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विकास को नए आयाम देने वाली साहसी महिलाएं सम्मानित
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:20 PM IST
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बहराइच। किसी ने समाज की रूढ़िवादिता को आइना दिखाया तो किसी ने साहस का प्रदर्शन कर समाज में पहचान बनाई। इस अदम्यता के लिए जिले की विभिन्न क्षेत्रों की सात महिलाओं को चयनित किया गया।
इनमें तीन महिला ग्राम प्रधान भी शामिल हैं। इन्हें लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पुरस्कृत कर समाज के लिए मिसाल बताया। सभी महिलाएं सम्मानित होकर काफी गदगद हैं।
योगी सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार के लिए प्रदेश की 121 महिलाओं को चयनित किया था। इनमें हर क्षेत्र की वे महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने अपने साहस और पराक्रम से समाज में पहचान बनाई।
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इन 121 महिलाओं में बहराइच की सात महिलाएं शामिल हैं, जिनमें तीन महिलाएं ग्राम प्रधान हैं। चार ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होने तेंदुए और लकड़बग्घे के जबड़े से अपनी बेटी की जान बचाई। महिला प्रधानों ने भी घर की दहलीज लांघकर विकास को गति देने का काम किया है।
पहले हुई झिझक, अब सब दे रहे साथ
महिला ग्राम प्रधान अनीता देवी ने बताया कि गांव में पहले शौचालय के प्रयोग के लिए जागरूकता नहीं थी। खुले में शौच की प्रथा को खत्म करने में महिलाओं को एकत्र कर उनकी भूमिका निर्धारित की गई। पहले कुछ महिलाएं झिझक रही थीं। मगर बाद में सभी ने सहयोग दिया।
-अनीता देवी, ग्राम प्रधान, हरदी गौरा महसी
रूढ़िवादिता के खिलाफ किया जागरूक
क्षेत्र की महिलाएं रूढ़िवादी अधिक थीं। स्वच्छता और शौचालय के नाम पर संकोच था। इसके कारण महिलाओं की पंचायत कर उनका संकोच दूर किया। फिर सभी ने साथ दिया, इससे गांव स्वच्छ बना। घर-घर में शौचालय बन सका है।
-कमला देवी, ग्राम प्रधान, बौव्वां हुजूरपुर
ओडीएफ करवाया गांव
स्वच्छता अभियान के प्रति घर-घर संवाद कर अलख जगाई। कई बार महिलाओं के साथ उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी समझाना पड़ा। इसके कारण लोगों में जागरूकता बढ़ी। गांव को ओडीएफ घोषित कराया। जिसका सुखद परिणाम मुख्यमंत्री के पुरस्कार के रूप में सामने आया।
-गीता जायसवाल, ग्राम प्रधान, चिलवरिया चित्तौरा
गांव में प्रधानों ने कराए कार्य
-शौचालय प्रयोग के लिए प्रेरित करते हुए एक राजस्व ग्राम को ओडीएफ घोषित कराया।
-लोगों को प्रेरित कर स्वप्रेरणा से दस शौचालय बनवाए।
-प्रत्येक शनिवार को विशेष सफाई अभियान और स्वच्छता रैली का आयोजन।
-महिलाओं को अधिकारों व सेनेटरी नैपकिन के प्रयोग के लिए किया जागरूक।
-बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाया।
-ग्रामीणों के सहयोग से एक-एक गरीब लड़की की शादी करवाई।
हर महिला बनें साहसी : सुनीता
राजराम टांड़ा करीकोट गांव निवासी सुनीता सफाईकर्मी के पद पर तैनात है। सुनीता ने बताया कि 16 अक्तूबर 2011 की शाम की घटना उसके जेहन में आज भी जस की तस है। सुनीता ने बताया कि घर के बाहर तेंदुए ने बेटी लक्ष्मी पर हमला किया। वे दौड़ी तो सामने तेंदुआ देखकर डंडे लेकर उससे भिड़ गई। बेटी को सकुशल बचा लिया। सुनीता ने कहा कि हर महिला को साहसी बनने की जरूरत है।
मुसीबत में मत घबराएं : सिंधू
मऊ जिले के बनकटी रामपुर जोलीघाट निवासी सिंधू पत्नी कल्पू की रिश्तेदारी सुजौली के मटेही रमपुरवा गांव में है। बीते माह मांगलिक कार्यक्रम में वह मटेही भाई के घर आई थी। उसी दिन खेत जाते समय तेंदुए ने बेटी खुशबू पर हमला कर दिया था। सिंधू ने तेंदुए से संघर्ष कर बेटी की जान बचाई थी। सिंधू का कहना है कि मुसीबत आती रहती है लेकिन घबराना नहीं चाहिए।
जख्मी होने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत : तारा
रामगांव थाना अंतर्गत मुकेरिया गांव निवासी तारा पत्नी रफीक ने बताया कि खेत में तिलहन काटते समय चार वर्षीय बेटी मन्नू पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। तारा बेटी को बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ी। संघर्ष में वह घायल भी हो गई। तारा का कहना है कि किसी भी मुसीबत के समय अंतिम क्षण तक लड़ो, सफलता अवश्य मिलेगी।
लकड़बग्घे से भिड़ी पुष्पा
महसी के डिहवा चंदपईया निवासी पुष्पा ने बताया कि सात मार्च की शाम पांच साल की बेटी सावित्री के साथ खेत गई थी। तभी मेड़ पर गन्ने के खेत से निकले लकड़बग्घे ने हमला कर घायल कर दिया। पुष्पा ने 20 मिनट तक लकड़बग्घे से संघर्ष कर बेटी की जान बचाई। पुष्पा का कहना है कि विषम परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
