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नाबालिग ननद की जबरन अपने प्रेमी के दोस्त जैद को अमन मिश्र बता उससे शादी कराई, फिर कराया सामूहिक दुष्कर्म, कोर्ट ने तीनों को सुनाई 20-20 साल की सजा

Fri, 01 Jul 2022 02:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jul 2022 02:00 AM IST
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20 years prison to three persons in case of rape and kidnap of minor
लखनऊ। प्रेम संबंध चलते रहें, इसके लिए नाबालिग ननद का अपहरण कर उसकी शादी अपने प्रेमी के दोस्त से कराने और दुराचार में सहयोग करने की आरोपी महिला समेत उसके प्रेमी व प्रेमी के दोस्त को दोषी ठहराते हुए पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद मिश्र ने 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों को 80-80 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
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सरकारी वकील सुखेन्द्र प्रताप सिंह और अभिषेक उपाध्याय ने कोर्ट में तर्क दिया कि सोनिका इस मामले की मुख्य सूत्रधार है। वह पीड़िता की सगी भाभी है। उसे डर था कि पीड़िता, विनय मिश्र के साथ उसके प्रेम संबंधों का खुलासा कर सकती है। इसके चलते सोनिका ने विनय के दोस्त मोहम्मद जैद खान का नाम अमन मिश्र बताकर पीड़िता से मिलवाया और जबरन शादी करवा दी। पीड़िता के पिता ने चौक थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 31 अगस्त 2013 की शाम वादी की 16 वर्षीय पुत्री और 24 वर्षीय बहू सोनिका घर से कुछ कार्यवश बाहर गए थे। काफी तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी। रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पुलिस ने विवेचना के दौरान पीड़िता और आरोपी जैद को ढूंढ निकाला। पुलिस ने बताया कि सोनिका का विनय मिश्र से विवाह से पहले से प्रेम संबध था। विवाह के बाद भी घरवालों की अनुपस्थिति में विनय, सोनिका से मिलने आता रहता था। सोनिका ने पीड़िता नाबालिग ननद को बहला-फुसलाकर विनय के दोस्त जैद को अमन मिश्र बताकर पीड़िता से मिलवाया। इसके बाद तीनों पीड़िता का अपहरण कर हरिद्वार ले गए जहां पीड़िता का जबरन जैद खान उर्फ अमन मिश्र से विवाह करा दिया। आरोप है कि इसके बाद सोनिका की मदद से विनय और जैद ने उसके साथ दुराचार किया।
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कोर्ट ने कहा, ऐसा कृत्य समाज के लिए घातक
कोर्ट ने कहा कि सोनिका इस स्थिति में थी कि वह नाबालिग ननद की सोचने सेमझने की शक्ति को प्रभावित कर सकती थी और इस स्थिति का लाभ सोनिका ने उठाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी घटनाओं को देखकर समाज में यह भाव पैदा होता है कि बच्चियां अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं और लोगों का रिश्तों-नातों से भी विश्वास खत्म होता जा रहा है जो भारतीय समाज के लिए घातक है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि प्रत्येक अभियुक्त पर आरोपित समस्त अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को बतौर प्रतिकर अदा की जाएगी जो पीड़िता के वयस्क होने तक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स डिपॉजिट के रूप में उसके पिता की ओर से रखी जाएगी।
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