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पांच प्रोफेसरों को एसोसिएट फेलोशिप, चार को यंग सांइटिस्ट अवार्ड
Updated Sun, 15 Apr 2018 10:48 PM IST
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फैजाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में चल रही अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। इसमें पांच प्रोफेसरों को एसोसिएट फेलोशिप देने की घोषणा की गई, जबकि चार को यंग सांइटिस्ट अवार्ड दिया गया।
समापन सत्र में एसोसिएट फेलोशिप की घोषणा की गई। गणित क्षेत्र में प्रो. अनिल कुमार वशिष्ठ कुरूक्षेत्र विवि कुरूक्षेत्र, प्रो. एमके शर्मा गुरू जम्भेश्वर तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार, भौतिकी की क्षेत्र में प्रो. रविंद्रधर इलाहाबाद विवि इलाहाबाद, प्रो. एसएन शुक्ला अवध विवि, रसायन विज्ञान के क्षेत्र में प्रो. अलका अग्रवाल बीएचयू वाराणसी को दिया गया। इन सभी प्रतिभागियों को आगामी 18 नवंबर को काठमांडू में सम्मानित किया जाएगा। यंग सांइटिस्ट अवार्ड गणित में डॉ. ऋतु ब्रत विश्वास बर्धमान विश्वविद्यालय, भौतिकी में डॉ. गोविंद पाठक लखनऊ विश्वविद्यालय, इलेक्ट्रानिक से सुश्री शिप्रा सारस्वत एमिटी विवि, निधि मिश्रा बीएचयू वाराणसी को दिया गया।
संगोष्ठी के समापन के दिन अष्टम एवं नवम तकनीकी सामानांतर सत्र में प्रो. आनन्द पाठक की अध्यक्षता में प्रो. मनोहर लाल इग्नू नई दिल्ली ने कम्प्यूटर साइंस पर आधारित भारत में एतिहासिक सांस्कृतिक परिदृश्य पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. तारकेश्वर त्रिवेदी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट ऑफ न्यूक्लीयर फिजिक्स प्रोग्राम इन इंडिया पर अपनी प्रस्तुति दी। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एसएन शुक्ला ने स्मॉल सिग्नल एम्पलीफाइंग सिस्टम विद सिजीक्लाइ पेयर टोपोलॉजी पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
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संत कबीर सभागार में इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ फिजिकल सांइसेज (आईएपीएस) के संयुक्त तत्वावधान में इमरजिंग ट्रेंड इन फिजिकल सांइसेज विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई। मुख्य अतिथि सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, काठमांडू नेपाल प्रो. बुह्णि आर खड़गे रहे। खड़गे ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे मर्यादा पुरूषोत्तम राम के जन्म स्थल अयोध्या के धरती पर मुझे आने का अवसर मिला। वैसे नेपाल मां सीता की जन्मभूमि रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने की।
विशिष्ट अतिथि कुलपति प्रो. पीएन पाण्डेय ने कहा कि आईएपीएस की यात्रा काशी से शुरू होकर 22वें वर्ष अयोध्या पहुंची है। इस यात्रा का अगला पड़ाव आगामी 16 नवंबर से 18 नवंबर को काठमांडू में है। यह एक ऐसा यज्ञ है जो एक के बाद एक वैज्ञानिक मंच तैयार कर विश्व समुदाय में सेवा का अवसर प्रदान करता है। संगोष्ठी का संचालन आयोजन सचिव डॉ. एसएस मिश्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. आरके तिवारी ने किया।
शबरी के बेर ने मन मोहा
अवध विवि में सांस्कृतिक संध्या के अवसर पर अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह द्वारा रामायण की वैश्विक यात्रा पर फिल्म की प्रस्तुति की गई। उन्होंने विश्व के कोने-कोने में राम के अस्तित्व के साक्ष्य को दिखाया और राम की कई देशों में मान्यता एवं पूर्वज होने के साक्ष्यों को दर्शाया कि किस प्रकार राम की मान्यता इस्लामिक बाहुल्य देशों में है। शबरी के बेर का नाट्य मंचन छात्र-छात्राओं ने किया। नाटिका की कोरियोग्राफर संगीता आहूजा रहीं। रामस्मृति समूह नृत्य में सौम्या सिंह, पूजा सिंह, शिवम निषाद, ज्योत्सना द्विवेदी, रमा प्रजापति, देवेश यादव ने दर्शकों को रोमाचिंत कर दिया। झांसी से आये कलाकार निशान सिंह भदौरिया की टीम की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया। बिहार की प्रख्यात लोक गायिका नीतू कुमारी ने राम भजन एवं लोक संगीत की प्रस्तुति दी।
