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2500 के सॉफ्टवेयर से 40 सेकंड में बुक हो जाते थे 20 टिकट, सुबह तत्काल कोटा खुलते ही हो जाता था 'खेल'

Sat, 22 Feb 2020 10:04 PM IST
Vikas Kumar माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 22 Feb 2020 10:04 PM IST
सार

- चंद पलों में तत्काल कोटे की कन्फर्म सीट खींच लेता था रेड मिर्ची
- राजधानी में अब तक सात प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर बरामद

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20 railway tickets were booked in 40 seconds from Software Red Mirchi
सांकेतिक चित्र - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों से ई-टिकट की बुकिंग व इसकी कमाई से टेरर फंडिंग का मामला उजागर होने के बाद शुरू पड़ताल में टिकट दलाली से की गई करोड़ों की कमाई की परतें खुलती जा रही हैं। राजधानी में सात प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर बरामद कर चुकी आरपीएफ के मुताबिक महज 2500 से 3000 में उपलब्ध ये सॉफ्टवेयर इतने तेज हैं कि आईआरसीटीसी की साइट इनके सामने पानी भरती नजर आती है। इसमें रेड मिर्ची तो महज 40 सेकेंड में 20 टिकट बुक कर देता था।

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आईआरसीटीसी अधिकारियों के अनुसार राजधानी में करीब दो हजार अधिकृत एजेंट होंगे। इन्होंने अपने अंडर में सब एजेंट भी रखे हैं। इसमें बड़ी संख्या उनकी है जो फर्जी आईडी से ई-टिकट बना रहे हैं। चारबाग व लखनऊ जंक्शन के आसपास तो फर्जी आईडी वालों का रैकेट फैला हुआ है। प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर की धरपकड़ में लगे आरपीएफ अधिकारी बताते हैं कि ये सॉफ्टवेयर एक पोर्ट तैयार करते हैं जो एक साथ कुछ सेकंडों में ही कई टिकटों की बुकिंग कर देता है। इन सॉफ्टवेयरों पर तत्काल टिकटों की फीडिंग एडवांस में हो जाती है और सुबह 10 बजे तत्काल कोटा खुलते ही इन सीटों की बुकिंग हो जाती है।
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2017 में पकड़ा गया था पहला मामला
आरपीएफ अधिकारी बताते हैं कि अक्तूबर 2017 में पहली बार लखनऊ में प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर से टिकट बनाने वाला एजेंट गिरफ्तार हुआ था। उससे पहले इनका रैकेट गोंडा तक सीमित था। एजेंट मुंबई से ऐसे सॉफ्टवेयर ढाई से तीन हजार रुपये में खरीदते और तत्काल सीटों की बुकिंग कर लाखों रुपये कमाते थे। इतना ही नहीं मुंबई व पुणे में बुक हुए तत्काल टिकटों को दलाल हवाई जहाज व ट्रेन से लखनऊ भेजते थे। ऐसे टिकट लाने वाले कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इसमें पुष्पक एक्सप्रेस का एक कोच अटेंडेंट भी शामिल था।
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आरपीएफ ने दलालों पर कार्रवाई की, लेकिन वह नाकाफी रही। साल 2018 में उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे में जहां 27 व 63 मामले दर्ज हुए। कुल 92 लोग को गिरफ्तार कर 10.56 लाख रुपये के 617 टिकट बरामद हुए। वहीं साल 2019 में दोनों मंडलों में कुल 90 मामले दर्ज कर 93 लोगों को दबोचा। इनसे 10.57 लाख रुपये के 635 टिकट मिले।
 

बेहद ताकतवर सॉफ्टवेयर है रेड मिर्ची

बरामद प्रतिबंधित सॉफ्टवेयरों में सबसे ताकतवर रेड मिर्ची है। यह महज 40 सेकेंड में 20 तत्काल टिकट बुक कर देता था। आलमबाग बाराबिरवा के प्रकाश कॉम्प्लेक्स के किंग-विंग टूर एंड ट्रैवेल कंपनी पर छापा मारकर यह सॉफ्टवेयर बरामद किया गया था।

इस सॉफ्टवेयर से दलाल हर माह सात हजार टिकट बुक करता था और 5400 रुपये प्रतिमाह सॉफ्टवेयर का किराया देता था। वहीं पूर्वोत्तर रेलवे की सीआईबी टीम ने चारबाग अहुजा भवन के आरके ट्रैवल्स पर छापा मारकर सॉफ्टवेयर बरामद किया था, जो मुंबई से 3000 रुपये में खरीदा गया था। इस सॉफ्टवेयर से 80 हजार रुपये की कमाई की जा चुकी थी। 

 

इतनी करते हैं वसूली

टिकट एजेंटों को स्लीपर टिकट की बुकिंग पर 20 रुपये और एसी में 40 रुपये कमीशन मिलता है। जबकि प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर से बने टिकट पर वे मनमाने रेट वसूलते हैं। दलाल दिल्ली व जम्मू की ट्रेनों में स्लीपर के कन्फर्म टिकट के लिए 300 से 500 रुपये तक लेते हैं। जबकि एसी बोगियों के लिए 1000 से 1200 रुपये वसूलते हैं।

त्यौहार के सीजन में तो पांच से सात हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। दलालों पर रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत कार्रवाई होती है। इसमें तीन साल की सजा व 10 हजार रुपये जुर्माना है। लाखों की कमाई करने वाले दलालों को इसका कोई खौफ नहीं है। 

ये सॉफ्टवेयर हो चुके बरामद 
रेड मिर्ची, बीकॉस्यू, टी सिस्टम, आई स्मार्ट, चाइना, क्लाउड, ग्लोबल साइकिल।
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