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कोरोना के साइड इफेक्ट ः 57 फीसदी लोगों को नहीं आ रही नींद, चिडचिड़ापन बढ़ा
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कोरोना के बाद बढ़ गए अनिद्रा के मरीज। चिकित्सकों ने जताई चिंता। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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कोरोना ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित किया है। अन्य समस्याओं के साथ अनिद्रा भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार संक्रमित होने के बाद 57 फीसदी लोगों में अनिद्रा की समस्या मिली है। जबकि कोविड से पहले यह महज 18 फीसदी में ही थी।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. अलीम सिद्दीकी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि रविवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर एक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा।
डॉ. अलीम के अनुसार, मानसिक समस्या किसी को भी हो सकती है। सामान्य ओपीडी में आने वाले लोगों में 30 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित होते हैं।
अवसाद मानसिक विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में पांच फीसदी वयस्क अवसाद से पीड़ित हैं। वहीं, 10 से 19 वर्ष आयु तक के हर सात बच्चों में से एक मानसिक विकार से पीड़ित है।
इसी तरह सिजोफ्रेनिया जैसे गंभीर मानसिक रोग से पीड़ित मरीज सामान्य आबादी के मुकाबले 10 से 20 फीसदी तक कम जीते हैं। मानसिक बीमारियों के कई प्रकार हैं।
इनमें से ज्यादातर मानसिक बीमारियों के बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है। हमारे आसपास भी काफी लोग इससे पीड़ित हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में, संकोच या फिर शर्म की वजह से लोग इलाज नहीं कराते हैं।
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इन सभी मुद्दों पर एक दिवसीय सेमिनार में चर्चा की जाएगी। इस दौरान आईएमए के महामंत्री प्रो.जेडी रावत भी मौजूद रहे।
15 से 29 साल आयु वर्ग में आत्महत्या चौथा सबसे बड़ा कारण
बच्चे और किशोर आयु वर्ग मानसिक समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इससे युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति काफी बढ़ रही है। देश में हर 100 मौत में से एक मामला आत्महत्या की वजह से होता है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार 15 से 29 साल आयु तक के युवाओं में जितनी कुल मौत होती हैं उनमें चौथा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है। सर्वेक्षण के अनुसार देश में 10.6 फीसदी लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। इनमें से 10 फीसदी लोग अवसाद, चिंता और मादक द्रव्यों के सेवन की वजह से बीमार हैं।
कोविड से बुरी तरह प्रभावित हुए स्वास्थ्यकर्मी
डॉ. अलीम के अनुसार, कोविड से स्वास्थ्यकर्मी भी अछूते नहीं रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, कोरोना की वजह से 30 फीसदी स्वास्थ्यकर्मी चिंता, 31.1 फीसदी अवसाद, 56.5 फीसदी तीव्र तनाव, 44 फीसदी अनिद्रा और 20.2 फीसदी घातक तनाव से पीड़ित हुए।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है खुद को समझना
मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपने आप को समझना तथा उन बातों से बचना जो तनाव का कारण बन सकती हैं। केजीएमयू और सीतापुर के राजकीय महाविद्यालय कुचलाई की ओर से आयोजित वेबिनार में केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अग्रवाल ने यह बात कही। मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय कुचलाई की प्राचार्य डा. शहला नुसरत किदवई ने कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ मन का होना अत्यंत आवश्यक है। इस बात पर बल दिया कि शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। डॉ. बंदना गुप्ता ने सामान्य रूप से पाए जाने वाले मानसिक रोग जैसे अवसाद और घबराहट पर बात की।
हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक रोगी
हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक रोगी है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर मेदांता अस्पताल के डॉ. शांतनु भारती ने यह जानकारी दी। उनके अनुसार कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आइसोलेशन ने भी मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ाई है। अपोलो मेडिक्स के सीनियर कंसलटेंट डॉ. उमर मुशीर के अनुसार कोविड की पहली और दूसरी लहर के दौरान काफी लोगों ने अपनों को खोया है। इससे लोगों को भी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार संक्रमित होने के बाद 57 फीसदी लोगों में अनिद्रा की समस्या मिली है। जबकि कोविड से पहले यह महज 18 फीसदी में ही थी।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. अलीम सिद्दीकी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि रविवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर एक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा।
डॉ. अलीम के अनुसार, मानसिक समस्या किसी को भी हो सकती है। सामान्य ओपीडी में आने वाले लोगों में 30 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित होते हैं।
अवसाद मानसिक विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में पांच फीसदी वयस्क अवसाद से पीड़ित हैं। वहीं, 10 से 19 वर्ष आयु तक के हर सात बच्चों में से एक मानसिक विकार से पीड़ित है।
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इसी तरह सिजोफ्रेनिया जैसे गंभीर मानसिक रोग से पीड़ित मरीज सामान्य आबादी के मुकाबले 10 से 20 फीसदी तक कम जीते हैं। मानसिक बीमारियों के कई प्रकार हैं।
इनमें से ज्यादातर मानसिक बीमारियों के बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है। हमारे आसपास भी काफी लोग इससे पीड़ित हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में, संकोच या फिर शर्म की वजह से लोग इलाज नहीं कराते हैं।
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इन सभी मुद्दों पर एक दिवसीय सेमिनार में चर्चा की जाएगी। इस दौरान आईएमए के महामंत्री प्रो.जेडी रावत भी मौजूद रहे।
15 से 29 साल आयु वर्ग में आत्महत्या चौथा सबसे बड़ा कारण
बच्चे और किशोर आयु वर्ग मानसिक समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इससे युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति काफी बढ़ रही है। देश में हर 100 मौत में से एक मामला आत्महत्या की वजह से होता है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार 15 से 29 साल आयु तक के युवाओं में जितनी कुल मौत होती हैं उनमें चौथा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है। सर्वेक्षण के अनुसार देश में 10.6 फीसदी लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। इनमें से 10 फीसदी लोग अवसाद, चिंता और मादक द्रव्यों के सेवन की वजह से बीमार हैं।
कोविड से बुरी तरह प्रभावित हुए स्वास्थ्यकर्मी
डॉ. अलीम के अनुसार, कोविड से स्वास्थ्यकर्मी भी अछूते नहीं रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, कोरोना की वजह से 30 फीसदी स्वास्थ्यकर्मी चिंता, 31.1 फीसदी अवसाद, 56.5 फीसदी तीव्र तनाव, 44 फीसदी अनिद्रा और 20.2 फीसदी घातक तनाव से पीड़ित हुए।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है खुद को समझना
मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपने आप को समझना तथा उन बातों से बचना जो तनाव का कारण बन सकती हैं। केजीएमयू और सीतापुर के राजकीय महाविद्यालय कुचलाई की ओर से आयोजित वेबिनार में केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अग्रवाल ने यह बात कही। मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय कुचलाई की प्राचार्य डा. शहला नुसरत किदवई ने कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ मन का होना अत्यंत आवश्यक है। इस बात पर बल दिया कि शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। डॉ. बंदना गुप्ता ने सामान्य रूप से पाए जाने वाले मानसिक रोग जैसे अवसाद और घबराहट पर बात की।
हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक रोगी
हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक रोगी है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर मेदांता अस्पताल के डॉ. शांतनु भारती ने यह जानकारी दी। उनके अनुसार कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आइसोलेशन ने भी मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ाई है। अपोलो मेडिक्स के सीनियर कंसलटेंट डॉ. उमर मुशीर के अनुसार कोविड की पहली और दूसरी लहर के दौरान काफी लोगों ने अपनों को खोया है। इससे लोगों को भी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।