{"_id":"59a701634f1c1b05278b48b1","slug":"41504117091-lucknow-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में प्रतिष्ठित होगी रामनगरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में प्रतिष्ठित होगी रामनगरी
Updated Wed, 30 Aug 2017 11:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूनेस्को के निर्धारित मानकों को पूरा करती है अयोध्या
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या विश्व धरोहर के तौर पर प्रतिष्ठित होगी। इसके लिए यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 मानकों पर अयोध्या लगभग खरी उतरती नजर आ रही है। इसके लिए प्रोजेक्ट तैयार करने का कार्य अंतिम दौर में है, जिसकी मॉनीटरिंग अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक वर्ष के भीतर रामनगरी विश्व धरोहर में शामिल हो जाएगी।
अगर ऐसा हुआ तो देश में अहमदाबाद के बाद वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में अयोध्या दूसरा शहर होगा। पौराणिक परंपरा के अनुसार हजारों वर्ष पूर्व महाराजा मनु के समय से ही नगरी की ऐतिहासिकता का प्रवाहमान है। यदि आधुनिक इतिहास की दृष्टि से देखें तो भी नगरी प्राचीनतम नौवीं शताब्दी ईसा पूर्व से प्रमाणित है।
सर्वाधिक अहम गुप्तार घाट से बिल्व हरिघाट के बीच करीब 30 किलोमीटर की परिधि में सरयू से तीन ओर से अवेष्टित रामनगरी की अवस्थिति है। इस मुहिम के सूत्रधार अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि अयोध्या में कनक भवन, हनुमानगढ़ी और वाल्मीकि रामायण भवन जैसे मंदिर यूनेस्को के मानक के अनुरूप हैं।
विज्ञापन
सरयू के जमथरा तट से लेकर संत तुलसीदास घाट तक सर्वे के दौरान सेटेलाइट से अयोध्या का जो भूदृश्य प्राप्त हुआ वह नौका की शक्ल में है। ये चित्र अयोध्या के संस्थापक माने जाने वाले मनु की उस परंपरा को जीवंत करता है।
इसमें पुराण बताते हैं कि जल प्रलय के दौरान मनु विशाल नौका के साथ अयोध्या के तट पर पहुंचे थे। समझा जा रहा है कि परिस्थिति तंत्र व जैव विविधता के फलक पर रामनगरी की अनदेखी करना कठिन है।
तैयार हो रही सर्वे रिपोर्ट
वर्ल्ड हेरिटेज के लिए सर्वे पूर्ण हो चुका है। इसकी रिपोर्ट तकरीबन 400 पृष्ठों में तैयार हो रही है। सर्वे रिपोर्ट शीघ्र ही प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी। कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि, आगामी 9 व 10 सितंबर को इसको लेकर बैठक बुलाई गई है।
इसमें प्रोजेक्ट से जुड़े बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. राना पीवी सिंह और यूनेस्को की इकाई इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंट्स एंड साइट के सदस्य शोध छात्र सर्वेश आदि शामिल होंगे। बैठक में डॉक्यूमेंट को पुख्ता करने पर विचार होगा।
इस प्रोजेक्ट से जुड़ी स्थानीय संस्था सरयू अवध बालक सेवा समिति के संयोजक आशीष मिश्र बताते हैं कि, अगले एक वर्ष लगभग 50 सेमिनार भी आयोजित किए जाने हैं, जिस पर प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा होनी है। ताकि इस रिपोर्ट को पुख्ता बनाया जा सके।
यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 मानक
कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित बताते हैं कि, यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरीटेज सिटी के लिए जो 10 मानक निर्धारित किए गए हैं उनमें मानव रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व, वास्तुकला एवं स्मारकों में निहित मानव मूल्य, सांस्कृतिक परंपरा की प्राचीनता एवं निरंतरता, भूदृश्य एवं वास्तु की उत्कृष्टता, परंपरागत निवास स्थल, सांस्कृतिक उत्तर जीविता, जीवंत परंपरा एवं अमूर्त धरोहर, प्राकृतिक सुंदरता, पारिस्थितिकी तथा जैव विविधता शामिल हैं। इसमें से अयोध्या आठ मानकों पर खरी उतरती है।
