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खेतों में तेंदुए की चहलकदमी से ग्रामीणों में दहशत
Updated Thu, 01 Feb 2018 11:49 PM IST
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गांवों से कुत्ते तो जंगल से गायब हो रहे बंदर
सरैंया (सीतापुर)। थाना क्षेत्र सदरपुर में तेंदुए की चहलकदमी लोगों में दहशत पैदा कर रही है। हालात ये हैं कि कभी वह ट्रैक्टर के सामने खड़ा हो जाता है तो कभी ग्रामीणों के सामने। इसके बाद खेतों में घुसकर वह ओझल हो जाता है।
गुरुवार को भी तेंदुआ दो स्थानों पर देखा गया। वहीं क्षेत्र के गांवों में कुत्ते व जंगल में बंदरों की तादाद कम होती नजर आ रही है। वन विभाग सिर्फ नजर रखने की ही बात कह रहा है। पुरबियन पुरवा निवासी जितेंद्र चंद्र का पुत्र रामवीर (13) गुरुवार सुबह नित्यकर्म के लिए खेतों की तरफ गया था।
बताते हैं कि इसी बीच उसने गन्ने के खेत से तेंदुए को बाहर आते हुए देखा। घबराया रामवीर शोर मचाता हुआ गांव की तरफ भाग आया। हालांकि रामवीर के शोर पर गांव के लोग एकत्र तो हुए लेकिन कोई भी खेतों की तरफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
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ग्रामीणों ने बताया कि जिस खेत मेें बालक तेंदुआ होने की बात कह रहा था, उस खेत से किसी बड़े जानवर के गरजने की आवाज आ रही थी। उधर, दोपहर के वक्त पड़रिया गांव का सर्वेश खेत मेें गन्ने की कटाई कर रहा था। इसी बीच उसके सामने तेंदुआ आ गया।
सर्वेश की मानें तो दूरी अधिक होने के कारण वह वहां से निकल भागने में सफल रहा। सर्वेश का कहना है कि तेंदुआ काफी देर तक खेत के बाहर खड़ा रहा। शोर मचाने पर जब तक ग्रामीण पहुंचे, वह खेत में घुस गया। इधर सूचना पाकर वन विभाग की टीम तो मौके पर पहुंची लेकिन वनकर्मी कॉबिंग करने के बजाय पंजे की नाप करते रहे।
रेंजर बोले, भेड़िया या सियार है
जहां ग्रामीणों से लेकर सदरपुर थानाध्यक्ष तक ने तेंदुआ देखने की बात कही है, वहीं वन विभाग के रेंजर आरसी यादव का बयान बेहद चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि ग्रामीण भ्रम मेें हैं, इस क्षेत्र में तेंदुआ के बजाय कोई बड़ा भेड़िया या सियार मौजूद है जिसको देखकर लोग तेंदुआ होने की बात कह रहे हैं।
रेंजर का यह बयान लोगों के गले नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों का कहना कि सियार व भेड़िया से उनका सामना अक्सर होता रहता है। वे इतना तो जानते हैं कि जो जानवर दिखाई दे रहा है, वह सियार व भेड़िया नहीं है।
जानवरों व बच्चों की चिंता
सदरपुर क्षेत्र में तेंदुआ की मौजूदगी से लोग खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। खासकर ग्रामीण अपने बच्चों व पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीण बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज कर रहे हैं।
वे पशुओं को चराने के लिए खेतों की तरफ भी नहीं जा रहे हैं। हालत यह है कि खेतों में जानवरों के लिए घास लेने जाने से भी ग्रामीणों को डर लग रहा है। ग्रामीणों ने खेतों में जाने से तौबा कर ली है।
तेंदुए की तलाश में लगी है टीम
तेंदुए को लेकर सतर्कता बरती जा रही है, यह तेंदुआ बाराबंकी या फिर लखीमपुर के जंगलों से भटक कर आया है। उसके पगचिह्न न मिल पाने की वजह से उसे खोजने में परेशानी हो रही है। लोगों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीम सतर्क है, तेंदुए को तलाशा जा रहा है।
