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अब तक नौ बच्चे मार चुके कुते
Updated Wed, 02 May 2018 12:17 AM IST
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अब तक नौ बच्चे मार चुके कुत्ते
सीतापुर। जिम्मेदारों की लापरवाही और मासूमों की जान पर खतरा देख क्षेत्र के बाशिंदों के सब्र का बांध टूट गया है। यही वजह है कि मंगलवार को जब क्षेत्र के तीन मासूमों को आदमखोर कुत्तों ने निवाला बना डाला तो ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया। मंगलवार देर रात तक ग्रामीणों ने सात कुत्तों को लाठी-डंडों से पीटकर मार डाला।
मालूम हो कि, आदमखोर कुत्तों का झुंड खैराबाद इलाके मेें अब तक नौ बच्चों को निवाला बना चुका है। जबकि 18 बच्चों को हमला कर जख्मी कर चुका है। क्षेत्र की 400 से अधिक बकरियों को कुत्तों का ये झुंड निवाला बना चुका है।
क्षेत्र के ग्रामीण प्रशासन से मदद की राह तकता रहे, मगर कुत्तों का झुंड एक बाद एक बच्चों को अपना निवाला बनाता रहा। मंगलवार को जब कुत्तों के झुंड ने एक-एक करके तीन मासूमों को अपना निवाला बनाया तो ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया।
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नतीजतन अपने बच्चों की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने खुद ही कुत्तों का सामना करने का फैसला लिया। जिसके बाद बद्री खेड़ा, कोलिया, महेशपुर, पहाड़पुर, रहिमाबाद, गुरपलिया, नेवादा, टिकरिया, जैनापुर, जैती खेड़ा, कस्बा खैराबाद आदि गांवों के सैकड़ों लोग लाठी-डंडे, बांका, हंसिया, फरसे, जाल, रस्सी लेकर खेतों में उतर गए। ग्रामीणों ने गन्ने के खेतों व बागों में आदमखोर कुत्तों की तलाश शुरू की। इस दौरान खेत व बाग में जो भी कुत्ता सामने पड़ा, वह ग्रामीणों के रोष का शिकार होकर अपनी जान गंवा बैठा। इस दौरान ग्रामीणों ने बच्चों को घरों में ही कैद कर रखा था और महिलाएं घर व गांव पर नजर रख रहीं थी। हालत ये थी कि हर तरफ मारो-मारो की आवाज गूंज रही थी। जहां ग्रामीण कुत्तों की तलाश कर रहे थे, वहीं प्रशासन को भी कोस रहे थे। लोगों का कहना था कि न जाने प्रशासन का जमीर कब जागेगा, आखिर अधिकारियों को और कितने मासूमों की जान जाने का इंतजार है।
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सीतापुर। जिम्मेदारों की लापरवाही और मासूमों की जान पर खतरा देख क्षेत्र के बाशिंदों के सब्र का बांध टूट गया है। यही वजह है कि मंगलवार को जब क्षेत्र के तीन मासूमों को आदमखोर कुत्तों ने निवाला बना डाला तो ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया। मंगलवार देर रात तक ग्रामीणों ने सात कुत्तों को लाठी-डंडों से पीटकर मार डाला।
मालूम हो कि, आदमखोर कुत्तों का झुंड खैराबाद इलाके मेें अब तक नौ बच्चों को निवाला बना चुका है। जबकि 18 बच्चों को हमला कर जख्मी कर चुका है। क्षेत्र की 400 से अधिक बकरियों को कुत्तों का ये झुंड निवाला बना चुका है।
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क्षेत्र के ग्रामीण प्रशासन से मदद की राह तकता रहे, मगर कुत्तों का झुंड एक बाद एक बच्चों को अपना निवाला बनाता रहा। मंगलवार को जब कुत्तों के झुंड ने एक-एक करके तीन मासूमों को अपना निवाला बनाया तो ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया।
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नतीजतन अपने बच्चों की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने खुद ही कुत्तों का सामना करने का फैसला लिया। जिसके बाद बद्री खेड़ा, कोलिया, महेशपुर, पहाड़पुर, रहिमाबाद, गुरपलिया, नेवादा, टिकरिया, जैनापुर, जैती खेड़ा, कस्बा खैराबाद आदि गांवों के सैकड़ों लोग लाठी-डंडे, बांका, हंसिया, फरसे, जाल, रस्सी लेकर खेतों में उतर गए। ग्रामीणों ने गन्ने के खेतों व बागों में आदमखोर कुत्तों की तलाश शुरू की। इस दौरान खेत व बाग में जो भी कुत्ता सामने पड़ा, वह ग्रामीणों के रोष का शिकार होकर अपनी जान गंवा बैठा। इस दौरान ग्रामीणों ने बच्चों को घरों में ही कैद कर रखा था और महिलाएं घर व गांव पर नजर रख रहीं थी। हालत ये थी कि हर तरफ मारो-मारो की आवाज गूंज रही थी। जहां ग्रामीण कुत्तों की तलाश कर रहे थे, वहीं प्रशासन को भी कोस रहे थे। लोगों का कहना था कि न जाने प्रशासन का जमीर कब जागेगा, आखिर अधिकारियों को और कितने मासूमों की जान जाने का इंतजार है।