज्ञापन
रायबरेली। मध्याह्न भोजन योजना के तहत जिलेभर के विद्यालयों में कार्यरत 6,451 रसोइयों को चार महीने का बकाया मानदेय भेज दिया गया है। बजट के अभाव में उनको मानदेय नहीं मिल पा रहा था।
बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की संख्या लगभग दो लाख 55 हजार है। जिनके लिए मध्याह्न भोजन बनाकर खिलाने की जिम्मेदारी रसोइयों के कंधों पर है। जिले में 6,451 रसोइया कार्यरत हैं। बजट के अभाव में अक्सर रसोइसों को मानदेय का इंतजार करना पड़ता है। दो हजार रुपये के अल्प मानदेय पर काम करने वालीं रसोइयों को चार महीने से मानदेय नहीं मिला था। जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि सभी रसोइयों को दिसंबर से मार्च तक चार महीने का मानदेय लगभग 5.04 करोड़ रुपये भेज दिया गया है।
साड़ी के लिए 500 रुपये अलग से
जिले में कार्यरत सभी रसोइयों को साड़ी के लिए भी पांच-पांच सौ रुपये मिलेंगे। जिला समन्वयक (एमडीएम) के मुताबिक सभी रसोइयों को साड़ी के लिए 32 लाख रुपये से अधिक धनराशि भेजी गई है।
विज्ञापन
कन्वर्जन काॅस्ट के भेजे साढ़े सात करोड़
मध्याह्न भोजन बनाने के लिए गेंहू और चावल कोटेदार के यहां से आता है। भोजन बनाने में प्रयोग किए जाने वाले अन्य सामानों की खरीद के लिए कन्वर्जन काॅस्ट भेजी जाती है। बजट के अभाव में कन्वर्जन काॅस्ट भी चार महीने से नहीं भेजी गई थी। जिससे विद्यालय के अध्यापकों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा था। जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि कन्वर्जन काॅस्ट के रूप में साढ़े सात करोड़ रुपये विद्यालयों को भेजे गए हैं।
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की संख्या लगभग दो लाख 55 हजार है। जिनके लिए मध्याह्न भोजन बनाकर खिलाने की जिम्मेदारी रसोइयों के कंधों पर है। जिले में 6,451 रसोइया कार्यरत हैं। बजट के अभाव में अक्सर रसोइसों को मानदेय का इंतजार करना पड़ता है। दो हजार रुपये के अल्प मानदेय पर काम करने वालीं रसोइयों को चार महीने से मानदेय नहीं मिला था। जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि सभी रसोइयों को दिसंबर से मार्च तक चार महीने का मानदेय लगभग 5.04 करोड़ रुपये भेज दिया गया है।
विज्ञापन
साड़ी के लिए 500 रुपये अलग से
जिले में कार्यरत सभी रसोइयों को साड़ी के लिए भी पांच-पांच सौ रुपये मिलेंगे। जिला समन्वयक (एमडीएम) के मुताबिक सभी रसोइयों को साड़ी के लिए 32 लाख रुपये से अधिक धनराशि भेजी गई है।
विज्ञापन
कन्वर्जन काॅस्ट के भेजे साढ़े सात करोड़
मध्याह्न भोजन बनाने के लिए गेंहू और चावल कोटेदार के यहां से आता है। भोजन बनाने में प्रयोग किए जाने वाले अन्य सामानों की खरीद के लिए कन्वर्जन काॅस्ट भेजी जाती है। बजट के अभाव में कन्वर्जन काॅस्ट भी चार महीने से नहीं भेजी गई थी। जिससे विद्यालय के अध्यापकों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा था। जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि कन्वर्जन काॅस्ट के रूप में साढ़े सात करोड़ रुपये विद्यालयों को भेजे गए हैं।