विज्ञापन
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या विश्व धरोहर के तौर पर प्रतिष्ठित होगी। इसके लिए यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 मानकों पर अयोध्या लगभग खरी उतरती नजर आ रही है। इसके लिए प्रोजेक्ट तैयार करने का कार्य अंतिम दौर में है, जिसकी मॉनीटरिंग अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक वर्ष के भीतर रामनगरी विश्व धरोहर में शामिल हो जाएगी।
अगर ऐसा हुआ तो देश में अहमदाबाद के बाद वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में अयोध्या दूसरा शहर होगा। पौराणिक परंपरा के अनुसार हजारों वर्ष पूर्व महाराजा मनु के समय से ही नगरी की ऐतिहासिकता का प्रवाहमान है। यदि आधुनिक इतिहास की दृष्टि से देखें तो भी नगरी प्राचीनतम नौवीं शताब्दी ईसा पूर्व से प्रमाणित है।
विज्ञापन
सर्वाधिक अहम गुप्तार घाट से बिल्व हरिघाट के बीच करीब 30 किलोमीटर की परिधि में सरयू से तीन ओर से अवेष्टित रामनगरी की अवस्थिति है। इस मुहिम के सूत्रधार अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि अयोध्या में कनक भवन, हनुमानगढ़ी और वाल्मीकि रामायण भवन जैसे मंदिर यूनेस्को के मानक के अनुरूप हैं।
विज्ञापन
सरयू के जमथरा तट से लेकर संत तुलसीदास घाट तक सर्वे के दौरान सेटेलाइट से अयोध्या का जो भूदृश्य प्राप्त हुआ वह नौका की शक्ल में है। ये चित्र अयोध्या के संस्थापक माने जाने वाले मनु की उस परंपरा को जीवंत करता है।
इसमें पुराण बताते हैं कि जल प्रलय के दौरान मनु विशाल नौका के साथ अयोध्या के तट पर पहुंचे थे। समझा जा रहा है कि परिस्थिति तंत्र व जैव विविधता के फलक पर रामनगरी की अनदेखी करना कठिन है।
तैयार हो रही सर्वे रिपोर्ट
वर्ल्ड हेरिटेज के लिए सर्वे पूर्ण हो चुका है। इसकी रिपोर्ट तकरीबन 400 पृष्ठों में तैयार हो रही है। सर्वे रिपोर्ट शीघ्र ही प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी। कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि, आगामी 9 व 10 सितंबर को इसको लेकर बैठक बुलाई गई है।
इसमें प्रोजेक्ट से जुड़े बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. राना पीवी सिंह और यूनेस्को की इकाई इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंट्स एंड साइट के सदस्य शोध छात्र सर्वेश आदि शामिल होंगे। बैठक में डॉक्यूमेंट को पुख्ता करने पर विचार होगा।
इस प्रोजेक्ट से जुड़ी स्थानीय संस्था सरयू अवध बालक सेवा समिति के संयोजक आशीष मिश्र बताते हैं कि, अगले एक वर्ष लगभग 50 सेमिनार भी आयोजित किए जाने हैं, जिस पर प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा होनी है। ताकि इस रिपोर्ट को पुख्ता बनाया जा सके।
यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 मानक
कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित बताते हैं कि, यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरीटेज सिटी के लिए जो 10 मानक निर्धारित किए गए हैं उनमें मानव रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व, वास्तुकला एवं स्मारकों में निहित मानव मूल्य, सांस्कृतिक परंपरा की प्राचीनता एवं निरंतरता, भूदृश्य एवं वास्तु की उत्कृष्टता, परंपरागत निवास स्थल, सांस्कृतिक उत्तर जीविता, जीवंत परंपरा एवं अमूर्त धरोहर, प्राकृतिक सुंदरता, पारिस्थितिकी तथा जैव विविधता शामिल हैं। इसमें से अयोध्या आठ मानकों पर खरी उतरती है।