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निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर भड़के कमिश्नर
Updated Tue, 26 Jun 2018 11:04 PM IST
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गोंडा। मरीजों की सहूलियत के लिए जिला अस्पताल में निर्माणाधीन 300 बेड का संयुक्त चिकित्सालय व जेई-एई से बीमार बच्चों को भर्ती करने के लिए बन रहे पीकू वार्ड का काम धीमी रफ्तार से चल रहा है। चार साल पहले वर्ष 2014 से बनना शुरू हुआ 300 बेड का अस्पताल जहां अब तक तैयार नहीं हो पाया है तो वहीं पीकू वार्ड भी
एक साल से निर्माणाधीन है। जिसका जायजा लेने पहुंचे मंडलायुक्त सुधेश कुमार ओझा ने मंगलवार को दोनोें अस्पतालों का काम देख रहीं दो अलग-अलग एजेंसियों राजकीय निर्माण निगम व पैकफेड के अधिकारियों की जमकर क्लास ली। आयुक्त ने पैकफेड के लोगों को चेतावनी दी है कि अगर वह तीन दिन मेें पीकू वार्ड का सारा काम पूरा नहीं कर लेते हैं तो उनके खिलाफ ऊपर तक लिखा-पढ़ी की जाएगी। जबकि दोनों अस्पतालों का काम पूरा होने पर उन्होेंने इसकी गुणवत्ता की जांच टीएसी से कराने को कहा है।
जिला अस्पताल में आयुक्त ने जब सीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव से निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर सवाल-जवाब किया तो सीएमओ ने उन्हें बताया कि 300 शैय्या के अस्पताल का काम पिछले चार साल से राजकीय निर्माण निगम कर रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जबकि जेई-एई से बीमार बच्चों को पीकू वार्ड में भर्ती करके उनका उपचार हर हाल में 20 जून से चालू किए जाने का निर्देश उन्हें प्रमुख सचिव स्तर से दिया जा चुका है। लेकिन अभी तक कार्यदायी संस्था पैकफेड इसका काम खत्म नहीं कर पाई है।
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इस पर आयुक्त ने दोनों एजेंसियों के अफसरों को खरी-खोटी सुनाई। आयुक्त ने पैकफेड के अधिकारियों से कहा है कि वह तीन दिन के भीतर पीकू वार्ड स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दें। दूसरी ओर जिला अस्पताल में निर्माणाधीन जिस 300 बेड के अस्पताल का काम आज दो साल पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। वह अब तक क्यों पूरा नहीं हुआ, इसे लेकर आयुक्त ने कार्यदायी संस्था से डिटेल मांगी है। साथ ही बिना अस्पताल का काम पूरा हुए ही तत्कालीन सीएमएस की ओर से खरीदे गए अस्पताली उपकरण, कुर्सी-मेज पर भी कमिश्नर ने प्रश्नचिन्ह लगाया। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने अस्पताल में मरीजों से उनका हाल जाना और उन्हें मुहैया होने वाले उपचार की जानकारी ली।
अस्पताल में 43 दवाएं कम कैसे : आयुक्त
बीते दिनों आयुक्त देवीपाटन मंडल सुधेश कुमार ओझा ने जिलाधिकारियों से मिल रहीं शिकायत पर प्रभारी अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. रतन कुमार से अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली दवाओं के क्रय आदेश का ब्यौरा तलब किया था। जिसमें ईडीएल (इसेंशियल ड्रग लिस्ट) की तमाम दवाएं शामिल थीं। वहीं मंगलवार को जब वह दौरे के तहत जिला अस्पताल पहुंचे तो उन्होेंने जिला अस्पताल के औषधि भंडारकक्ष का भी जायजा लिया। जहां मरीजों के लिए हर वक्त उपलब्ध रहने वाली 212 दवाओं में से 43 दवाएं उन्हें कम मिलीं। इस पर आयुक्त ने सीएमएस को हर जरूरी दवा की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने को कहा।
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एक साल से निर्माणाधीन है। जिसका जायजा लेने पहुंचे मंडलायुक्त सुधेश कुमार ओझा ने मंगलवार को दोनोें अस्पतालों का काम देख रहीं दो अलग-अलग एजेंसियों राजकीय निर्माण निगम व पैकफेड के अधिकारियों की जमकर क्लास ली। आयुक्त ने पैकफेड के लोगों को चेतावनी दी है कि अगर वह तीन दिन मेें पीकू वार्ड का सारा काम पूरा नहीं कर लेते हैं तो उनके खिलाफ ऊपर तक लिखा-पढ़ी की जाएगी। जबकि दोनों अस्पतालों का काम पूरा होने पर उन्होेंने इसकी गुणवत्ता की जांच टीएसी से कराने को कहा है।
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जिला अस्पताल में आयुक्त ने जब सीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव से निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर सवाल-जवाब किया तो सीएमओ ने उन्हें बताया कि 300 शैय्या के अस्पताल का काम पिछले चार साल से राजकीय निर्माण निगम कर रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जबकि जेई-एई से बीमार बच्चों को पीकू वार्ड में भर्ती करके उनका उपचार हर हाल में 20 जून से चालू किए जाने का निर्देश उन्हें प्रमुख सचिव स्तर से दिया जा चुका है। लेकिन अभी तक कार्यदायी संस्था पैकफेड इसका काम खत्म नहीं कर पाई है।
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इस पर आयुक्त ने दोनों एजेंसियों के अफसरों को खरी-खोटी सुनाई। आयुक्त ने पैकफेड के अधिकारियों से कहा है कि वह तीन दिन के भीतर पीकू वार्ड स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दें। दूसरी ओर जिला अस्पताल में निर्माणाधीन जिस 300 बेड के अस्पताल का काम आज दो साल पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। वह अब तक क्यों पूरा नहीं हुआ, इसे लेकर आयुक्त ने कार्यदायी संस्था से डिटेल मांगी है। साथ ही बिना अस्पताल का काम पूरा हुए ही तत्कालीन सीएमएस की ओर से खरीदे गए अस्पताली उपकरण, कुर्सी-मेज पर भी कमिश्नर ने प्रश्नचिन्ह लगाया। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने अस्पताल में मरीजों से उनका हाल जाना और उन्हें मुहैया होने वाले उपचार की जानकारी ली।
अस्पताल में 43 दवाएं कम कैसे : आयुक्त
बीते दिनों आयुक्त देवीपाटन मंडल सुधेश कुमार ओझा ने जिलाधिकारियों से मिल रहीं शिकायत पर प्रभारी अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. रतन कुमार से अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली दवाओं के क्रय आदेश का ब्यौरा तलब किया था। जिसमें ईडीएल (इसेंशियल ड्रग लिस्ट) की तमाम दवाएं शामिल थीं। वहीं मंगलवार को जब वह दौरे के तहत जिला अस्पताल पहुंचे तो उन्होेंने जिला अस्पताल के औषधि भंडारकक्ष का भी जायजा लिया। जहां मरीजों के लिए हर वक्त उपलब्ध रहने वाली 212 दवाओं में से 43 दवाएं उन्हें कम मिलीं। इस पर आयुक्त ने सीएमएस को हर जरूरी दवा की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने को कहा।