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बच्चे चिन्हित नहीं, फिर भी प्रशिक्षण में उड़ाएंगे पांच लाख
Updated Mon, 11 Dec 2017 12:02 AM IST
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रायबरेली। शबरी संकल्प योजना के तहत सहायता देने के लिए अब तक कुपोषित बच्चों को चिन्हित नहीं किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण गांवों में ऐसे बच्चों का वजन नहीं हो सका है, लेकिन विभाग ने जिला स्तर व ब्लॉकों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर व ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जिले को करीब पांच लाख रुपये दिए गए हैं।
शून्य से तीन वर्ष तक के कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए शासन ने शबरी संकल्प योजना के तहत नौनिहालों के परिवारीजनों को हर महीने सहायता देने की व्यवस्था की है। एक महीने पहले ही शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन कराकर कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की सूची भेजने के आदेश दिए गए थे, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण जिले में ऐसे बच्चों का वजन नहीं हो सका था। हड़ताल के कारण शबरी संकल्प योजना के तहत बच्चों के चिन्हीकरण का काम भी नहीं हो पाया था।
शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का चिन्हीकरण न होने की दशा में सूची भी शासन को नहीं भेजी गई। अब तक योजना शुरू हो जानी थी, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। उधर, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर व ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला स्तर पर प्रशिक्षण के लिए 30 हजार और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण के लिए 4.75 लाख रुपये दिए गए हैं। जल्द ही जिले में प्रशिक्षण का काम शुरू हो जाएगा, लेकिन योजना कब शुरू होगी, इसका पता नहीं है। बच्चों का चिन्हीकरण होने के बाद ही योजना शुरू हो सकेगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण शबरी संकल्प योजना के तहत बच्चों के चिन्हीकरण का काम पूरा नहीं हो पाया है। जिला व ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का काम पूरा कराने के लिए बजट मिला है। जल्द ही प्रशिक्षण का काम शुरू कराया जाएगा।
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डेढ़ महीने से बंद आंगनबाड़ी केंद्र
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण करीब डेढ़ महीने से केंद्र बंद हैं। ऐसे में बच्चों को बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही बच्चों का चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित अन्य कार्यक्रमों का संचालन भी कार्यकर्ताओं के असहयोग के कारण ठीक ढंग से नहीं चल पा रहा है।
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शून्य से तीन वर्ष तक के कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए शासन ने शबरी संकल्प योजना के तहत नौनिहालों के परिवारीजनों को हर महीने सहायता देने की व्यवस्था की है। एक महीने पहले ही शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन कराकर कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की सूची भेजने के आदेश दिए गए थे, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण जिले में ऐसे बच्चों का वजन नहीं हो सका था। हड़ताल के कारण शबरी संकल्प योजना के तहत बच्चों के चिन्हीकरण का काम भी नहीं हो पाया था।
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शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का चिन्हीकरण न होने की दशा में सूची भी शासन को नहीं भेजी गई। अब तक योजना शुरू हो जानी थी, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। उधर, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर व ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला स्तर पर प्रशिक्षण के लिए 30 हजार और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण के लिए 4.75 लाख रुपये दिए गए हैं। जल्द ही जिले में प्रशिक्षण का काम शुरू हो जाएगा, लेकिन योजना कब शुरू होगी, इसका पता नहीं है। बच्चों का चिन्हीकरण होने के बाद ही योजना शुरू हो सकेगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण शबरी संकल्प योजना के तहत बच्चों के चिन्हीकरण का काम पूरा नहीं हो पाया है। जिला व ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का काम पूरा कराने के लिए बजट मिला है। जल्द ही प्रशिक्षण का काम शुरू कराया जाएगा।
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डेढ़ महीने से बंद आंगनबाड़ी केंद्र
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण करीब डेढ़ महीने से केंद्र बंद हैं। ऐसे में बच्चों को बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही बच्चों का चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित अन्य कार्यक्रमों का संचालन भी कार्यकर्ताओं के असहयोग के कारण ठीक ढंग से नहीं चल पा रहा है।