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Lucknow News: जलकल विभाग में 20 करोड़ का गोलमाल

Wed, 27 Nov 2024 02:02 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Nov 2024 02:02 AM IST
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20 crore scam in water department

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लखनऊ। जलकल विभाग में 20 करोड़ रुपये से अधिक का गोलमाल सामने आया है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग प्रयागराज की टीम ने पिछले सात वर्षों के दौरान जलकल विभाग के खर्चों की जांच में ये गोलमाल पकड़ा है। जलकल विभाग को इसकी रिपोर्ट भेजी गई है। इस रिपोर्ट से पिछले सात वर्षों के दौरान तैनात रहे चार महाप्रबंधक और दो वित्त अधिकारी जांच के घेरे में आ गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार सीवर सफाई के नाम पर तीन करोड़ रुपये से भी ज्यादा कीमत के डीजल-पेट्रोल का घपला किया गया। बिना टेंडर के 69 नलकूपों को री-बोर करा दिया गया। इसमें 43 लाख का गोलमाल हुआ।
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जांच रिपोर्ट करीब 300 पन्नों की है। इसमें वित्तीय वर्ष 2015-16 से वित्तीय वर्ष 2022-23 तक के आय-व्यय की जांच का ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलकल विभाग ने बकाया सीवर व जलकर की वसूली में लापरवाही बरती। चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए बड़े कामों को टुकड़ों में बांटा गया। यह सब इसलिए किया गया ताकि चहेते ठेकेदार शर्तों को पूरा कर सकें और उनको आसानी से टेंडर दिया जा सके।
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पानी शोधित करने वाले रसायन व सेमी हाईमास्ट को ज्यादा दर पर लगाने का भी खुलासा किया है। ठेकेदारों से जमानत राशि न जमा कराए जाने का भी मामला सामने आया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीवर सफाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली मशीनोंं के संचालन में फर्जीवाड़ा किया गया है। ठेकेदारों को अधिक भुगतान किया गया और जमानत राशि की कटौती नहीं की गई।

इनकी बढ़ सकती हैं मुश्किलें

पिछले सात वर्षों के दौरान जलकल विभाग में महाप्रबंधक पद पर चार अलग-अलग लोग तैनात रहे हैं। इनमेंं राजीव वाजपेयी और एसके वर्मा रिटायर हो चुके हैं। वहीं, संजय कुमार, रामकैलाश का तबादला हो चुका है। ऑडिट टीम ने जो घपले पकड़े हैं, उससे इनकी मुसीबतें बढ़ सकती हैं। इनके अलावा जो दो वित्त अधिकारी तैनात रहे। इनमें अजय कुमार गुप्ता ओर गिरिराज किशोर अग्रवाल शामिल हैं।


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प्रमुख घपले

0 बकाया जलकर-सीवरकर की वसूली में लापरवाही से 1.75 करोड़ रुपये का हुआ नुकसान

0 बिना टेंडर 20 एचपी पंप खरीदे जाने से 8.49 लाख का नुकसान हुआ

0ज्यादा दर पर हाईमास्ट लगवाए जाने से 2.20 लाख का नुकसान हुआ

0 बड़े कामों को टुकड़ों में बांटकर देने से एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ

0 पुराने टेंडर के आधार पर ही काम देने से 35 लाख का नुकसान

0 टेंडर के बजाय सीधे फर्म से कार्य कराए जाने से 65 लाख का नुकसान

(नोट: ये आंकड़े अलग-अलग जोन में की गई जांचों के हैं। इसमें सभी जोनों का आंकड़ा शामिल नहीं है।)

अफसरों से जवाब तलब किया जाएगा



ऑडिट रिपोर्ट में जो आपत्तियां उठाई गई हैं, उनका निस्तारण कराया जाएगा। अधिकारियों से जवाब लेकर उनको भेजा जाएगा। कहीं भी अनियमितता मिलने पर उसकी जांच कराई जाएगी।

कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक जलकल
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