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समापन सत्र में एसोसिएट फेलोशिप की घोषणा की गई। गणित क्षेत्र में प्रो. अनिल कुमार वशिष्ठ कुरूक्षेत्र विवि कुरूक्षेत्र, प्रो. एमके शर्मा गुरू जम्भेश्वर तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार, भौतिकी की क्षेत्र में प्रो. रविंद्रधर इलाहाबाद विवि इलाहाबाद, प्रो. एसएन शुक्ला अवध विवि, रसायन विज्ञान के क्षेत्र में प्रो. अलका अग्रवाल बीएचयू वाराणसी को दिया गया। इन सभी प्रतिभागियों को आगामी 18 नवंबर को काठमांडू में सम्मानित किया जाएगा। यंग सांइटिस्ट अवार्ड गणित में डॉ. ऋतु ब्रत विश्वास बर्धमान विश्वविद्यालय, भौतिकी में डॉ. गोविंद पाठक लखनऊ विश्वविद्यालय, इलेक्ट्रानिक से सुश्री शिप्रा सारस्वत एमिटी विवि, निधि मिश्रा बीएचयू वाराणसी को दिया गया।
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संगोष्ठी के समापन के दिन अष्टम एवं नवम तकनीकी सामानांतर सत्र में प्रो. आनन्द पाठक की अध्यक्षता में प्रो. मनोहर लाल इग्नू नई दिल्ली ने कम्प्यूटर साइंस पर आधारित भारत में एतिहासिक सांस्कृतिक परिदृश्य पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. तारकेश्वर त्रिवेदी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट ऑफ न्यूक्लीयर फिजिक्स प्रोग्राम इन इंडिया पर अपनी प्रस्तुति दी। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एसएन शुक्ला ने स्मॉल सिग्नल एम्पलीफाइंग सिस्टम विद सिजीक्लाइ पेयर टोपोलॉजी पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
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संत कबीर सभागार में इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ फिजिकल सांइसेज (आईएपीएस) के संयुक्त तत्वावधान में इमरजिंग ट्रेंड इन फिजिकल सांइसेज विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई। मुख्य अतिथि सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, काठमांडू नेपाल प्रो. बुह्णि आर खड़गे रहे। खड़गे ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे मर्यादा पुरूषोत्तम राम के जन्म स्थल अयोध्या के धरती पर मुझे आने का अवसर मिला। वैसे नेपाल मां सीता की जन्मभूमि रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने की।
विशिष्ट अतिथि कुलपति प्रो. पीएन पाण्डेय ने कहा कि आईएपीएस की यात्रा काशी से शुरू होकर 22वें वर्ष अयोध्या पहुंची है। इस यात्रा का अगला पड़ाव आगामी 16 नवंबर से 18 नवंबर को काठमांडू में है। यह एक ऐसा यज्ञ है जो एक के बाद एक वैज्ञानिक मंच तैयार कर विश्व समुदाय में सेवा का अवसर प्रदान करता है। संगोष्ठी का संचालन आयोजन सचिव डॉ. एसएस मिश्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. आरके तिवारी ने किया।
शबरी के बेर ने मन मोहा
अवध विवि में सांस्कृतिक संध्या के अवसर पर अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह द्वारा रामायण की वैश्विक यात्रा पर फिल्म की प्रस्तुति की गई। उन्होंने विश्व के कोने-कोने में राम के अस्तित्व के साक्ष्य को दिखाया और राम की कई देशों में मान्यता एवं पूर्वज होने के साक्ष्यों को दर्शाया कि किस प्रकार राम की मान्यता इस्लामिक बाहुल्य देशों में है। शबरी के बेर का नाट्य मंचन छात्र-छात्राओं ने किया। नाटिका की कोरियोग्राफर संगीता आहूजा रहीं। रामस्मृति समूह नृत्य में सौम्या सिंह, पूजा सिंह, शिवम निषाद, ज्योत्सना द्विवेदी, रमा प्रजापति, देवेश यादव ने दर्शकों को रोमाचिंत कर दिया। झांसी से आये कलाकार निशान सिंह भदौरिया की टीम की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया। बिहार की प्रख्यात लोक गायिका नीतू कुमारी ने राम भजन एवं लोक संगीत की प्रस्तुति दी।