आईटी सिटी के पास बसेंगे 30 हजार परिवार
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चक गंजरिया परियोजना के तहत स्थापित की जाने वाली आईटी सिटी के पड़ोस में
दरअसल, कुल 850 एकड़ भूमि में से करीब 550 एकड़ भूमि एलडीए को अपनी रिहायशी और कॉमर्शियल स्कीम बनाने के लिए मिल रही है, जिसमें प्राधिकरण ने करीब 300 एकड़ भूमि का लैंडयूज रेजीडेंशियल तय किया है।
इतनी भूमि में 30 हजार परिवारों को बसाने का इंतजाम हो जाएगा। इनमें से 6 हजार से कम आय वर्ग के होंगे, जिन्हें प्रदेश सरकार की आवास नीति के तहत जगह दी जाएगी।
चक गंजरिया परियोजना
का विकास इस समय सरकार की खास प्राथमिकताओं में है। यहां आईटी सिटी,
मेडिसिटी, दुग्ध विकास परियोजना और ट्रिपल आईटी प्रस्तावित है।
शासन ने
गंजरिया फार्म की कुल 850 एकड़ भूमि में से 550 एकड़ भूमि एलडीए को दी है,
जिस पर रिहायशी और कॉमर्शियल योजना विकसित की जाएगी।
प्लानिंग के मुताबिक
प्राधिकरण इस भूमि पर खुद योजना न बनाकर यह जमीन निजी कंपनियों को नीलाम
करेगा। निजी क्षेत्र के इसी निवेश के सहारे जनता को अपना मकान मिलेगा। यहां
जमीन बेचकर जो कमाई होगी, उससे मेट्रो की मदद होगी।
300 एकड़ में बनेंगे आवास
प्राधिकरण
के हिस्से की 550 एकड़ जमीन के लिए लैंडयूज तए किए गए हैं। इसमें 180 एकड़
रेजीडेंशियल एक साथ होगा, जबकि मिक्स लैंडयूज के तौर पर 120 एकड़ भूमि अलग
होगी।
यानी की हाउसिंग के लिए 300 एकड़ भूमि होगी। 64 एकड़ कॉमर्शियल लैंड
एक साथ होगी, जबकि मिक्स लैंडयूज के लिए तय स्थान में 80 एकड़ भूमि
कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए अलग से होगी।
ग्रीन एरिया के लिए 34 एकड़ व 61
एकड़ भूमि सड़क बनाने के लिए होगी। जेएनएनयूआरएम के हिसाब से 300 एकड़ भूमि
पर 30 हजार परिवारों को बसाया जा सकता है।
जल्द शुरू करें विकास के काम
चक
गंजरिया का विकास किस तरह किया जाएगा, एलडीए ने रविवार को इसका
प्रस्तुतीकरण प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग के समक्ष किया।
प्राधिकरण
को अब विकास कार्यों की डीपीआर तैयार कर जल्द कार्य शुरू कराने के निर्देश
दिए गए हैं। डीपीआर तैयार करने के लिए ब्राड वे मालयान एशिया प्राइवेट
लिमिटेड व आर्क काम प्राइवेट कंसल्ट को नियुक्त किया चुका है।