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UP: खाता हैक कर 51.88 लाख निकाले, अब बैंक को देने होंगे 74.25 लाख; धोखाधड़ी में बैंक कर्मचारियों की भूमिका!

Fri, 01 Mar 2024 08:45 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 01 Mar 2024 08:45 AM IST
सार

कारोबारी का खाता हैक कर 51.88 लाख रुपये निकाल लिए। मामला राज्य उपभोक्ता आयोग में पहुंचा। आयोग का आदेश है कि अब बैंक को 74.25 लाख रुपये देने होंगे। धोखाधड़ी में बैंक कर्मचारियों की भूमिका से भी इन्कार नहीं किया है।

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51.88 lakhs withdrawn by hacking account now bank will have to pay 74.25 lakh State Consumer Commission order
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखनऊ के कारोबारी सोमनाथ चटर्जी के बैंक खाते से 51.88 लाख रुपये धोखेबाजी से निकाल लिए गए। बैंक ऑफ बड़ौदा ने इसे खाताधारक की लापरवाही बताकर यह रकम देने से इन्कार कर दिया। कारोबारी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। 
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दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने आदेश दिया कि बैंक ऑफ बड़ौदा सोमनाथ को 51.88 लाख रुपये 10 फीसदी सालाना ब्याज के साथ वापस करे। मानसिक कष्ट के रूप में 10 लाख रुपये और वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये भी बैंक को देने के आदेश दिए। 
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इस तरह धोखाधड़ी के शिकार खाताधारक को करीब 74.25 लाख रुपये मिलेंगे। आयोग ने कहा कि इस धोखाधड़ी में बैंक कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। हो सकता है कि उन्होंने ही खाता हैक कर लिया हो। लखनऊ में आशियाना निवासी सोमनाथ चटर्जी मुद्रा मार्केटिंग के प्रोपराइटर हैं। 
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बैंक ऑफ बड़ौदा की नरही शाखा में उनका बचत खाता, चालू खाता और 50 लाख रुपये का ओवरड्राफ्ट खाता है। ओवरड्राफ्ट खाते के एवज में उन्होंने बैंक में 60 लाख रुपये की एफडी कराई है। ओवरड्राफ्ट खाते से लेनदेन केवल ओटीपी के जरिये ही किया जा सकता है।
 

25 मार्च 2021 की रात उनका मोबाइल फोन बंद था। अगले दिन सुबह उन्हें पता चला कि उनके एक खाते से 1.89 लाख और ओवरड्राफ्ट खाते से 49.99 लाख रुपये निकल गए। इतनी बड़ी रकम निकासी से पहले न तो उनके फोन पर ओटीपी आया, न ही पुष्टि के लिए एसएमएस आया, न ही कोई कॉल आई और न ही ईमेल किया गया। 

उन्होंने तत्काल बैंक में सूचना दी। साइबर फ्रॉड सेल में एफआईआर दर्ज कराई। बैंक ने जांच के बाद ठीकरा सोमनाथ चटर्जी पर ही यह कहते हुए फोड़ दिया कि ओटीपी और मैसेज किए गए थे इसलिए फ्रॉड के लिए बैंक जिम्मेदार नहीं है। 

 

सोमनाथ ने बैंकिंग लोकपाल में भी शिकायत दर्ज कराई लेकिन राहत नहीं मिली। राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस मामले पर कोई फैसला सुनाने से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि साइबर फ्रॉड के मामले में ग्राहक से ज्यादा बैंकों की जिम्मेदारी है। 

 

जिन मामलों में न ग्राहक की लापरवाही पाई जाती है और न ही बैंक की, लेकिन बैंकिंग सिस्टम में कमी पाई जाती है तो ग्राहक को नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। बैंकों को अपना सिस्टम फूलप्रूफ बनाना चाहिए।


 

आयोग ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस मामले में बैंक की सेवाओं में कमी पाई है। आयोग ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बैंक के कर्मचारियों ने धोखेबाज के साथ मिलकर शिकायतकर्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर के साथ-साथ शिकायतकर्ता के खाते को कुछ मिनटों के लिए हैक कर लिया होगा। 
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