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दरगाह पर उमड़े जायरीन, गाजे-बाजे संग आई बारातें
Updated Sun, 06 May 2018 11:48 PM IST
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बहराइच। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर रविवार को मुख्य मेले के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। विभिन्न प्रांतों व जिलों से करीब 14 लाख जायरीन दरगाह पहुंचे। ईशा की नमाज के बाद मुख्य मजार पर दुआ मांगी गई। इसके बाद बारातों के आने का शुरू हुआ सिलसिला पूरी रात चला।
लाखों जायरीन ने दरगाह शरीफ पहुंचकर निशान व चादर चढ़ाकर मन्नत मांगी। 550 से अधिक बारातों ने रविवार देर रात तक मजार शरीफ पर हाजिरी लगाई। ढोल मंजीरे की धुन पर नाचते-गाते बाराती गाजी की शान में कसीदे पढ़ रहे थे। इस दौरान हुई आतिशबाजी आकर्षण चुराती रही।
बारातियों की अगुवानी दरगाह प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने की। दरगाह शरीफ स्थित मुख्य मजार पर खुद्दामों ने देर शाम गुलाबजल, चंदन, केवड़े के साथ 101 घड़ों से मजार को स्नान कराया। मजार शरीफ को फूलों से दूल्हे की तरह सजाया गया।
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सेहरा भी रखा गया। दरगाह प्रबंध समिति व प्रशासनिक अमले ने मजार शरीफ पर पहली चादर चढ़ाई। देर रात मजार शरीफ का मुख्य नाल दरवाजा बारातों के आगमन के लिए खोल दिया गया। बाराती जंजीरी गेट चूमते हुए दरगाह शरीफ में प्रवेश हुए।
नाचते-गाते बाराती आस्था और श्रद्धा से लबरेज दिख रहे थे। जायरीन पलंग पीढ़ी, गागर व चादर के साथ भीड़ में गाजी की मजार पर पहुंचने के लिए कसमकश करते दिखे। हजारों की संख्या में निशान भी चढ़ाए गए।
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि बारातों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है।
नेपाल, आंध्र-प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य-प्रदेश, बिहार, उत्तरांचल, बंगाल, अहमदाबाद व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 550 से अधिक बारातें आईं हैं। जौनपुर से घोड़े पर बारात लाई गई। मुंबई से किन्नरों की तीन बारातें आईं। बारातों के आने का सिलसिला सोमवार सुबह तक जारी रहेगा।
जायरीन अपनी बारात के साथ जो दहेज का सामान पलंगपीढ़ी, फल-फूल, मेवा, गहने व कपड़े लाए थे, उसे जोहरा बीबी की मजार के पास चढ़ाया। बारात की अगुवाई के लिए नाल दरवाजे पर दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद, वरिष्ठ सदस्य बच्चे भारती, जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव और नगर के संभ्रांत लोग मौजूद रहे।
सीसीटीवी कैमरे से मेले पर रखी नजर
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे की डिवाइस से मेले की व्यवस्था पर नजर रखी गई। मेला परिसर में 60 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं, जिससे निगरानी की जा रही है।
सुबह 8 बजे तक आएंगी बारातें
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि देर शाम शुरू हुआ बारातों के आने का सिलसिला सोमवार सुबह 8 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान पूरे समय मजार शरीफ का फाटक बारातियों व श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा।
जमकर हुई खरीदारी
गाजी की मजार पर हाजिरी लगाने के बाद जायरीन और मेलार्थियों ने मेला परिसर में स्थित दुकानों पर जमकर खरीदारी की। कानपुर, लखनऊ, बनारस, आगरा से आई दुकानें मेला परिसर का आकर्षण चुरा रही थीं।
चित्तौरा झील के तट पर भी रहा आस्था का संगम
दरगाह पर मुख्य मेले में शामिल होने के लिए चित्तौरा झील के तट पर परंपरा और आस्था का संगम हिलोरे लेता रहा। झील में डुबकियां लगाकर लोग परंपरा निर्वहन में जुटे रहे। मुख्य मेले के दिन झील के तट पर अकीदतमंदों ने स्नान कर परंपरा का निर्वहन किया।
इसके बाद यहां से गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए मजार शरीफ पहुंचकर हाजिरी लगाई। दरगाह शरीफ के मेला परिसर व नाल दरवाजा परिसर के अलावा जायरीन सलारबाग, पलरीबाग, जोहराबाग सहित विभिन्न स्थानों पर डेरों में ठहरे हुए हैं।
हठीले में निभा रहे मुर्गा उड़ाने की परंपरा