-डॉ. अनिरुद्ध पांडेय, डीएफओ
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सरैंया (सीतापुर)। थाना क्षेत्र सदरपुर में तेंदुए की चहलकदमी लोगों में दहशत पैदा कर रही है। हालात ये हैं कि कभी वह ट्रैक्टर के सामने खड़ा हो जाता है तो कभी ग्रामीणों के सामने। इसके बाद खेतों में घुसकर वह ओझल हो जाता है।
गुरुवार को भी तेंदुआ दो स्थानों पर देखा गया। वहीं क्षेत्र के गांवों में कुत्ते व जंगल में बंदरों की तादाद कम होती नजर आ रही है। वन विभाग सिर्फ नजर रखने की ही बात कह रहा है। पुरबियन पुरवा निवासी जितेंद्र चंद्र का पुत्र रामवीर (13) गुरुवार सुबह नित्यकर्म के लिए खेतों की तरफ गया था।
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बताते हैं कि इसी बीच उसने गन्ने के खेत से तेंदुए को बाहर आते हुए देखा। घबराया रामवीर शोर मचाता हुआ गांव की तरफ भाग आया। हालांकि रामवीर के शोर पर गांव के लोग एकत्र तो हुए लेकिन कोई भी खेतों की तरफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
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ग्रामीणों ने बताया कि जिस खेत मेें बालक तेंदुआ होने की बात कह रहा था, उस खेत से किसी बड़े जानवर के गरजने की आवाज आ रही थी। उधर, दोपहर के वक्त पड़रिया गांव का सर्वेश खेत मेें गन्ने की कटाई कर रहा था। इसी बीच उसके सामने तेंदुआ आ गया।
सर्वेश की मानें तो दूरी अधिक होने के कारण वह वहां से निकल भागने में सफल रहा। सर्वेश का कहना है कि तेंदुआ काफी देर तक खेत के बाहर खड़ा रहा। शोर मचाने पर जब तक ग्रामीण पहुंचे, वह खेत में घुस गया। इधर सूचना पाकर वन विभाग की टीम तो मौके पर पहुंची लेकिन वनकर्मी कॉबिंग करने के बजाय पंजे की नाप करते रहे।
रेंजर बोले, भेड़िया या सियार है
जहां ग्रामीणों से लेकर सदरपुर थानाध्यक्ष तक ने तेंदुआ देखने की बात कही है, वहीं वन विभाग के रेंजर आरसी यादव का बयान बेहद चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि ग्रामीण भ्रम मेें हैं, इस क्षेत्र में तेंदुआ के बजाय कोई बड़ा भेड़िया या सियार मौजूद है जिसको देखकर लोग तेंदुआ होने की बात कह रहे हैं।
रेंजर का यह बयान लोगों के गले नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों का कहना कि सियार व भेड़िया से उनका सामना अक्सर होता रहता है। वे इतना तो जानते हैं कि जो जानवर दिखाई दे रहा है, वह सियार व भेड़िया नहीं है।
जानवरों व बच्चों की चिंता
सदरपुर क्षेत्र में तेंदुआ की मौजूदगी से लोग खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। खासकर ग्रामीण अपने बच्चों व पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीण बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज कर रहे हैं।
वे पशुओं को चराने के लिए खेतों की तरफ भी नहीं जा रहे हैं। हालत यह है कि खेतों में जानवरों के लिए घास लेने जाने से भी ग्रामीणों को डर लग रहा है। ग्रामीणों ने खेतों में जाने से तौबा कर ली है।
तेंदुए की तलाश में लगी है टीम
तेंदुए को लेकर सतर्कता बरती जा रही है, यह तेंदुआ बाराबंकी या फिर लखीमपुर के जंगलों से भटक कर आया है। उसके पगचिह्न न मिल पाने की वजह से उसे खोजने में परेशानी हो रही है। लोगों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीम सतर्क है, तेंदुए को तलाशा जा रहा है।
-डॉ. अनिरुद्ध पांडेय, डीएफओ