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इनमें तीन महिला ग्राम प्रधान भी शामिल हैं। इन्हें लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पुरस्कृत कर समाज के लिए मिसाल बताया। सभी महिलाएं सम्मानित होकर काफी गदगद हैं।
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योगी सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार के लिए प्रदेश की 121 महिलाओं को चयनित किया था। इनमें हर क्षेत्र की वे महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने अपने साहस और पराक्रम से समाज में पहचान बनाई।
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इन 121 महिलाओं में बहराइच की सात महिलाएं शामिल हैं, जिनमें तीन महिलाएं ग्राम प्रधान हैं। चार ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होने तेंदुए और लकड़बग्घे के जबड़े से अपनी बेटी की जान बचाई। महिला प्रधानों ने भी घर की दहलीज लांघकर विकास को गति देने का काम किया है।
पहले हुई झिझक, अब सब दे रहे साथ
महिला ग्राम प्रधान अनीता देवी ने बताया कि गांव में पहले शौचालय के प्रयोग के लिए जागरूकता नहीं थी। खुले में शौच की प्रथा को खत्म करने में महिलाओं को एकत्र कर उनकी भूमिका निर्धारित की गई। पहले कुछ महिलाएं झिझक रही थीं। मगर बाद में सभी ने सहयोग दिया।
-अनीता देवी, ग्राम प्रधान, हरदी गौरा महसी
रूढ़िवादिता के खिलाफ किया जागरूक
क्षेत्र की महिलाएं रूढ़िवादी अधिक थीं। स्वच्छता और शौचालय के नाम पर संकोच था। इसके कारण महिलाओं की पंचायत कर उनका संकोच दूर किया। फिर सभी ने साथ दिया, इससे गांव स्वच्छ बना। घर-घर में शौचालय बन सका है।
-कमला देवी, ग्राम प्रधान, बौव्वां हुजूरपुर
ओडीएफ करवाया गांव
स्वच्छता अभियान के प्रति घर-घर संवाद कर अलख जगाई। कई बार महिलाओं के साथ उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी समझाना पड़ा। इसके कारण लोगों में जागरूकता बढ़ी। गांव को ओडीएफ घोषित कराया। जिसका सुखद परिणाम मुख्यमंत्री के पुरस्कार के रूप में सामने आया।
-गीता जायसवाल, ग्राम प्रधान, चिलवरिया चित्तौरा
गांव में प्रधानों ने कराए कार्य
-शौचालय प्रयोग के लिए प्रेरित करते हुए एक राजस्व ग्राम को ओडीएफ घोषित कराया।
-लोगों को प्रेरित कर स्वप्रेरणा से दस शौचालय बनवाए।
-प्रत्येक शनिवार को विशेष सफाई अभियान और स्वच्छता रैली का आयोजन।
-महिलाओं को अधिकारों व सेनेटरी नैपकिन के प्रयोग के लिए किया जागरूक।
-बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाया।
-ग्रामीणों के सहयोग से एक-एक गरीब लड़की की शादी करवाई।
हर महिला बनें साहसी : सुनीता
राजराम टांड़ा करीकोट गांव निवासी सुनीता सफाईकर्मी के पद पर तैनात है। सुनीता ने बताया कि 16 अक्तूबर 2011 की शाम की घटना उसके जेहन में आज भी जस की तस है। सुनीता ने बताया कि घर के बाहर तेंदुए ने बेटी लक्ष्मी पर हमला किया। वे दौड़ी तो सामने तेंदुआ देखकर डंडे लेकर उससे भिड़ गई। बेटी को सकुशल बचा लिया। सुनीता ने कहा कि हर महिला को साहसी बनने की जरूरत है।
मुसीबत में मत घबराएं : सिंधू
मऊ जिले के बनकटी रामपुर जोलीघाट निवासी सिंधू पत्नी कल्पू की रिश्तेदारी सुजौली के मटेही रमपुरवा गांव में है। बीते माह मांगलिक कार्यक्रम में वह मटेही भाई के घर आई थी। उसी दिन खेत जाते समय तेंदुए ने बेटी खुशबू पर हमला कर दिया था। सिंधू ने तेंदुए से संघर्ष कर बेटी की जान बचाई थी। सिंधू का कहना है कि मुसीबत आती रहती है लेकिन घबराना नहीं चाहिए।
जख्मी होने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत : तारा
रामगांव थाना अंतर्गत मुकेरिया गांव निवासी तारा पत्नी रफीक ने बताया कि खेत में तिलहन काटते समय चार वर्षीय बेटी मन्नू पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। तारा बेटी को बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ी। संघर्ष में वह घायल भी हो गई। तारा का कहना है कि किसी भी मुसीबत के समय अंतिम क्षण तक लड़ो, सफलता अवश्य मिलेगी।
लकड़बग्घे से भिड़ी पुष्पा
महसी के डिहवा चंदपईया निवासी पुष्पा ने बताया कि सात मार्च की शाम पांच साल की बेटी सावित्री के साथ खेत गई थी। तभी मेड़ पर गन्ने के खेत से निकले लकड़बग्घे ने हमला कर घायल कर दिया। पुष्पा ने 20 मिनट तक लकड़बग्घे से संघर्ष कर बेटी की जान बचाई। पुष्पा का कहना है कि विषम परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।