झटका: 4000 बीएड छात्रों का रिजल्ट रुका, जांच शुरू
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लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में गलत ढंग से हुए एडमिशन के कारण 500 स्टूडेंट्स का भविष्य फंस गया है। बीएड कॉलेजों ने शैक्षिक सत्र 2013-14 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित समय सीमा के बाद बड़ी संख्या में दाखिले ले लिए।
जब रिजल्ट की बारी आई तो मामला खुल गया। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बीएड के 40 कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 4000 स्टूडेंटस का रिजल्ट रोककर जांच शुरू कर दी।
अब यह देखा जा रहा है कि किस स्टूडेंट को गलत ढंग से एडमिशन दिया गया है। जिन छात्रों के दाखिले नियम विरुद्ध हुए हैं, उनका रिजल्ट रोककर बाकी छात्रों का परिणाम घोषित करने की तैयारी की जा रही है।
यूनिवर्सिटी इसी हफ्ते बीएड परीक्षा का परिणाम घोषित करने का दावा कर रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध 28 निजी कॉलेज और 12 सहायता प्राप्त कॉलेजों में बीएड का कोर्स चलता है।
इसमें करीब 4000 स्टूडेंट्स को दाखिला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने दाखिले के लिए सितंबर के मध्य तक का समय दिया था लेकिन डिग्री कॉलेजों ने नियम विरुद्घ दिसंबर तक दाखिला ले लिया।
इसके बाद स्टूडेंट्स को पूरे शैक्षिक सत्र में पढ़ाई भी करवाई गई और परीक्षा भी ली गई। परीक्षा देने के दो महीने बाद भी रिजल्ट घोषित नहीं किया गया तो स्टूडेंट यूनिवर्सिटी के चक्कर लगाने लगे।
बाकी का परिणाम इसी हफ्ते
माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं। इसके बाद जब यूनिवर्सिटी प्रशासन पर दबाव पड़ा तो गड़बड़झाले की पर्त उधड़ने लगीं।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता प्रो. एन.के पांडेय ने बताया कि बीएड में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित समय के बाद भी डिग्री कॉलेजों में कुछ छात्रों को दाखिला देने का मामला संज्ञान में आया है।
परीक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे गलत ढंग से दाखिला पाने वाले छात्रों का रिजल्ट रोककर बाकी सभी छात्रों का रिजल्ट घोषित कर दें। जिन छात्रों को गलत ढंग से प्रवेश दे दिया गया है उनके भविष्य का फैसला बाद में नियमानुसार किया जाएगा।
सूत्रों की मानें, तो ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या करीब 500 के आसपास होगी। अभी इन्हें सूचीबद्ध किया जा रहा है, इसके बाद ही कोई अंतिम आंकड़ा सामने आएगा।
वहीं, गलत ढंग से दाखिला पाने वाले छात्रों का रिजल्ट रोककर बाकी सभी करीब 3,500 स्टूडेंट्स के परिणाम इसी हफ्ते घोषित कर दिए जाएंगे। परीक्षा विभाग रिजल्ट तैयार करने के काम में तेजी से जुटा हुआ है।
बीबीएयू ने दाखिला दिया न लौटाया आवेदन शुल्क
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी ने न तो छात्रों को बीएड-एमएड में दाखिला दिया और न ही उन्हें आवेदन फीस लौटाई। पांच महीने से छात्र दर-दर भटक रहे हैं।
यूनिवर्सिटी ने बगैर मान्यता के ही दाखिले के लिए आवेदन ले लिए थे। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन लगातार यही कह रहा है कि जल्द ही छात्रों को उनसे आवेदन शुल्क वापस कर दिए जाएंगे।
यूनिवर्सिटी ने बीएड की 100 व एमएड की 30 सीटों पर दाखिले के लिए आवेदन लिए थे। आवेदन शुल्क के रूप में 1500 रुपये छात्रों से लिए गए थे।
नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) ने स्थायी शिक्षक न होने के कारण बीएड व एमएड कोर्स की मान्यता देने से मना कर दिया।
उसने यूनिवर्सिटी प्रशासन को सलाह दी थी कि वह रेग्युलर टीचर भर्ती करें तभी यह कोर्स चला सकते हैं। मगर अभी तक ऐसा नहीं हुआ।
बीबीएयू प्रशासन का कहना है कि यहां पर बीएड व एमएड कोर्सेज में स्थायी शिक्षकों की भर्ती इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि विजिटर के नॉमिनी को आना था लेकिन वे नहीं आए।
इसके चलते दाखिले नहीं दिए जा सके। इस बीच दाखिले के लिए चक्कर लगा-लगाकर स्टूडेंट थक गए।