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संवरेगा शहर का ऐतिहासिक घंटाघर पार्क

Mon, 15 Jan 2018 10:49 PM IST
Updated Mon, 15 Jan 2018 10:49 PM IST
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संवरेगा शहर का ऐतिहासिक घंटाघर पार्क
बहराइच। शहर के लोगों के लिए सुकून भरी खबर है। उन्हें स्वच्छ हवा में सांस लेने और शांति के लिए दूर नहीं जाना होगा। शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक घंटाघर पार्क को संवारने की कार्ययोजना तय हुई है। नगर पालिका प्रशासन कार्य योजना को अमलीजामा पहनाने में जुटा हुआ है। टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। 44 लाख की लागत से पार्क का निर्माण होगा।
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अत्याधुनिक फौव्वारे के साथ ही लोगों की सुविधाओं के लिए अन्य व्यवस्थाएं होंगी। इसकी कवायद तेज हो गई है। यह घंटाघर प्रदेश का सबसे बड़ा घंटाघर है। अमर उजाला से बातचीत में नगर पालिका की अध्यक्ष रूबीना रेहान ने बताया कि शहर में सबसे अधिक समस्या स्वच्छ हवा और सुकून की है।
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इसी के लिए नगर पालिका प्रशासन ने पहला कदम उठाया है। 10 एकड़ में फैले इस पार्क की तस्वीर बदली जाएगी। इसके लिए बीते दिनों हुई बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव रखा गया था। ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित हुआ। इसके बाद टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। 44 लाख रुपये की कार्य योजना तय हुई है। जिससे पार्क को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
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दुरुस्त होंगी यह व्यवस्थाएं
चहारदीवारी का उच्चीकरण, कटीले तार लगेंगे।
बच्चों के लिए दो झूले लगाएं जाएंगे।
घंटाघर के 50 मीटर के दायरे में लगेंगी टाइल्स।
रंगीन फौव्वारे की व्यवस्था होगी।
25 बेंच लगाई जाएंगी।

ठेकेदार पांच साल की लेगा जिम्मेदारी
नपा अध्यक्ष रूबीना रेहान ने बताया कि अभी तक जो भी कार्य हुए हैं ठेकेदारों ने करवाया, पैसे का भुगतान हुआ और किनारा कस लिया। लेकिन शहर के इस पार्क के निर्माण के लिए जिसेे भी ठेका मिलेेगा, उसे पांच साल तक पार्क को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी लेनी होगी। पांच साल बाद ही ठेकेदार की जमानत राशि पार्क की जांच करने के बाद वापस की जाएगी।


1857 की क्रांति व नमक आंदोलन को यहीं से मिली थी गति
इतिहास के पन्नों में झांके तो बहराइच का घंटाघर प्रदेश का सबसे बड़ा घंटाघर है। ऊंचाई 88 मीटर है। 80 के दशक में घंटाघर की सुइयां चलती थीं। घंटा बजने पर डेढ़ किलोमीटर तक आवाज सुनाई पड़ती थी। 1857 की क्रांति व नमक आंदोलन को इसी घंटाघर पार्क से गति मिली थी।
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