चित्तौरा झील से चलकर जायरीन हठीले होकर गुजर रहे हैं। हठीला दरगाह शरीफ में वर्षों पुरानी मुर्गा उड़ाने की परंपरा भी जायरीन निभा रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि हठीले में मुर्गा उड़ाने से सभी दुखों व कष्टों का निवारण होता है।
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लाखों जायरीन ने दरगाह शरीफ पहुंचकर निशान व चादर चढ़ाकर मन्नत मांगी। 550 से अधिक बारातों ने रविवार देर रात तक मजार शरीफ पर हाजिरी लगाई। ढोल मंजीरे की धुन पर नाचते-गाते बाराती गाजी की शान में कसीदे पढ़ रहे थे। इस दौरान हुई आतिशबाजी आकर्षण चुराती रही।
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बारातियों की अगुवानी दरगाह प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने की। दरगाह शरीफ स्थित मुख्य मजार पर खुद्दामों ने देर शाम गुलाबजल, चंदन, केवड़े के साथ 101 घड़ों से मजार को स्नान कराया। मजार शरीफ को फूलों से दूल्हे की तरह सजाया गया।
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सेहरा भी रखा गया। दरगाह प्रबंध समिति व प्रशासनिक अमले ने मजार शरीफ पर पहली चादर चढ़ाई। देर रात मजार शरीफ का मुख्य नाल दरवाजा बारातों के आगमन के लिए खोल दिया गया। बाराती जंजीरी गेट चूमते हुए दरगाह शरीफ में प्रवेश हुए।
नाचते-गाते बाराती आस्था और श्रद्धा से लबरेज दिख रहे थे। जायरीन पलंग पीढ़ी, गागर व चादर के साथ भीड़ में गाजी की मजार पर पहुंचने के लिए कसमकश करते दिखे। हजारों की संख्या में निशान भी चढ़ाए गए।
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि बारातों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है।
नेपाल, आंध्र-प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य-प्रदेश, बिहार, उत्तरांचल, बंगाल, अहमदाबाद व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 550 से अधिक बारातें आईं हैं। जौनपुर से घोड़े पर बारात लाई गई। मुंबई से किन्नरों की तीन बारातें आईं। बारातों के आने का सिलसिला सोमवार सुबह तक जारी रहेगा।
जायरीन अपनी बारात के साथ जो दहेज का सामान पलंगपीढ़ी, फल-फूल, मेवा, गहने व कपड़े लाए थे, उसे जोहरा बीबी की मजार के पास चढ़ाया। बारात की अगुवाई के लिए नाल दरवाजे पर दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद, वरिष्ठ सदस्य बच्चे भारती, जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव और नगर के संभ्रांत लोग मौजूद रहे।
सीसीटीवी कैमरे से मेले पर रखी नजर
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे की डिवाइस से मेले की व्यवस्था पर नजर रखी गई। मेला परिसर में 60 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं, जिससे निगरानी की जा रही है।
सुबह 8 बजे तक आएंगी बारातें
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि देर शाम शुरू हुआ बारातों के आने का सिलसिला सोमवार सुबह 8 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान पूरे समय मजार शरीफ का फाटक बारातियों व श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा।
जमकर हुई खरीदारी
गाजी की मजार पर हाजिरी लगाने के बाद जायरीन और मेलार्थियों ने मेला परिसर में स्थित दुकानों पर जमकर खरीदारी की। कानपुर, लखनऊ, बनारस, आगरा से आई दुकानें मेला परिसर का आकर्षण चुरा रही थीं।
चित्तौरा झील के तट पर भी रहा आस्था का संगम
दरगाह पर मुख्य मेले में शामिल होने के लिए चित्तौरा झील के तट पर परंपरा और आस्था का संगम हिलोरे लेता रहा। झील में डुबकियां लगाकर लोग परंपरा निर्वहन में जुटे रहे। मुख्य मेले के दिन झील के तट पर अकीदतमंदों ने स्नान कर परंपरा का निर्वहन किया।
इसके बाद यहां से गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए मजार शरीफ पहुंचकर हाजिरी लगाई। दरगाह शरीफ के मेला परिसर व नाल दरवाजा परिसर के अलावा जायरीन सलारबाग, पलरीबाग, जोहराबाग सहित विभिन्न स्थानों पर डेरों में ठहरे हुए हैं।
हठीले में निभा रहे मुर्गा उड़ाने की परंपरा
चित्तौरा झील से चलकर जायरीन हठीले होकर गुजर रहे हैं। हठीला दरगाह शरीफ में वर्षों पुरानी मुर्गा उड़ाने की परंपरा भी जायरीन निभा रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि हठीले में मुर्गा उड़ाने से सभी दुखों व कष्टों का निवारण होता है।