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कार्निया के इंतजार में हैं प्रदेश के दो लाख लोग
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कार्निया के इंतजार में प्रदेश के दो लाख लोग
केजीएमयू में सालभर में हुए 750 कार्निया प्रत्यारोपण, देश में सबसे ज्यादा दृष्टिबाधित उत्तर प्रदेश में
प्रदेश में करीब दो लाख कार्नियल दृष्टिबाधित हैं। इन्हें कार्निया प्रत्यारोपण का इंतजार हैं। दानदाताओं से मिले कार्निया के जरिए इन्हें रोशनी लौटाई जा सकती है। केजीएमयू में इस साल करीब 750 कार्निया प्रत्यारोपण किए गए।
साइट लाइफ और द हंस फाउंडेशन के सहयोग से केजीएमयू में आई बैंक की स्थापना की गई है। वर्ष 2016 में स्थापित आई बैंक लगातार दानदाताओं को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में वर्ष 2016 में 720 कार्निया प्रत्यारोपण हुए थे। आई बैंक की स्थापना होने के बाद इसकी संख्या में इजाफा हुआ है। इसके तहत वर्ष 2017 में 1407 और वर्ष 2018 में 1581 लोगों को कार्निया प्रत्यारोपण किया गया है।
इसमें करीब 750 प्रत्यारोपण केजीएमयू में हुए हैं। इस साल 900 कार्निया प्रत्यारोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें करीब 70 फीसदी हासिल कर लिया गया है। राज्य अंधता निवारण कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. वाईके पाठक ने बताया कि नेत्रदान होने के बाद उनकी जांच की जाती है। इस दौरान करीब 20 से 25 फीसदी कार्निया प्रत्यारोपण के योग्य नहीं पाई जाती हैं। ऐसे में उन्हें नष्ट कराना मजबूरी होती है। वर्ष 2018 में कुल करीब 2541 कार्निया का कलेक्शन किया गया, लेकिन उसमें प्रत्यारोपण योग्य 1581 ही पाए गए।
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केजीएमयू में बना है कंट्रोल रूम
आई बैंक के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि नेत्रदान के लिए संस्थान में कंट्रोल रूम बना है। नेत्र बैंक में कार्नियल उपयुक्तता के सटीक निर्धारण के लिए माइक्रोस्कोप तकनीक मौजूद है।
फैक्ट फाइल
- 12 लाख लोग भारत में कार्निया संबंधी दृष्टिहीनता के शिकार हैं।
- 50 फीसदी दृष्टिबाधित लोग विश्व में केवल भारत में हैं।
- 05 सेकंड में विश्व में एक व्यक्ति दृष्टिहीनता का शिकार होता है।
- 05 फीसदी दृष्टिबाधित ही भारत में शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं।
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केजीएमयू में सालभर में हुए 750 कार्निया प्रत्यारोपण, देश में सबसे ज्यादा दृष्टिबाधित उत्तर प्रदेश में
प्रदेश में करीब दो लाख कार्नियल दृष्टिबाधित हैं। इन्हें कार्निया प्रत्यारोपण का इंतजार हैं। दानदाताओं से मिले कार्निया के जरिए इन्हें रोशनी लौटाई जा सकती है। केजीएमयू में इस साल करीब 750 कार्निया प्रत्यारोपण किए गए।
साइट लाइफ और द हंस फाउंडेशन के सहयोग से केजीएमयू में आई बैंक की स्थापना की गई है। वर्ष 2016 में स्थापित आई बैंक लगातार दानदाताओं को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में वर्ष 2016 में 720 कार्निया प्रत्यारोपण हुए थे। आई बैंक की स्थापना होने के बाद इसकी संख्या में इजाफा हुआ है। इसके तहत वर्ष 2017 में 1407 और वर्ष 2018 में 1581 लोगों को कार्निया प्रत्यारोपण किया गया है।
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इसमें करीब 750 प्रत्यारोपण केजीएमयू में हुए हैं। इस साल 900 कार्निया प्रत्यारोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें करीब 70 फीसदी हासिल कर लिया गया है। राज्य अंधता निवारण कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. वाईके पाठक ने बताया कि नेत्रदान होने के बाद उनकी जांच की जाती है। इस दौरान करीब 20 से 25 फीसदी कार्निया प्रत्यारोपण के योग्य नहीं पाई जाती हैं। ऐसे में उन्हें नष्ट कराना मजबूरी होती है। वर्ष 2018 में कुल करीब 2541 कार्निया का कलेक्शन किया गया, लेकिन उसमें प्रत्यारोपण योग्य 1581 ही पाए गए।
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केजीएमयू में बना है कंट्रोल रूम
आई बैंक के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि नेत्रदान के लिए संस्थान में कंट्रोल रूम बना है। नेत्र बैंक में कार्नियल उपयुक्तता के सटीक निर्धारण के लिए माइक्रोस्कोप तकनीक मौजूद है।
फैक्ट फाइल
- 12 लाख लोग भारत में कार्निया संबंधी दृष्टिहीनता के शिकार हैं।
- 50 फीसदी दृष्टिबाधित लोग विश्व में केवल भारत में हैं।
- 05 सेकंड में विश्व में एक व्यक्ति दृष्टिहीनता का शिकार होता है।
- 05 फीसदी दृष्टिबाधित ही भारत में शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं।