मुंबई से लाए गए घर से भागे व भटके हुए 30 बच्चे
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फैजाबाद का 12 वर्षीय मनोहर (परिवर्तित नाम) काफी गरीब परिवार से है। उसके पिता बेहद हिंसक हैं। वह घर से भागना चाहता था और डेढ़ साल पहले उसने ऐसा ही कर दिया। वह लखनऊ आया और यहां से मुंबई जा रही ट्रेन में चढ़ गया।
वह बताता है कि वह गाना गा लेता है इसलिए वह फिल्मों में काम करना चाहता था। उम्मीद थी कि उसे फिल्मों में ले लेंगे। ट्रेन के कोच को साफ करता तो लोग कुछ पैसा या खाने को दे देते। इन्हीं मुश्किलों को झेलता हुआ किसी तरह मुंबई पहुंचा और यहां की भीड़ में खो गया।
बकौल मनोहर वह माटुंगा के पास एक चाय नाश्ते की दुकान में कप-प्लेट धोकर किसी तरह जीवन यापन किया। वहां मालिक बहुत मारता था, तो दूसरी जगह काम करने लगा। इस बीच एक एनजीओ ने उसे देखा और माटुंगा के ही बाल गृह में पहुंचा दिया। वहां वह पिछले चार महीने से रह रहा था।
घर पहुंच कर जल्द से जल्द माता-पिता से मिलना चाहता है मनोहर
एनजीओ के कार्यकर्ताओं ने उसके घर का पता किया और उसे लखनऊ भेजा। मनोहर बताता है कि मुंबई पहुंचते ही उसे लग गया था कि उसने बहुत बड़ी गलती की है। पर, वहां स्टेशन पर मिले कुछ बच्चों ने बताया था कि उसे काम मिल जाएगा। इसलिए वह वहां रुक गया।
हालांकि वह घर लौटना चाहता था लेकिन जिन जगहों पर उसने काम किया, वे लोग उसे वापस जाने नहीं देना चाहते थे। न ही इतना पैसा कभी जमा कर पाया कि घर लौट पाता।
अब जब वह लौट आया है तो वह वादा करता है कि एक बार उसे उसके घर पहुंचा दिया जाए तो वह फिर कभी घर नहीं छोड़ेगा। यह कहानी सुनाते हुए रुआंसा हुआ मनोहर बताता है कि वह जल्द से जल्द अपने माता-पिता से मिलना चाहता है।
मनोहर जैसे 30 बच्चे बृहस्पतिवार शाम राजधानी के चारबाग रेलवे स्टेशन पर उतरे। इन्हें मुंबई से एक स्वयंसेवी संस्था माय होम इंडिया ने वहां के विभिन्न बालगृहों से लाया गया है।
आगे इस तरह परिवार को सौंपे जाएंगे बच्चे
ट्रेन में करीब 25 घंटे का सफर करके पहुंचे इन बच्चों में कई बीमार और थके हुए लग रहे थे। उन्हें बस किसी तरह अपने घर जाने की जल्दी थी। हालांकि बाल कल्याण समिति के निर्देशों पर उन्हें फिलहाल मोहान रोड स्थित राजकीय बाल गृह किशोर में रखा गया है।
इस दौरान एनजीओ के पदाधिकारी सुनील देवधर, राम प्रताप, रोहित कपूर और गौरव सिंह मौजूद थे। बालगृह यहां से इन बच्चों के अभिभावकों को संपर्क करके लखनऊ बुलाया जाएगा और उन्हें कस्टडी दी जाएगी।
इन जिलों के हैं बच्चे
एनजीओ के कार्यकर्ता कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि मुंबई के माटुंगा, भिवंडी, मानखुर्द और डोंगरी के बालगृहों से लाए गए बच्चों में से दो-दो लखनऊ, फीरोजाबाद, जौनपुर और गोरखपुर के हैं। छह बच्चे सिद्धार्थनगर, पांच सीतापुर, तीन बहराइच और एक-एक बाराबंकी, लखीमपुर, गोंडा, सहारनपुर, बस्ती, उन्नाव, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, कुशीनगर व मुरादाबाद के हैं।