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छोटा और बड़ा टिकला को मौत का इंजेक् शन
Updated Wed, 04 Jul 2018 11:32 PM IST
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जरवल (बहराइच)। मोहल्ला तकिया में दो घोड़े घातक ग्लैंडर फारसी बीमारी से ग्रसित मिले। जांच रिपोर्ट हिसार से आने पर पशु चिकित्सक ने दोनों घोड़ों को जहर का इंजेक्शन देकर मार डाला।
डॉक्टरों ने दोनों घोड़ों की मौत के बाद उनके शव को गड्ढे में दफना दिया। इस मामले में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
जरवल नगर पंचायत के मोहल्ला तकिया निवासी शेर अली के पास दो घोड़े छोटा टिकला व बड़ा टिकला थे। जरवल के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया हिसार राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र बिहार को चार जून को 20 घोड़ों के सैंपल भेजे गए थे।
इसमें शेर अली के दोनों घोड़े घातक बीमारी ग्लेंडर फारसी से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसकी रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह को भेजी गई। सीवीओ के निर्देश पर दोनों घोड़ो को पहले बेहोशी का इंजेक्शन देकर बेहोश किया गया। इसके बाद दर्द रहित जहर का इंजेक्शन दिया गया।
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इंजेक्शन देने के दो घंटे बाद दोनों घोड़ो ने दम तोड़ दिया। पशु चिकित्सक ने बताया कि जेसीबी से गहरा गड्ढा खोदवाकर दोनों घोड़ो को दफनवा दिया गया है। मृत घोड़ों की रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर बलवंत सिंह को भेज दी गई है। डॉ. राजीव ने बताया कि मृत घोड़ों के पालक को सरकार की ओर से 25 हजार रुपये सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी।
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डॉक्टरों ने दोनों घोड़ों की मौत के बाद उनके शव को गड्ढे में दफना दिया। इस मामले में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
जरवल नगर पंचायत के मोहल्ला तकिया निवासी शेर अली के पास दो घोड़े छोटा टिकला व बड़ा टिकला थे। जरवल के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया हिसार राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र बिहार को चार जून को 20 घोड़ों के सैंपल भेजे गए थे।
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इसमें शेर अली के दोनों घोड़े घातक बीमारी ग्लेंडर फारसी से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसकी रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह को भेजी गई। सीवीओ के निर्देश पर दोनों घोड़ो को पहले बेहोशी का इंजेक्शन देकर बेहोश किया गया। इसके बाद दर्द रहित जहर का इंजेक्शन दिया गया।
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इंजेक्शन देने के दो घंटे बाद दोनों घोड़ो ने दम तोड़ दिया। पशु चिकित्सक ने बताया कि जेसीबी से गहरा गड्ढा खोदवाकर दोनों घोड़ो को दफनवा दिया गया है। मृत घोड़ों की रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर बलवंत सिंह को भेज दी गई है। डॉ. राजीव ने बताया कि मृत घोड़ों के पालक को सरकार की ओर से 25 हजार रुपये सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी।