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बगैर मान्यता के चले रहे 350 स्कूल

Sat, 12 May 2018 11:49 PM IST
Updated Sat, 12 May 2018 11:49 PM IST
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बगैर मान्यता के चले रहे 350 स्कूल

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गोंडा। शासन स्तर से भले ही बिना मान्यता के संचालित स्कूलों को बंद कराने का फरमान जारी किया गया हो, लेकिन जिले में इस फरमान का असर नहीं दिखाई दे रहा है। जिले भर में करीब 350 स्कूल ऐसे हैं, जो बगैर मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इनके पास न तो स्कूल संचालन के लिए आवश्यक संसाधन हैं और न ही बच्चों को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक । इसके बावजूद अपने लोक लुभावन विज्ञापनों के बलबूते इन स्कूलों में धड़ल्ले के साथ बच्चों का प्रवेश हो रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। अब इन स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए इन्हें नोटिस देने की तैयारी की जा रही है।
जिले गैर मान्यता के इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता व स्कूल में मौजूद सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, मगर मौके पर ऐसा कुछ नहीं होता। अधिकतर स्कूल तो ऐसे होते हैं, जिनके पास बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त संख्या में कमरे तक नही होते। शासन के फरमान के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के सर्वे में करीब 350 स्कूल बगैर मान्यता के संचालित मिले हैं। इनमें से 150 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी मान्यता की फाइलें ब्लॉक या जिले स्तर पर लंबित हैं, जबकि 200 स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया है। बगैर मान्यता के चल रहे इन 200 स्कूलों को बेसिक शिक्षा विभाग नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।
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एक लाख रुपये जुर्माने का है प्रावधान
बगैर मान्यता के चलने वाले स्कूलों पर शासन ने एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान कर रखा है। पिछले वर्ष भी शासन स्तर से जुर्माना वसूल करने का आदेश दिया गया था, मगर बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर इस आदेश का पालन करने की हिम्मत नहीं जुटा सके और बगैर मान्यता के चलने वाले स्कूलों की चिन्हांकन करने के बाद पूरी कार्रवाई ठंढे बस्ते में चली गई।
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अभिभावक बोले, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे बिना मान्यता के स्कूल
बगैर मान्यता के संचालित होने वाले स्कूल नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। इन स्कूलों में न तो शिक्षा का स्तर ही ठीक होता है और न ही बच्चों को सुविधाएं ही मुहैया हो पाती हैं। ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की बात को लेकर अभिभावकों से उनकी राय जानी गई तो सबका एक ही कहना था कि इस तरह के स्कूलों पर प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अभिभावक शिवकुमार भारती ने कहा कि बगैर मान्यता के स्कूलों में बच्चों का कोई भविष्य नही होता। इस तरह के स्कूल कब बंद हो जाएं, इनका कोई ठिकाना नही होंता। ऐसे स्कूलों के संचालन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। बमबम पांडेय ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चे का नामांकन कराते समय स्कूल की जांच पड़ताल नहीं करते, जिससे इस तरह के स्कूलों के संचालन को बढ़ावा मिलता है। इस तरह के स्कूलों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है। अभिभावक सुधीर ओझा ने कहा कि शिक्षा के व्यापारीकरण ने इस तरह के हालात पैदा किए हैं कि हर व्यक्ति सिर्फ स्कूल खोलना चाहता है। इसमें शिक्षा विभाग के अफसरों का भी अहम रोल है जो कुछ रुपये लेकर इस तरह के स्कूलों के संचालन को बढ़ावा देते हैं। बगैर मान्यता के स्कूल बंद होने चाहिए।
अभिषेक शुक्ला ने कहा कि अफसरों की लापरवाही से बगैर मान्यता के स्कूल संचालित हो रहे हैं। अगर कोई स्कूल संचालक मान्यता के लिए आवेदन भी करता है तो उसे मान्यता देने के बजाय अफसर उसकी फाइल लटका देते हैं। अविनाश सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग के अफसरों की मिलीभगत से बिना मान्यता के स्कूल चल रहे हैं। अफसर ईमानदारी दिखाएं तो इन स्कूलों के संचालन पर रोक लग सकती है।


जिले भर में बिना मान्यता के संचालित होने वाले 200 स्कूलों को चिन्हित किया गया है। इन स्कूलों को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है। नोटिस के बाद अगर इनका संचालन होता मिला तो इस तरह के स्कूलों के खिलाफ जुर्माने के साथ साथ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
- संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए
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