लखनऊ नगर निगम में 60 फीसदी पद खाली, शहर की आबादी 35 लाख और कर्मचारी 1960 के हिसाब से
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नगर निगम में इस वक्त 60 फीसदी कर्मचारियों की कमी है और 50 साल से पद भी नहीं बढ़े हैं। करीब दस साल पहले बैकलॉग से 1500 पद भरे गए थे। वहीं, मृतक आश्रितों की नियुक्ति पर रोक लगने से नाराज नगर निगम कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि सालभर पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में नियमित की जगह आउटर्सोसिंग के कर्मचारी तैनात करने पर आपत्ति जताई थी।
शहर की आबादी इस वक्त करीब 35 लाख है, पर निगम में कर्मचारी की संख्या 1960 की आबादी के हिसाब से भी नहीं हैं। पचास साल में आबादी करीब चार गुना हो गई है। सबसे ज्यादा कमी सफाई कर्मचारियों की है। नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा का कहना है कि सफाई कार्य से जुड़े आठ से दस कर्मचारियों की हर साल सेवा काल में ही मौत हो जाती है। ऐसे में उनके आश्रितों को नौकरी नहीं दी जाएगी तो परिवार कैसे पलेगा।
वहीं, नगर निगम जलकल कर्मचारी एवं सफाई कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष शशि मिश्र ने कहा कि यदि प्रशासन मृतक आश्रितों की नियुक्ति नहीं करेगा तो 15 फरवरी को मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन होगा। इससे पहले जनजागरण आंदोलन भी निगम और जलकल विभाग के सभी जोन में चलाया जाएगा।
एक नजर में कर्मचारियों की स्थिति
सफाई नायक
- चाहिए 400
- कार्यरत 61
ड्राइवर
- चाहिए 400
- कार्यरत 36
कंप्यूटर के पद तीन हैं और तैनाती एक भी नहीं
मार्ग प्रकाश के लिए लाइन मैन चाहिए 80 और हैं 10
सफाई कर्मी चाहिए 12 हजार, नियमित हैं 3400
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी का कहना है कि जो कर्मचारी हैं उनका ही वेतन-अन्य भुगतान निगम नहीं कर पा रहा है। जब भर्ती पर ही रोक है तो मृतक आश्रित की भर्ती कैसे कर सकते हैं। मृतक आश्रित की नियुक्ति अनुकंपा पर है। वह उनका अधिकार नहीं है। अब सभी विभागों को खर्च घटाना है। यह शासन की नीति है। ऐसे में अब जरूरत के आधार पर भर्ती आउटसोर्सिंग से ही योग्यता के आधार पर की जाएगी।