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3500 करोड़ की हेराफेरी का मामला : फ्रास्ट इंटरनेशनल की 185 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
Thu, 01 Jul 2021 12:15 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 01 Jul 2021 12:15 AM IST
सार
यह संपत्तियां कानपुर, नई दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, कोलकाता और तमिलनाडु में हैं। यह पूरा मामला बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुई साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़ा है। सीबीआई भी इसकी जांच कर रही है।
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बैंक ऑफ इंडिया
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को कानपुर की फ्रास्ट इंटरनेशनल लि. की 185 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की है। यह संपत्तियां कानपुर, नई दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, कोलकाता और तमिलनाडु में हैं। यह पूरा मामला बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुई साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़ा है। सीबीआई भी इसकी जांच कर रही है।
पिछले साल जनवरी में सीबीआई ने बैंक ऑफ इंडिया, कानपुर के जोनल मैनेजर प्रशांत कुमार की ओर से एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें बताया गया है कि फ्रास्ट इंटरनेशनल लि. और उसके समूह की अन्य कंपनियों आरएस बिल्डर्स प्रा. लि., ग्लोबिज एक्जिम प्रा. लि. और एनएसडी निर्माण प्रा. लि. ने मिलकर बैंक ऑफ इंडिया को साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की चपत लगाई है।
इस मामले को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। ईडी की जांच में भी पैसों की हेराफेरी की तस्दीक हुई है। इसमें पता चला कि बैंक से लिए पैसों को दूसरे मदों में ट्रांसफर कर दिया गया और उससे संपत्तियां अर्जित की गईं। ईडी ने इन्हीं संपत्तियों रको जब्त किया है।
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पिछले साल जनवरी में सीबीआई ने बैंक ऑफ इंडिया, कानपुर के जोनल मैनेजर प्रशांत कुमार की ओर से एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें बताया गया है कि फ्रास्ट इंटरनेशनल लि. और उसके समूह की अन्य कंपनियों आरएस बिल्डर्स प्रा. लि., ग्लोबिज एक्जिम प्रा. लि. और एनएसडी निर्माण प्रा. लि. ने मिलकर बैंक ऑफ इंडिया को साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की चपत लगाई है।
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इस मामले को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। ईडी की जांच में भी पैसों की हेराफेरी की तस्दीक हुई है। इसमें पता चला कि बैंक से लिए पैसों को दूसरे मदों में ट्रांसफर कर दिया गया और उससे संपत्तियां अर्जित की गईं। ईडी ने इन्हीं संपत्तियों रको जब्त किया है।
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